मंगलुरु: नासिक स्थित मुंबई नाका थाने में एक और दो अप्रैल की दरमियानी रात काफी चहल-पहल रही. थाने में पांच एफआईआर दर्ज की गईं. ये शिकायतें टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) की आठ महिला और एक पुरुष कर्मचारियों द्वारा दर्ज कराई गई नौ शिकायतों का हिस्सा थीं.
महिलाओं ने आरोप लगाया कि उनके छह पुरुष सहकर्मियों ने लगातार उनका यौन उत्पीड़न किया, ये सभी मुस्लिम हैं. शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों पर बार-बार उनकी हिंदू धार्मिक भावनाओं का अपमान करने का भी आरोप लगाया. हालांकि, इनमें से अधिकांश शिकायतें कई महीनों या सालों पहले की घटनाओं से संबंधित थीं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि सभी एफआईआर आधी रात को दर्ज की गईं.
एफआईआर में नामजद छह पुरुष दानिश शेख, तौसीफ अत्तार, रजा मेमन, आसिफ अंसारी, शफी शेख और शाहरुख कुरैशी हैं. एफआईआर में दो महिलाओं का नाम भी शामिल है. इनमें से एक अश्विनी चैनानी, जो मानव संसाधन और परिचालन प्रबंधक (एचआर मैनेजर) हैं, फिलहाल पुलिस हिरासत में हैं. वहीं, दूसरी निदा खान, जो एक प्रोसेस एसोसिएट हैं, अभी भी फरार हैं.
आरोपियों पर मुख्य रूप से भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत यौन उत्पीड़न, धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और सामान्य इरादे से संबंधित मामले दर्ज किए गए हैं.
दानिश शेख के खिलाफ बलात्कार के मामले में, पुलिस ने अब अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धाराएं भी शामिल कर ली हैं, क्योंकि पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता महिला अनुसूचित जाति समुदाय से संबंधित है.
पहला मामला
इन शिकायतों की शुरुआत 26 मार्च को सुबह 1:01 बजे दर्ज की गई एफआईआर से हुई. इस मामले में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उनके सहकर्मी दानिश शेख ने शादी का झांसा देकर उनके साथ यौन संबंध बनाए, लेकिन बाद में उन्हें पता चला कि शेख पहले से ही शादीशुदा हैं और उसके दो बच्चे हैं.
शिकायतकर्ता ने एफआईआर में शेख के दोस्तों, तौसीफ अत्तार और निदा खान का भी नाम लिया है. अत्तार पर शिकायतकर्ता को यौन शोषण के लिए ब्लैकमेल करने का आरोप है, जबकि निदा खान पर हिंदू धर्म के बारे में अपशब्द बोलने का आरोप है.
शिकायतकर्ता का दावा है कि वह शेख को कॉलेज के समय से जानती थी और 2022 से उनके बीच प्रेम संबंध थे. शिकायत के अनुसार 2023 में टीसीएस में शामिल होने के बाद उन्होंने तीनों आरोपियों के साथ काम पर मेलजोल शुरू कर दिया.
इस संबंध में इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक साक्षात्कार में एक आरोपी की पत्नी ने दावा किया कि दानिश शेख और इस शिकायतकर्ता के बीच रिश्ता खराब हो गया था.
निदा खान
26 वर्षीय प्रोसेस एसोसिएट निदा खान एकमात्र आरोपी हैं, जो फिलहाल फरार हैं. हालांकि यौन उत्पीड़न से संबंधित एफआईआर में उनका नाम दर्ज है, लेकिन उन पर लगाए गए विशिष्ट आरोप भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 299 के तहत धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और बीएनएस की धारा 3(5) के तहत सामान्य इरादे से जुड़े हैं.
धारा 299 गैर-जमानती है, लेकिन इसमें अधिकतम तीन साल की सजा का प्रावधान है और इसकी सुनवाई मजिस्ट्रेट के समक्ष होती है. धारा 3(5) एक स्वतंत्र अपराध नहीं है, बल्कि यह परोक्ष दायित्व स्थापित करती है.
इस बीच पिछले दो हफ्तों से निदा खान का नाम टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर एक ‘धर्मांतरण’ मामले में ‘मुख्य आरोपी’ और ‘साजिशकर्ता’ के रूप में प्रसारित किया जा रहा है. हालांकि, एफआईआर में उनकी भूमिका सीमित बताई गई है.
एक 23 वर्षीय शिकायतकर्ता ने दावा किया है, ‘निदा और तौसीफ ने मुझे यह समझाने की कोशिश की कि हिंदू जिन शिवलिंगों की पूजा करते हैं, वे मूलतः पुरुष जननांग हैं और उनकी पूजा करना अश्लील है.’
इस एक लाइन के अलावा इस एफआईआर या अन्य आठ दर्ज मामलों में उसके खिलाफ कोई और सबूत नहीं है.
