नई दिल्ली: लोकसभा के विस्तार और व्यापक परिसीमन की राह खोलने वाला संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 शुक्रवार (17 अप्रैल) को लोकसभा में गिर गया, जिसके बाद शनिवार शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए, उन पर महिलाओं के हितों के खिलाफ खड़े होने का आरोप लगाया.
वहीं, विपक्ष ने भी पीएम के संबोधन पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए परिसीमन को महिला आरक्षण से जोड़ने को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इस संशोधन को लोकतंत्र और संविधान पर हमला करार दिया. साथ ही सरकार से महिला आरक्षण के नाम पर अपने चुनावीहित साधने का भी आरोप लगाया.
पीएम मोदी ने अपने राष्ट्रीय प्राइम टाइम संबोधन में द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (डीएमके) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सहित विपक्षी दलों को निशाना बनाया, जिनके गढ़ तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में कुछ ही दिनों में मतदान होने वाला है. उल्लेखनीय है कि चुनावों के लिए जारी आदर्श आचार संहिता में आधिकारिक जनसंचार माध्यमों का ‘राजनीतिक समाचारों के पक्षपातपूर्ण कवरेज’ के लिए उपयोग न करने का आग्रह किया गया है.
विपक्षी दलों ने भी पीएम मोदी के संबोधन की निंदा करते हुए उन पर ‘सार्वजनिक मंच का दुरुपयोग’ करने का आरोप लगाया है.
पीएम ने अपने संबोधन में कहा कि देश की करोड़ों महिलाओं के सपनों को कुचल दिया गया है. उन्होंने विपक्षी नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि कुछ लोगों के लिए दल से बड़ा कुछ नहीं होता.
पीएम ने कहा, ‘देश की करोड़ों महिलाओं की नज़र संसद पर थी. मुझे भी देखकर दुख हुआ कि नारी शक्ति का ये प्रस्ताव जब गिरा तो कांग्रेस, सपा, टीएमसी, डीएमके जैसी परिवारवादी पार्टियां ख़ुशियां मना रही थीं. ऐसे लोगों को इस देश की महिलाएं कभी माफ़ नहीं करेंगी.’
पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘हमारे भरसक प्रयासों के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए. नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया. मैं सभी माताओं, बहनों से माफ़ी चाहता हूं.’
उन्होंने कहा, ‘जब कुछ लोगों के लिए दलहित सब कुछ हो जाता है. दलहित देशहित से बड़ा हो जाता है तो नारी शक्ति को, देशहित को इसका खामियाजा उठाना पड़ता है. इस बार भी यही हुआ. कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी जैसी पार्टियों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश की नारी शक्ति को उठाना पड़ा है.’
प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि विपक्ष का विधेयकों के खिलाफ मतदान करना न केवल महिलाओं का अपमान है, बल्कि कन्या भ्रूण हत्या के समान है.
देश तमाम चुनौतियों के लिए कांग्रेस को व्यापक रूप से दोषी ठहराया. साथ ही सपा के अलावा डीएमके और टीएमसी की भी बार-बार नाम लेकर आलोचना की.
असल सवालों के जवाब नहीं मिले
प्रधानमंत्री का भाषण करीब 30 मिनट का था, जिसमें उन्होंने विपक्षी दलों को महिला विरोधी बताते हुए तमाम बातें कहीं, आरोप लगाए. हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि 2023 के महिला आरक्षण क़ानून को पारित होने के 900 से ज़्यादा दिनों बाद सरकार ने गुरुवार रात अचानक इसकी अधिसूचना क्यों जारी की. ये सवाल विपक्षी दल भी उठा चुके हैं.
पीएम मोदी ने इस संविधान संशोधन बिल के समय को लेकर उठने वाले सवालों के जवाब भी नहीं दिए, साथ ही यह भी नहीं बताया कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार ने जब 2024 के आम चुनावों में इसके लिए जल्दबाज़ी नहीं की, तो अब अचानक इसके लिए 2027 की जनगणना को बाईपास कर पुरानी 2011 की जनगणना को आधार बनाकर क्यों लागू करने की कोशिश की जा रही थी. नई जनगणना का इंतज़ार क्यों नहीं हो रहा था.
हालांकि, संसद के विशेष सत्र के दौरान सरकार ने मौखिक रूप से दावा किया कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटों की संख्या में 50% की वृद्धि होगी, लेकिन न तो संविधान संशोधन विधेयक और न ही परिसीमन विधेयक में ऐसी किसी व्यवस्था का उल्लेख किया गया.
