अनिश्चितता में मनरेगा श्रमिक, दो दशकों में पहली बार केंद्र सरकार ने नहीं की नई मज़दूरी दरों की घोषणा

मनरेगा से जुड़े करोड़ों मज़दूर अनिश्चितता में हैं, क्योंकि केंद्र सरकार ने पिछले दो दशकों में पहली बार हर साल होने वाली नई मज़दूरी दरों की घोषणा टाल दी है. सरकार का कहना है कि मज़दूरी दरों में संशोधन ‘वीबी-जी राम जी’ लागू होने के बाद होगा, लेकिन नई योजना के लागू होने की समयसीमा अब तक साफ नहीं की गई है.

मध्य प्रदेश में मनरेगा के तहत महिलाएं एक तालाब का निर्माण करती हुईं. (फोटो: UN Women Asia and the Pacific/Flickr (CC BY-NC-ND 2.0)

नई दिल्ली: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत काम करने वाले करोड़ों श्रमिकों को इस साल मजदूरी बढ़ोतरी के लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार तब तक नई मजदूरी दरों की घोषणा नहीं करेगी, जब तक कि नई योजना ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ (वीबी-जी राम जी) लागू नहीं हो जाती.

यह पिछले एक दशक में पहली बार है जब केंद्र सरकार ने फरवरी-मार्च के दौरान मनरेगा की संशोधित मजदूरी दरों की अधिसूचना जारी नहीं की है. आम तौर पर हर साल वित्तीय वर्ष शुरू होने से पहले नई दरें घोषित कर दी जाती हैं, जो 1 अप्रैल से लागू होती हैं.

अखबार ने सूत्रों के लिखा है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राज्यों को सूचित किया है कि 2026-27 के लिए नई मजदूरी दरें वीबी-जी राम जी योजना लागू होने के बाद ही तय की जाएंगी. तब तक 2025-26 की मौजूदा मजदूरी दरें ही लागू रहेंगी. हाल ही में हुई एक वीडियो कॉन्फ्रेंस में मंत्रालय के अधिकारियों ने राज्यों के प्रतिनिधियों को यह जानकारी दी.

मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया, ‘जैसे ही नई योजना लागू होगी, मजदूरी दरों को संशोधित कर अधिसूचित किया जाएगा. तब तक मौजूदा दरों पर ही भुगतान जारी रहेगा.’

मनरेगा के तहत मजदूरी दरें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (कृषि श्रमिक) यानी सीपीआई-एएल के आधार पर तय होती हैं, जो ग्रामीण महंगाई को दर्शाता है.

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 तक मनरेगा के तहत 11.03 करोड़ सक्रिय श्रमिक पंजीकृत थे. वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5.34 करोड़ परिवारों (करीब 7.2 करोड़ व्यक्तियों) ने इस योजना के तहत काम किया.

पिछले साल 27 मार्च को केंद्र ने नई मजदूरी दरों की घोषणा की थी, जिसमें 2 से 7 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई थी. लेकिन इस बार अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है.

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 पारित किया था, जिसके जरिए लगभग दो दशक पुरानी मनरेगा योजना को समाप्त कर एक नई ग्रामीण रोजगार योजना लागू करने का प्रस्ताव है.

हालांकि, इस नए कानून के कई प्रावधानों को लेकर विपक्ष ने चिंता जताई है. खासतौर पर फंडिंग पैटर्न, संसाधनों के आवंटन और कृषि के व्यस्त मौसम में रोजगार गारंटी को अस्थायी रूप से रोकने जैसे प्रावधानों की आलोचना की गई है.

नई योजना के तहत राज्यों की हिस्सेदारी भी बढ़ाई गई है. वीबी-जी राम जी कानून के अनुसार, 11 विशेष राज्यों के लिए केंद्र और राज्य के बीच फंडिंग अनुपात 90:10 होगा, जबकि अन्य राज्यों के लिए यह 60:40 रहेगा. इसके विपरीत, मनरेगा में मजदूरी का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी और सामग्री व प्रशासनिक लागत का 75 प्रतिशत हिस्सा भी केंद्र देता था.

अब तक सरकार ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि नई योजना कब से लागू होगी. तब तक मनरेगा जारी रहेगी, जिसके लिए 2026-27 के केंद्रीय बजट में 30,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं.