नई दिल्ली: भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने शनिवार (18 अप्रैल) शाम को भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली को तलब किया और होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी युद्धपोतों द्वारा दो भारतीय जहाजों पर की गई गोलीबारी पर ‘गंभीर चिंता’ जताई है.
ये घटनाएं ऐसे समय हुईं, जब ईरान ने जवाबी कार्रवाई के तौर पर इस महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य को फिर से बंद कर दिया है. यह बंदी अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर यातायात की निरंतर नाकाबंदी के जवाब में की गई है, जबकि तेहरान ने इस सप्ताह की शुरुआत में वाणिज्यिक यातायात के लिए इस मार्ग को खोलने का निर्णय लिया था.
हालांकि, विदेश मंत्रालय के बयान में ‘समन’ शब्द का प्रयोग नहीं किया गया, लेकिन यह संकेत दिया गया कि फाथली को शनिवार शाम जवाहरलाल नेहरू भवन में विदेश सचिव से मिलने के लिए कहा गया था.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘नई दिल्ली में स्थित ईरान के राजदूत को विदेश मंत्रालय ने आज शाम विदेश सचिव से मुलाकात के लिए बुलाया था. मुलाकात के दौरान विदेश सचिव ने होर्मुज जलडमरूमध्य में आज सुबह दो भारतीय ध्वज वाले जहाजों के बीच हुई गोलीबारी की घटना पर भारत की गहरी चिंता व्यक्त की.’
उन्होंने यह भी याद दिलाया कि ईरान ने पहले भी भारत जाने वाले कई जहाजों को सुरक्षित मार्ग प्रदान किया था.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘व्यापारिक जहाजों पर गोलीबारी की इस गंभीर घटना पर अपनी चिंता दोहराते हुए विदेश सचिव ने राजदूत से आग्रह किया कि वे ईरान के अधिकारियों को भारत का पक्ष बताएं और जलडमरूमध्य से भारत जाने वाले जहाजों के सुरक्षित मार्ग की प्रक्रिया को जल्द से जल्द पुनः शुरू करें.’
ईरानी राजदूत ने तेहरान को ये बातें बताने का आश्वासन दिया.
विदेश मंत्रालय के बाहर तैनात कैमरों में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान के संयुक्त सचिव आनंद प्रकाश को राजदूत के साथ देखा गया और उनके आधिकारिक वाहन में सवार होने से पहले उन्होंने एक-दूसरे से हाथ मिलाए.
ब्रिटेन के समुद्री व्यापार संचालन केंद्र (यूकेएमटीओ) ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में ओमान से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में, एक टैंकर के कप्तान ने ईरान के इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) की दो तोपों द्वारा कंटेनर पर गोलीबारी किए जाने की सूचना दी.
केंद्र ने बताया, ‘टैंकर और चालक दल सुरक्षित हैं,’ हालांकि सरकार द्वारा जहाज की पहचान नहीं बताई गई.
केंद्र ने यह भी बताया कि एक कंटेनर जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइस से हमला हुआ, जिससे जहाज पर लदे कुछ माल को नुकसान पहुंचा, हालांकि आग लगने या पर्यावरण पर कोई प्रभाव पड़ने की कोई घटना दर्ज नहीं की गई.
केंद्र ने बताया कि यह घटना जलडमरूमध्य में ओमान से 25 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में हुई, और उसने फिर से शामिल जहाज की पहचान नहीं बताई.
ईरानी नौसेना द्वारा दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी
इसी बीच, समुद्री खुफिया एजेंसी टैंकर ट्रैकर्स ने रेडियो संचार का हवाला देते हुए लिखा कि ईरानी नौसेना द्वारा दो भारतीय जहाजों, जिनमें इराकी तेल ले जा रहा एक विशाल कच्चा तेल वाहक पोत भी शामिल था, को जलडमरूमध्य से गुजरने से रोकने के प्रयासों में ‘गोलीबारी शामिल थी‘.
टैंकर ट्रैकर्स ने एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की, जिसके बारे में उसने दावा किया कि यह समुद्री समुदाय से प्राप्त की गई थी. इस रिकॉर्डिंग में भारतीय ध्वज वाले सनमार हेराल्ड तेल टैंकर पर सवार एक नाविक को आईआरजीसी नौसेना से यह कहते हुए सुना जा सकता है कि अनुमति मिलने के बावजूद उन पर गोलीबारी की जा रही है.