वहीं, एक अहम सवाल यह भी है कि जब सरकार को पता था कि उसके पास दो-तिहाई बहुमत नहीं है, फिर भी वह यह बिल क्यों लेकर आई? इस बिल को लाने के पीछे सरकार की मंशा क्या थी?
विपक्ष ने पीएम मोदी के संबोधन के बाद कुछ ऐसे ही सवालों ने उन पर पलटवार किया है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत तमाम दलों ने सरकार की तीखी आलोचना करते हुए संविधान संशोधन विधेयक को महिला आरक्षण से जोड़ने और राजनीति करने को लेकर सवाल उठाए हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के तुरंत बाद कांग्रेस ने कहा कि एक ‘हताश और निराश’ प्रधानमंत्री ने चुनाव आचार संहिता लागू होने के बावजूद राष्ट्र के संबोधन को राजनीतिक भाषण में बदल दिया. कांग्रेस ने उन्हें चुनौती दी कि वे मौजूदा लोकसभा सत्र के भीतर महिलाओं को आरक्षण लागू करने के लिए संसद में विधेयक लाएं.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा पीएम का संबोधन तथ्यों से परे है. साथ ही ये आरोप लगाया कि पीएम ने सरकारी मंच का इस्तेमाल राजनीतिक भाषण के लिए किया और विपक्ष पर बेबुनियाद आरोप लगाए.
कांग्रेस ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में महिलाओं के मुद्दों से ज्यादा पार्टी राजनीति पर ध्यान दिया. पार्टी का दावा है कि महिला आरक्षण पर कांग्रेस का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है और उसने 2010 में राज्यसभा में बिल पास कराया था तथा 2023 के कानून का भी समर्थन किया.
आचार संहिता के बीच प्रधानमंत्री ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया: खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने एक्स पर कहा, ‘पिछले 12 वर्षों में दिखाने के लिए कुछ खास न होने के कारण प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन को ‘कीचड़ उछालने और झूठ से भरा’ राजनीतिक भाषण बना दिया. उन्होंने कहा कि चुनाव आचार संहिता पहले से लागू है और प्रधानमंत्री ने सरकारी तंत्र का दुरुपयोग कर अपने विरोधियों पर हमला किया, जो लोकतंत्र और संविधान के खिलाफ है.
खरगे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कांग्रेस का 59 बार जिक्र किया, जबकि महिलाओं का नाम बहुत कम बार लिया, जिससे उनकी प्राथमिकताएं साफ हो जाती हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं के मुद्दे भाजपा की प्राथमिकता नहीं हैं.
A desperate and frustrated PM @narendramodi with nothing meaningful to show for the last 12 years, turned an official address to the nation, into a political speech, full of mudslinging, and outright LIES. The Model Code of Conduct is already in place and it was very clear how PM…
— Mallikarjun Kharge (@kharge) April 18, 2026
राज्यसभा में नेता विपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को साफ किया कि विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के सांसद महिला विरोधी नहीं हैं. लेकिन मनमाने तरीके से परिसीमन का समर्थन नहीं किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ राजग सरकार इसका अधिकार हासिल करना चाहती है, जिससे सदन में साधारण बहुमत से किसी भी परिसीमन कानून को पारित या संशोधित किया जा सके.
वहीं, कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन निष्पक्ष होना चाहिए, जिसका उद्देश्य देश में भरोसा और एकता बढ़ाना होता है. उन्होंने प्रधानमंत्री के संबोधन को ‘कांग्रेस पर हमला करने वाला भाषण’ बताया और कहा कि यह एक ‘राष्ट्र के नाम संबोधन’ की बजाय ‘दुःख भरा संबोधन’ था, जो प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया जाता, तो ज्यादा उचित होता. रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री को अपने संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में पारित न करा पाने के लिए माफी मांगनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.
किसी मौजूदा प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम संबोधन उस पद की गरिमा से जुड़ा होता है. इसका उद्देश्य बिना किसी पक्षपात के राष्ट्र के संकल्प और आत्मविश्वास को मजबूत करना होता है. लेकिन आज का बेहद निराशाजनक और पूरी तरह से पक्षपात से भरा भाषण – राष्ट्र के नाम संबोधन की बजाय एक ‘निराशा…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) April 18, 2026
वहीं, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने बताया कि अब कल ‘पीडीए’ प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी. इसमें महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल की भाजपाई साजिश का खुलासा होगा.
अब कल ‘पीडीए’ प्रेस कॉन्फ़्रेंस होगी.
इसमें महिला आरक्षण की आड़ में परिसीमन बिल की भाजपाई साज़िश का खुलासा होगा.
