जेएनयू हॉस्टल मेस से डॉ. आंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन

मंगलवार को जेएनयू के ताप्ती छात्रावास के बाहर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि आंबेडकर जयंती के अवसर पर छात्रावास के मेस में लगाई गई डॉ. बीआर आंबेडकर की तस्वीर को बिना किसी स्पष्टीकरण या पूर्व सूचना के हटा दिया गया. विरोध के बाद तस्वीर को वापस लगाए जाने की सूचना मिली है.

छात्रों का प्रदर्शन. (फोटो साभार: सोशल मीडिया/एक्स)

नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के ताप्ती छात्रावास के बाहर मंगलवार (21 अप्रैल) को छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया. उनका आरोप था कि आंबेडकर जयंती के अवसर पर छात्रावास के मेस में लगाई गई डॉ. बीआर आंबेडकर की तस्वीर को बिना किसी स्पष्टीकरण या पूर्व सूचना के हटा दिया गया.

द हिंंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन का आह्वान करने वाली ताप्ती छात्रावास समिति ने एक बयान में इस घटना को ‘बेहद शर्मनाक’ बताया और आरोप लगाया कि छात्रावास की वॉर्डन ने ‘दो बार जबरदस्ती तस्वीर हटाई और उसे अपने कार्यालय में बंद कर दिया.’

समिति ने एक बयान में कहा, ‘आंबेडकर जयंती के अवसर पर हमने छात्रावास मेस में डॉ. बीआर आंबेडकर की तस्वीर समानता, गरिमा और जातिगत उत्पीड़न के खिलाफ प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में लगाई थी.’

समिति ने आगे कहा, ‘हम इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हैं और मांग करते हैं कि डॉ. आंबेडकर का तस्वीर तुरंत वापस लाकर मेस में पुनः लगाया जाए.’

जेएनयू छात्र संघ (जेएनयूएसयू) ने भी इस घटना की निंदा करते हुए इसे ‘परिसर में जातिगत असंवेदनशीलता का व्यापक पैटर्न’ बताया.

 

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वहीं, स्टूडेंड फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने सेशल मीडिया मंच एक्स पर ताप्ती छात्रावास समिति और इस आह्वान में शामिल हुए जेएनयू के छात्रों को क्रांतिकारी शुभकामनाएं देते हुए बताया कि छात्रों ने सफलतापूर्वक बाबा साहेब आंबेडकर की तस्वीर पुनः स्थापित करवा दिया है, जिसे पहले ‘संघी वॉर्डन द्वारा हटवा दिया गया था.’

इस संबंध में जेएनयूएसयू की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘यह विरोध प्रदर्शन ताप्ती हॉस्टल की वॉर्डन विनीका जोशी द्वारा बाबासाहेब आंबेडकर की तस्वीर हटाए जाने के खिलाफ था. जेएनयूएसयू इस घटना की कड़ी निंदा करता है. पिछले महीने ही कुलपति ने जातिवादी टिप्पणी की थी. आरएसएस से जुड़े शिक्षक और कुलपति संस्थान को जातिवादी और सामंती व्यवस्था का गढ़ बनाने की कोशिश कर रहे हैं.’

हालांकि, वॉर्डन विनीका जोशी ने तस्वीर हटाए जाने से इनकार करते हुए कहा कि इसे हॉस्टल कमेटी रूम में स्थानांतरित कर दिया गया है.

वॉर्डन के अनुसार, ‘हमने तस्वीर नहीं हटाई है. हमने केवल तस्वीर को मेस हॉल से हॉस्टल कमेटी रूम में स्थानांतरित किया है क्योंकि हमें लगा कि बाबासाहेब की तस्वीर लगाने के लिए यह अधिक सम्मानजनक स्थान है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘बाबा साहेब ने हमारे देश के लिए बहुत कुछ किया है और मेस, जहां गंदे बर्तन रखे रहते हैं, उनकी तस्वीर लगाने के लिए उपयुक्त जगह नहीं है.’

वॉर्डन जोशी ने यह भी बताया कि आंबेडकर जयंती समारोह के दौरान इसी महीने मेस में बाबासाहेब की तस्वीर लगाई गई थी.

उल्लेखनीय है कि जेएनयू की कुलपति शांतिश्री धुलिपुडी पंडित द्वारा एक पॉडकास्ट साक्षात्कार में कथित जातिवादी टिप्पणियों के बाद परिसर में जारी तनाव के बीच ये विरोध प्रदर्शन देखने को मिला.

गौरतलब है कि इस साल फरवरी में सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में जेएनयू की कुलपति यह कहती हुईं नज़र आईं कि किसी भी समाज या समुदाय के लिए लगातार स्वयं को पीड़ित मानते रहना प्रगति में बाधा बन सकता है. यह एक अस्थायी ‘ड्रग’ की तरह है. आप यह कहते रहिए कि यह दुश्मन है, आप इस पर चिल्लाते हैं और फिर आपको अच्छा लगता है.’

इस पॉडकास्ट में उन्होंने कहा था, ‘… ऐसा ही अश्वेतों के लिए किया गया था. यही चीज दलित के लिए लाई गई थी और किसी को शैतान बनाकर तरक्की करना आसान नहीं है. जब किसी समूह को बार-बार यह बताया जाता है कि उसकी समस्याओं का कारण कोई ‘दुश्मन’ है, तो यह सोच लंबे समय तक समाधान नहीं दे सकती.’

इस बयान की व्यापक आलोचना के बाद उन्होंने कहा कि वह ख़ुद बहुजन समाज से आती हैं, इसलिए किसी भी समुदाय के ख़िलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी करने का सवाल ही नहीं उठता.