‘हिंदुत्व संगठन’ और गुप्त पुलिस अभियान
द वायर ने इस मामले के शिकायतकर्ताओं से संपर्क करने की कोशिश की. इस पर नासिक निवासी एक महिला शिकायतकर्ता के माता-पिता ने जवाब दिया. उन्होंने दावा किया कि एक ‘हिंदुत्ववादी संगठन’ के कार्यकर्ताओं ने पुलिस से संपर्क करने में उनकी मदद की.
अभिभावक ने कहा, ’26 मार्च को पहली एफआईआर दर्ज होने के बाद मुझे एक फोन आया जिसमें बताया गया कि मेरी बेटी और कई सहकर्मियों को काम पर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मुझे सलाह दी गई कि सामूहिक शिकायत दर्ज कराई जाए.’
संगठन के बारे में जानकारी देने के लिए पूछे जाने पर अभिभावक ने कहा कि उन्हें नाम याद नहीं है, लेकिन उन्होंने बताया कि कई कार्यकर्ता उनके साथ थाने गए थे.
नासिक के पुलिस आयुक्त संदीप कर्णिक ने दावा किया कि पहली शिकायतकर्ता शुरू में डरी हुई थीं. उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें समझाया और अपने समर्थन का आश्वासन दिया. इसके बाद उन्होंने और अन्य लोगों ने हमें कार्यस्थल पर हुई अन्य घटनाओं के बारे में बताया.’
कर्णिक ने आगे बताया कि 26 मार्च से 1 अप्रैल के बीच एक पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सहित महिला पुलिस अधिकारियों की एक टीम को टीसीएस कार्यालय में गुप्त रूप से भेजा गया ताकि कर्मचारियों को समझाया जा सके और उन्हें आगे आने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके. इसी के परिणामस्वरूप शेष आठ एफआईआर दर्ज की गईं – यह जानकारी आधिकारिक एफआईआर दस्तावेजों में मौजूद नहीं है.
एफआईआर की कही गईं बातें
कम से कम तीन एफआईआर में कई लाइनें हूबहू लिखी गई हैं, जिनमें संदिग्धों पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने का आरोप लगाया गया है. उदाहरण के लिए दो अप्रैल को सुबह 4:16 बजे एक पुरुष कर्मचारी द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत में लिखा है:
‘तौसीफ अत्तार और दानिश शेख मेरी धार्मिक मान्यताओं का मज़ाक उड़ाते थे. क्या महादेव सचमुच भगवान हैं? महादेव को यह कैसे नहीं पता था कि पार्वती ने गणपति को जन्म दिया?… ऐसा कहकर उन्होंने पार्वती का अपमान किया और उनकी छवि खराब की.’
अपनी एफआईआर में उन्होंने यह भी दावा किया है कि अत्तार और दानिश शेख उन्हें कई बार खाने पर ले गए और उन्हें ‘मीट खाने’ के लिए मजबूर किया.
इसी तरह की हूबहू बात अत्तार से जुड़ी दो अन्य शिकायतों में भी मिलती हैं. हालांकि एक ही तरह के बयान दिए जा सकते हैं, लेकिन अलग-अलग लोगों से अलग-अलग समय पर ठीक उसी तरह के शब्दों में ये बातें कहना सवाल खड़े करता है.
सोशल मीडिया पर हंगामा
निदा खान का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील बाबा सैयद का तर्क है कि कार्यस्थल पर हुई बातचीत को गलत तरीके से पेश किया गया है और संदर्भ से हटकर बताया गया है. निदा खान, जो तीन महीने से गर्भवती हैं, ने अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया है. इस पर सुनवाई अगले सप्ताह होनी है. इससे पहले उनकी अंतरिम राहत की अर्जी इस सप्ताह के शुरुआत में खारिज कर दी गई थी.
इस बीच पुलिस ने निदा खान का पता लगाने के लिए कई टीमें गठित की हैं. सैयद ने बताया कि उनके पति को हाल ही में मुंबई के एक पुलिस स्टेशन में बुलाया गया था और उनसे कई घंटों तक पूछताछ की गई थी.
इस मामले में सोशल मीडिया पर मचे बवाल और मीडिया में आई अपुष्ट खबरों ने जांच की दिशा को प्रभावित किया है. एक प्रेस ब्रीफिंग में कमिश्नर कर्णिक ने बताया कि अधिकारी संभावित आतंकी संबंधों या अंतरराष्ट्रीय संगठनों की संलिप्तता की जांच कर रहे हैं.
उन्होंने दावा किया कि अलग-अलग एफआईआर में एक ही आरोपी समूह के नाम हैं. कर्णिक ने कहा, ‘वे एक गिरोह की तरह काम करते थे.’
उन्होंने आगे कहा, ‘हमने विशेष जांच दल (एसआईटी), आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को पत्र भेजे हैं. उनसे जवाब मिलने के बाद हम इन आरोपों की पुष्टि करेंगे.’
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