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) April 18, 2026
राष्ट्रीय जनता दल के सांसद मनोज कुमार झा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे एक खुले पत्र में कहा कि पीएम मोदी का ‘राष्ट्र के नाम संबोधन वास्तव में एक चुनावी भाषण प्रतीत होता है.’ उन्होंने मांग की कि इसे ‘उनके चुनावी खर्च में जोड़ा जाए.’
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि यही है भाजपा का असली चेहरा है. पटेल समाज से आने वाले सांसद नरेश उत्तम के घर पर जूता चप्पल चलाया जा रहा है. ओबीसी नेताओं को अपमानित करना भाजपा की मानसिकता का हिस्सा है.
यही है भाजपा का असली चेहरा पटेल समाज से आने वाले सांसद नरेश उत्तम जी के घर BJP द्वारा जूता चप्पल चलाया जा रहा है.
OBC नेताओं को अपमानित करना BJP की मानसिकता का हिस्सा है. https://t.co/TY6GDfKedZ— Sanjay Singh AAP (@SanjayAzadSln) April 18, 2026
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने एक्स पर लिखा कि महिलाओं के लिए आरक्षण का बिल 2023 में ही पास हो गया था और 2 दिन पहले ही इसे नोटिफाई भी कर दिया गया है. अब इसे लागू करने और 543 सीटों में से 1/3 सीटें महिलाओं को देने से आपको कोई भी चीज नहीं रोक सकती—ठीक वैसे ही, जैसा कि टीएमसी ने किया है.
Delimitation Wrapped in a Sari …BJP may be Chalu, but it overplayed its hand. This is beginning of its decline… We dare BJP to bring in 33% reservation for women today. pic.twitter.com/iPoHqVmsZL
— Mahua Moitra (@MahuaMoitra) April 18, 2026
टीएमसी सांसद साकेत गोखले ने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार में सचमुच हिम्मत है तो उन्हें आज रात पीएम मोदी के टीवी भाषण का खर्च भाजपा के चुनावी खर्च के खाते में जोड़ना चाहिए.
उन्होंने आगे लिखा कि एक और बात, जो नेता आत्मविश्वास से भरा होता है, वह इतना बेताब होकर बर्ताव नहीं करता. दो राज्यों के चुनावों के बीच आज रात पीएम मोदी की यह कमजोर कोशिश दिखाती है कि वह घबराए हुए हैं. यह दयनीय कोशिश पीएम मोदी-गृह मंत्री अमित शाह के आने वाले पतन का एक और संकेत है. वे दोनों अपनी पकड़ खो रहे हैं और यह साफ-साफ दिखाई दे रहा है. उल्टी गिनती बंगाल से शुरू होती है.
If Gyanesh Kumar genuinely has guts, he should add the cost of Modi’s TV speech tonight to BJP’s election expense account.
On a side note, a leader who is confident does not act so desperate. Modi’s feeble attempt tonight in the middle of 2 state elections shows that he’s…
— Saket Gokhale (@SaketGokhale) April 18, 2026
वहीं, केरल से राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री ने कभी भी राष्ट्र के नाम अपने संबोधन का इस्तेमाल इस तरह से खुले तौर पर विपक्ष की आलोचना करने और उसे निशाना बनाने के लिए नहीं किया है. पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन से इस लंबे समय से चले आ रहे लोकतांत्रिक नियम को तोड़ दिया है.
भाजपा स्वस्थ संसदीय परंपराओं को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार: जॉन ब्रिटास
उन्होंने आगे कहा, ‘महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर सीधे हमला करके और उनके कार्यों की तुलना ‘भ्रूण हत्या’ और ‘महिला-विरोधी’ होने से करके, यह साफ कर दिया है कि भाजपा स्वस्थ संसदीय परंपराओं और संवैधानिक रीति-रिवाजों को कमजोर करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. यह साफ है कि कल लोकसभा में मिली करारी हार के बाद सरकार अपना संतुलन खो चुकी है. अब समय आ गया है कि इस तरह की बयानबाजी बंद हो. सरकार को महिला आरक्षण के तेजी से लागू होने के मुद्दे को सुलझाने के लिए पूरी ईमानदारी से आगे आना चाहिए और लोकतांत्रिक-संघीय भारत के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए.’
राज्यसभा सांसद कमल हासन ने एक्स पोस्ट में लिखा कि परिसीमन से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक के ऐतिहासिक रूप से गिर जाने के बाद, डीएमके ने लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए एक ‘निजी सदस्य विधेयक’ पेश किया है, जिसमें इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा गया है.
