वर्धा: महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति के दौरे के बीच पुलिस की निगरानी में नज़रबंद रहे 20 से अधिक छात्र

वर्धा के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के दौरे के दौरान 20 से अधिक छात्रों को हॉस्टल कमरों में सीमित कर दिया गया. पुलिस ने इसे सुरक्षा क़दम बताया, जबकि छात्रों ने बिना आधार कार्रवाई और सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय से जुड़ा कुछ भी पोस्ट करने से रोकने का आरोप लगाया.

वर्धा में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा, 'हमें सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत का निर्माण करना है.' (फोटो: एक्स/@rashtrapatibhvn)

नई दिल्ली: महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में गुरुवार को आयोजित छठे दीक्षांत समारोह के दौरान 20 से अधिक छात्रों को उनके हॉस्टल कमरों में ही रोक दिया गया. छात्रों का आरोप है कि वर्धा पुलिस ने उन्हें ‘सुरक्षा’ का हवाला देते हुए प्रभावी रूप से ‘हाउस अरेस्ट’ कर दिया.

इस दीक्षांत समारोह में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुईं. उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विद्यार्थियों को गुलामी की मानसिकता के अवशेषों को समाप्त करना चाहिए और भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनः प्रतिष्ठा करनी चाहिए.

किन छात्रों को रोका गया?

विश्वविद्यालय के तीन हॉस्टलों- सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद, के कुल 22 छात्रों को रोकने के लिए एक सूची तैयार की गई थी. द वायर हिंदी से बातचीत में रामनगर थाने की पुलिस अधिकारी कंचन ने बताया कि छात्रों की यह सूची उनके पुराने पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किए गए थे. हालांकि, सूची में शामिल हिंदी साहित्य के छात्र गोविंद कुमार ने बताया कि उनका कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है.

द वायर हिंदी से बातचीत में गोविंद ने कहा:

मेरा कोई पुलिस रिकॉर्ड नहीं है. मेरे खिलाफ इस विश्वविद्यालय में कोई शिकायत दर्ज नहीं है. मैंने कभी किसी से मारपीट या गाली-गलौज नहीं की. मैं किसी छात्र संगठन से भी नहीं जुड़ा हूं. फिर भी पता नहीं मुझे किस आधार पर नोटिस दिया गया.

गोविंद के मुताबिक, पुलिस कहना था कि विश्वविद्यालय की राजनीतिक आवाजें विद्रोह का रूप न ले लें, इसलिए ऐसा किया जा रहा है. गोविंद के मामले के बारे में जब रामनगर थाने की पुलिस अधिकारी कंचन से पूछा गया तो उन्होंने साफ इनकार किया कि ऐसे किसी छात्र को नोटिस नहीं दिया गया था.

सूची में शामिल धनंजय सिंह ने बताया, ‘मैं कैंपस में नहीं था, फिर भी मेरा नाम सूची में डाल दिया गया. मेरे पास लोकल इंटेलिजेंस यूनिट और विश्वविद्यालय प्रशासन का कॉल आ रहा था. जूनियर्स ने बताया बताया कि पुलिस वालों ने रात में उन्हें हॉस्टल की छत पर सोने भी नहीं दिया.’

द वायर हिंदी से बातचीत में कंचन ने कहा, ‘राष्ट्रपति आई थीं इसलिए सुरक्षा के लिए नोटिस देना पड़ा. हालांकि, मैं वहीं पर थी कि उनको (छात्रों को) कोई इमरजेंसी हो तो बाहर जाने देने के लिए.’

नोटिस में क्या था?

15 अप्रैल, 2026 की रात ही छात्रों को पुलिस स्टेशन रामनगर, जिला वर्धा की ओर से धारा 168 बीएनएसएस के तहत एक नोटिस दिया गया था.

नोटिस में कहा गया है कि 16 अप्रैल को विश्वविद्यालय में होने वाले दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति के शामिल होने के मद्देनज़र पुलिस को ‘गोपनीय और विश्वसनीय सूचना’ मिली है कि संबंधित व्यक्ति या उनके सहयोगियों द्वारा कार्यक्रम स्थल पर ‘आक्षेप/अनुचित कृत्य या व्यवधान’ उत्पन्न किया जा सकता है.

नोटिस में छात्रों को निर्देश दिया गया है कि वे किसी भी प्रकार की गैरकानूनी या व्यवधानकारी गतिविधि में शामिल न हों. साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि उनके आचरण से कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती है, तो उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और इस नोटिस को न्यायालय में साक्ष्य के रूप में पेश किया जा सकता है.

इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय  का पक्ष जानने के लिए विश्वविद्यालय के कुलसचिव कादर नवाज खान से संपर्क किया गया है, जवाब मिलने पर रिपोर्ट में अपडेट किया जाएगा.

‘सोशल मीडिया पर पोस्ट से रोक’

गोविंद समेत अन्य छात्रों ने भी बताया कि पुलिस ने उन्हें सोशल मीडिया पर विश्वविद्यालय से जुड़ा कुछ भी पोस्ट करने से मना किया था. इस बीच कुछ छात्रों ने फेसबुक अकाउंट बंद होने की भी बात कही है.

चंदन सरोज, राजेश कुमार यादव, रजनीश कुमार आंबेडकर और निरंजन ओबेरॉय का फेसबुक प्रोफाइल 15 अप्रैल से नजर आना बंद हो गया है. ये सभी छात्र अलग-अलग मुद्दों पर कैंपस में आवाज उठाते रहे हैं.