नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने शुक्रवार (17 अप्रैल) को रूसी तेल पर उसके द्वारा लगाए गए प्रतिबंध में दी गई छूट को फिर से बढ़ा दिया है, जिसके तहत भारत सहित कई देशों को करीब एक महीने तक समुद्र में मौजूद प्रतिबंधित रूसी तेल खरीदने की अनुमति मिल गई है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग द्वारा दी गई इस छूट के तहत देश उन रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों को खरीद सकते हैं, जो शुक्रवार तक जहाजों पर लदे हुए हैं. यह छूट अब 16 मई तक लागू रहेगी. इससे पहले दी गई 30 दिनों की छूट 11 अप्रैल को समाप्त हो गई थी.
इससे पहले यह छूट उस समय दी गई थी, जब होर्मुज़ जलडमरूमध्य में ईरान की जवाबी नाकाबंदी के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में अभूतपूर्व बाधा पैदा हो गई थी और बड़ी मात्रा में रूसी तेल समुद्र में फंस गया था.
अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने बुधवार (15 अप्रैल) को कहा था कि उनका प्रशासन इस छूट को आगे नहीं बढ़ाएगा. उन्होंने कहा था, ‘प्रतिबंध से छूट उस तेल को मिला था जो 11 मार्च से पहले समुद्र में था, और अब उसका इस्तेमाल हो चुका है.’
हालांकि, ऊर्जा आपूर्ति में बाधा से प्रभावित एशियाई देशों ने इस छूट को बढ़ाने के लिए वाशिंगटन पर दबाव डाला. रॉयटर्स के अनुसार, नरेंद्र मोदी सरकार को भी उम्मीद थी कि अमेरिका इस छूट को बढ़ाएगा.
भारत ने इस छूट के तहत रूसी कच्चे तेल की खरीद की है, जिसे उसने ट्रंप प्रशासन के दबाव में पहले कम कर दिया था. ब्लूमबर्ग के अनुसार, मार्च में भारत ने जून 2023 के बाद से रूसी तेल की अपनी सबसे अधिक दैनिक औसत खरीद दर्ज की.
पिछले महीने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 30 दिनों के लिए भारत को रूसी तेल ख़रीदने की अनुमति दी थी. यह कदम ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण बढ़ी कीमतों के दबाव को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया था.
इस फैसले का रूस ने स्वागत किया था, लेकिन भारतीय विपक्षी नेताओं ने इस बात पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा किसी विदेशी देश की अनुमति पर निर्भर है.
पिछले साल ट्रंप प्रशासन ने रूसी कच्चे तेल की खरीद का हवाला देते हुए भारतीय निर्यात पर 25% ‘पेनल्टी’ टैरिफ लगाया था, जो पहले से लगे 25% ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ के अतिरिक्त था. यह अतिरिक्त शुल्क इस साल की शुरुआत में साइन हुए इंडिया अमेरिका ट्रेड डील के बाद हटा लिया गया था. लेकिन ट्रंप ने कहा था कि अगर नई दिल्ली ‘प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से’ फिर से रूसी तेल की खरीद बढ़ाती है, तो इस शुल्क को दोबारा लागू करने पर विचार किया जा सकता है.