After the historic fall of delimitation-linked 131st Constitutional Amendment Bill, my colleague @PWilsonDMK has introduced a Private Member’s Bill to implement 33% reservation for women in the Lok Sabha and State Assemblies, without linking it to delimitation.
The Bill also… https://t.co/ivkJSOdKqE
— Kamal Haasan (@ikamalhaasan) April 18, 2026
उन्होंने आगे कहा कि यह विधेयक परिसीमन पर लगी रोक को 2051 तक बढ़ाने का भी प्रस्ताव करता है, जिससे राज्यों को जनसंख्या स्थिरीकरण हासिल करने के लिए समय मिल सके. हमारे उत्तर भारतीय राज्य महिलाओं के वास्तविक सशक्तिकरण—यानी महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवा और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराकर—इस लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं. यदि हम महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर सचमुच गंभीर हैं तो संसद की मौजूदा सदस्य संख्या के भीतर ही 33 प्रतिशत आरक्षण को तत्काल लागू किया जाना चाहिए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पीएम साहब 12 साल के अखंड शासन के बाद भी कांग्रेस के सामने आप असमर्थ हैं. ईडी, सीबीआई, आटी ,चुनाव आयोग, अडानी-अंबानी, धनबल, RSS का जहर इन सबका नंगा नाच के बाद भी कांग्रेस का भूत आप पर हावी है तो आपको तत्क्षण भूतपूर्व बन जाना चाहिए. विदूषक न बनें, कुर्सी छोड़ दीजिए. देश को उपहास का पात्र न बनाएं.’
PM साहब 12 साल के अखंड शासन के
बाद भी कांग्रेस के सामने आप असमर्थ हैंED,CBI,IT,चुनाव आयोग,अडानी-अंबानी
धनबल, RSS का जहर इन सबका नंगा नाच के
बाद भी कांग्रेस का भूत आप पर हावी हैतो आपको तत्क्षण भूतपूर्व बन जाना चाहिए
विदूषक न बनें,कुर्सी छोड़ दीजिए
देश को उपहास का पात्र न बनाएं— Pappu Yadav (@pappuyadavjapl) April 18, 2026
पीएम मोदी के भाषण से पहले बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल के गिरने पर केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि विपक्ष भी महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करता है. भाजपा यह गलत धारणा फैला रही है कि केवल वे ही महिलाओं के पक्ष में हैं और विपक्ष नहीं है. यह सरासर गलत है.
महिला आरक्षण विधेयक पहले ही पारित, परिसीमन एक अलग मुद्दा: तेजस्वी
तेजस्वी यादव ने कोयंबटूर में मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, ‘महिला आरक्षण विधेयक पहले ही वर्ष 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है. केंद्र सरकार ने उस समय स्पष्ट किया था कि इसे 2034 में लागू किया जाएगा. परिसीमन एक अलग मुद्दा है.’
वहीं, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद शनिवार को कहा कि परिसीमन विधेयक को रोकने में जीत विपक्षी इंडिया गठबंधन समेत सभी विपक्षी दलों के सांसदों के प्रयासों के कारण ही मिल पाई है.
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने जो हासिल किया है वह केवल आधी जीत है. जैसा 2001 में किया गया था, सीटों की संख्या का परिसीमन सांविधानिक रूप से अगले 25 वर्षों के लिए, यानी 2051 तक निलंबित किया जाना चाहिए.’
#Delimitation: நண்பர்கள் யார், துரோகிகள் யார் யார் என்பதை அடையாளம் காட்டியுள்ளது.
புது வரலாறு படைத்துள்ள தி.மு.க.வை இந்தியாவே உயர்வாகப் பேசுகிறது! நமது வெற்றி தொடரட்டும்!#வெல்வோம்_ஒன்றாக! https://t.co/h3WeTFv5ON pic.twitter.com/OyxQmotm4a
— M.K.Stalin – தமிழ்நாட்டை தலைகுனிய விடமாட்டேன் (@mkstalin) April 18, 2026
स्टालिन ने वीडियो जारी कर कहा कि परिसीमन की आड़ में भाजपा को पूर्णतया लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया विधेयक संसद में पराजित हो गया. भाजपा ने महिला आरक्षण की आड़ में इस कानून को लाने की कोशिश की, लेकिन खुद महिलाओं ने ही इसका विरोध किया और उन्हें करारी हार मिली. विधेयक ने न केवल दोस्तों का खुलासा किया है, बल्कि तमिलनाडु के गद्दारों को भी बेनकाब कर दिया है.
