मणिपुर: कांग्रेस की बच्चों की हत्या, ताज़ा हिंसा की जांच की मांग; कहा- सरकार राज्य की स्थिति पर आंखें मूंदे हुए

कांग्रेस ने मणिपुर में में हुई हालिया हत्याओं, जिनमें दो बच्चों की हत्या भी शामिल है, की तत्काल और समयबद्ध जांच की मांग की. मणिपुर से कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजाम ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने शांति बहाल करने और लोगों की जान बचाने की अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.

मणिपुर के बिष्णुपुर ज़िले में 7 अप्रैल 2026 को एक बम हमले में दो बच्चों की मौत और उनकी मां के घायल होने के बाद लोगों का विरोध प्रदर्शन. (फोटो; पीटीआई)

नई दिल्ली: तीन साल से जातीय हिंसा से जूझ रहे मणिपुर में बीते कई हफ़्तों से ताजा हिंसा भड़कने के बाद से तनाव बना हुआ है. कांग्रेस ने सोमवार (20 अप्रैल, 2026) को राज्य में हुई हालिया हत्याओं, जिनमें दो बच्चों की हत्या भी शामिल है, की तत्काल और समयबद्ध जांच की मांग की. साथ ही, हिंसा प्रभावित राज्य में हालात सामान्य करने के लिए तत्काल शांति उपायों, पीड़ितों के लिए मुआवज़े और संस्थागत सुधारों की भी मांग की.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यहां अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पुराने मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए मणिपुर से कांग्रेस सांसद ए. बिमोल अकोइजाम ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने शांति बहाल करने और लोगों की जान बचाने की अपनी ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.

पार्टी ने प्रधानमंत्री मोदी को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें तत्काल सरकारी हस्तक्षेप की मांग की गई है, जिसमें समयबद्ध जांच और संस्थागत सुधार शामिल हैं.

7 अप्रैल से अब तक मणिपुर में पांच हत्याएं हो चुकी हैं. रविवार शाम को मणिपुर के अलग-अलग ज़िलों में हज़ारों लोग सड़कों पर उतर आए और इन हत्याओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. इंफाल पूर्व के कोइरेंगी और हट्टा गोलपति, तथा इंफाल पश्चिम के काकचिंग और मयाई लांबी में रात के समय रैलियां आयोजित की गईं

ज्ञात हो कि बिष्णुपुर ज़िला में 7 अप्रैल से ही तनावपूर्ण बना हुआ है, जब कुकी लोगों द्वारा किए गए एक कथित बम हमले में दो मेईतेई बच्चों की मौत हो गई थी. इस घटना के बाद इंफाल पश्चिम, इंफाल पूर्व, थौबल, काकचिंग और बिष्णुपुर जिलों में इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाएं निलंबित कर दी थी.

अकोइजाम ने ट्रोंगलाओबी गांव में हुई उस भयानक घटना का ज़िक्र किया. इसके अलावा, उन्होंने गेलमोन गांव में सीआरपीएफ की एक चौकी पर हुई गोलीबारी की एक अलग घटना का भी ज़िक्र किया, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई थी. अकोइजाम ने कहा, ‘सरकार राज्य की स्थिति पर आंखें मूंदे हुए है.’

सांसद ने फरवरी से ही उखरुल और कामजोंग ज़िलों में जारी हिंसा का मुद्दा भी उठाया. इस हिंसा में एनएच-202 के बंद होने के बीच कई लोगों की मौतें हुईं और आगजनी की घटनाएं भी हुईं; सबसे ताज़ा घटना 10 अप्रैल को एक बीएसएफ जवान की हत्या की है.

उन्होंने कहा, ‘हम सरकार से आग्रह करते हैं कि वह उखरुल और कामजोंग में सामान्य स्थिति बहाल करे, एनएच-202 को फिर से खोले और विभिन्न समुदायों के बीच हो रही हिंसा को रोके. अवैध गतिविधियों में शामिल सशस्त्र समूहों और व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.’

उन्होंने आगे कहा कि पार्टी ट्रोंगलाओबी हत्याओं की समयसीमा के भीतर जांच और उसे पूरा करने की मांग करती है.

ज्ञापन में पार्टी ने मणिपुर पुलिस के पुनर्गठन और उसे मजबूत करने की मांग की, जो राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने की मुख्य संस्था है. इसमें प्रशासनिक विफलता और प्रभावशीलता में गिरावट का भी उल्लेख किया गया. साथ ही, सरकार से नागरिकों को उनके घरों और आवश्यक सेवाओं तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया.

भीड़ ने दफ़्तर में आग लगाने की कोशिश की, पुलिसकर्मी घायल

जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर के वांगजिंग में सोमवार (20 अप्रैल) रात प्रदर्शनकारियों ने एक सरकारी दफ़्तर में आग लगाने की कोशिश की, जिसमें एक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गया. इस बीच, पांच ज़िलों में रात के समय मशाल जुलूस जारी रहे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने बताया कि सैकड़ों प्रदर्शनकारी एक नए बने ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफ़िस (बीडीओ) के पास जमा हो गए और उसे आग लगाने की कोशिश की. यह घटना मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद द्वारा इस दफ़्तर का उद्घाटन किए जाने से ठीक एक दिन पहले हुई. अधिकारियों ने कहा कि सुरक्षा बलों के समय पर दखल देने से दफ़्तर आग की चपेट में आने से बच गया और स्थिति नियंत्रण में आ गई.

अधिकारियों ने बताया कि हालांकि, इसके बाद सुरक्षाकर्मियों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में वांगजिंग पुलिस चौकी पर तैनात 37 वर्षीय ताखेलचांगबम रमेश शर्मा के सिर में गंभीर चोटें आईं. शर्मा को एक स्थानीय अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है, और उनकी हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है.

रविवार को मणिपुर पुलिस ने ग्रेटर इंफाल इलाके में कई जगहों से बंद का समर्थन कर रहे 19 लोगों को गिरफ़्तार किया. हज़ारों प्रदर्शनकारी मशाल जुलूस निकालकर प्रदर्शन कर रहे हैं, और पांच ज़िलों में शाम 5 बजे से सुबह 5 बजे तक लागू रात के कर्फ्यू का उल्लंघन कर रहे हैं.

ट्रोंगलाओबी में हुई हत्याओं के विरोध में रविवार आधी रात से पांच ज़िलों में पांच दिनों का बंद रखा जा रहा है. वहीं, यूनाइटेड नगा काउंसिल ने मणिपुर के नगा-बहुल इलाकों में रविवार आधी रात से अलग से 72 घंटे के बंद का आह्वान किया है. यह बंद शनिवार को उखरुल में संदिग्ध कुकी उग्रवादियों द्वारा कथित तौर पर किए गए एक हमले के विरोध में बुलाया गया है, जिसमें दो तांगखुल नगाओं (जिनमें एक पूर्व सैनिक भी शामिल था) की हत्या कर दी गई थी.

मणिपुर सरकार ने घोषणा की है कि इस हमले के मामले को निष्पक्ष जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया जाएगा.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.