‘सेपाह नेवी! मोटर टैंकर सनमार हेराल्ड! … आपने मुझे जाने की अनुमति दी! मेरा नाम आपकी सूची में दूसरे नंबर पर था! आपने मुझे जाने की अनुमति दी! अब आप फायरिंग कर रहे हैं! मुझे वापस मुड़ने दीजिए!’ क्लिप में यह आवाज़ सुनाई दे रही है.
वेबसाइट marinetraffic.com पर उपलब्ध सनमार हेराल्ड के लाइव रूट मैप से पता चलता है कि यह स्थानीय समयानुसार सुबह के समय होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने का प्रयास कर रहा था, कुछ देर पश्चिम की ओर बढ़ा और फिर जलमार्ग के पूर्वी हिस्से के पास दोबारा दिखाई दिया, और अंत में फिर से पश्चिम की ओर मुड़ गया.
इससे पहले शनिवार को ईरान की सेना ने घोषणा की कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण ‘पहले जैसा हो गया है’ और यह अवरोध उसके ‘सख्त प्रबंधन और नियंत्रण’ में है.
‘ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखना युद्धविराम का उल्लंघन है’
ईरान की संसद के अध्यक्ष और अमेरिका और इज़रायल के बीच चल रहे युद्ध में देश के मुख्य वार्ताकार एमबी ग़ालिबाफ़ ने कहा था कि तेहरान द्वारा जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बावजूद वाशिंगटन द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी जारी रखना युद्धविराम का उल्लंघन है.
उन्होंने कहा, ‘नाकाबंदी जारी रहने से होर्मुज जलडमरूमध्य खुला नहीं रहेगा.’
ईरान ने गुरुवार को इज़रायल और लेबनान के बीच अमेरिका की मध्यस्थता से हुए युद्धविराम के बाद अपने निर्धारित मार्गों से वाणिज्यिक यातायात के लिए जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का फैसला किया था.
तेहरान ने कहा था कि अमेरिका और इज़रायल के साथ उसके अपने युद्धविराम में लेबनान भी शामिल है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान की नाकाबंदी जारी रखेगी, चाहे कुछ भी हो.
संघर्ष के दौरान पारगमन सुविधा प्रदान करने के अलावा भारत का ईरान के साथ ऊर्जा संबंध और भी व्यापक हो गया है. सरकारी स्वामित्व वाली इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने टैंकर जया पर सवार 20 लाख बैरल ईरानी कच्चे तेल की खरीद की, जो सात वर्षों में देश की पहली ऐसी खरीद थी. यह खरीद अमेरिका द्वारा दी गई 30 दिनों की अस्थायी प्रतिबंध छूट के तहत की गई थी, जिसके तहत समुद्र में जहाजों पर लदे ईरानी तेल की बिक्री की अनुमति थी.
वाशिंगटन द्वारा मार्च में जारी की गई यह छूट रविवार को समाप्त होने वाली है, और अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने पुष्टि की है कि इसका नवीनीकरण नहीं किया जाएगा.
रायटर्स के अनुसार, रिलायंस इंडस्ट्रीज ने भी गुजरात के सिक्का टर्मिनल पर ईरानी कच्चे तेल से लदे पांच जहाजों को लंगर डालने की अनुमति दी, लेकिन ‘अनुपालन आवश्यकताओं’ के कारण दो तेल कार्गो को अस्वीकार कर दिया.
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दोनों कंपनियों ने आईसीआईसीआई बैंक के शंघाई कार्यालय के माध्यम से चीनी युआन में खरीद का निपटान किया.
मीडिया कॉन्फ्रेंस में जब पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा से पूछा गया कि क्या भारत चीनी युआन का उपयोग करके ईरानी कच्चा तेल खरीद रहा है, तो इस पर जवाब देते हुए उन्होंने कहा, ‘घरेलू मांग को पूरा करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. हमारी तेल विपणन कंपनियां नियमों के दायरे में काम कर रही हैं.’
