जम्मू-कश्मीर: छात्रा के उत्पीड़न के आरोपी शिक्षक का विरोध कर रहे युवाओं पर पीएसए लगाया गया

इसी महीने सोपोर में एक छात्रा द्वारा एक लेक्चरर पर उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे, जहां दर्जनों आक्रोशित छात्र सड़कों पर उतर आए थे. प्रदर्शनकारियों द्वारा आरोपी शिक्षक पर कार्रवाई की मांग की गई थी. इस दौरान छात्रों द्वारा तोड़फोड़ की ख़बरें सामने आईं थीं, जिसके बाद प्रशासन ने छात्रों के ख़िलाफ़ पीएसए के तहत कार्रवाई की मंज़ूरी दे दी है.

सोपोर में 13 अप्रैल को एक छात्रा के साथ कथित उत्पीड़न के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद घायलों को चिकित्सा उपचार देते हुए. (फोटो: पीटीआई)

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हिंसा में संलिप्ता के आरोपों का सामना कर रहे छह युवकों के ख़िलाफ़ सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (पीएसए) लगाया है. बताया गया है कि इस हिंसा के कारण उत्तरी कश्मीर के सोपोर ज़िले में शिक्षण संस्थानों को बंद करना पड़ा था.

ख़बरों के अनुसार, उत्तरी कश्मीर के बारामूला ज़िला प्रशासन ने सोपोर कस्बे के छह युवकों को इस सख्त कानून के तहत हिरासत में लेने की मंजूरी दे दी है और उन्हें जम्मू के किश्तवाड़ ज़िले के भदेरवाह इलाके की एक जेल में स्थानांतरित कर दिया गया है.

इन युवाओं की पहचान उमर अकबर हाजम, सलमान अहमद शाला, अल्ताफ अहमद शेख, मुबाशिर अहमद गिलकर, मुज़म्मिल मुश्ताक चंगा और माजिद फिरदौस डार के रूप में हुई है, ये सभी सोपोर के निवासी हैं.

आरोपियों के पीएसए डोजियर (सार्वजनिक सेवा सुरक्षा आदेश) तत्काल उपलब्ध नहीं थे. उन पर 13 अप्रैल को सोपोर में हुए छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद ‘अशांति भड़काने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और शांति भंग करने की कोशिश’ करने का आरोप लगाया गया है. यह विरोध प्रदर्शन एक छात्रा द्वारा शिक्षक पर उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार का आरोप लगाने के बाद हुआ था.

इन आरोपों के चलते सोपोर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए और दर्जनों आक्रोशित छात्र सड़कों पर उतर आए थे. प्रदर्शनकारियों द्वारा वरिष्ठ उर्दू लेक्चरर गुलाम हसन मीर के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग की गई थी.

उत्तर कश्मीर के इस कस्बे में जनजीवन ठप करने वाले प्रदर्शनों के दौरान छात्रों द्वारा तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं थीं. प्रदर्शनों के बारामूला ज़िले के अन्य क्षेत्रों में फैलने की आशंका को देखते हुए प्रशासन को 15 से 18 अप्रैल तक कुछ शिक्षण संस्थानों को बंद करना पड़ा था.

सोपोर पुलिस के सीनियर सुपरिटेंडेंट इफ्तिखार तालिब के अनुसार, विद्यालय शिक्षा निदेशालय के आदेश पर मीर को निलंबित कर दिया गया है. साथ ही उनके ख़िलाफ़ पुलिस मामला भी दर्ज किया गया है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोपोर में हुए विरोध प्रदर्शनों और उसके बाद हुई हिंसा के सिलसिले में आठ लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि दो दर्जन से अधिक लोगों से पूछताछ की गई.

इनमें से छह लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया है, जो एक विवादास्पद कानून है.

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए छह लोगों की उम्र या पेशे के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने द वायर को बताया कि वे ‘अपराधी’ थे और उनका ‘अपराध में पुराना रिकॉर्ड’ था.

नाम गुप्त रखने की शर्त पर अधिकारी ने कहा, ‘छात्रों की चिंताओं से उनका कोई लेना-देना नहीं था और वे केवल अशांति फैलाने और सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने के मकसद से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे.’

हालांकि, द वायर इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं कर सका है.

इस संबंध में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक बयान में कहा गया है, ‘सोपोर पुलिस ने दोहराया है कि ज़िले में शांति और स्थिरता को खतरे में डालने वाली किसी भी गैरकानूनी गतिविधि के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी.’

उन्होंने आगे कहा कि उक्त घटनाओं में शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा रही है और उनके ख़िलाफ़ पीएसए के तहत हिरासत सहित इसी तरह की कानूनी कार्रवाई की जा रही है.’

उल्लेखनीय है कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम जम्मू-कश्मीर पुलिस को किसी भी ऐसे व्यक्ति को हिरासत में लेने का अधिकार देता है जिसे ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ या ‘राज्य की सुरक्षा’ के लिए खतरा माना जाता है.

हालांकि, किसी भी हिरासत आदेश के प्रभावी होने से पहले, पुलिस डोजियर को संबंधित ज़िले के उपायुक्त द्वारा अनुमोदित किया जाना आवश्यक है, जिसके बाद इसे अंतिम अनुमोदन के लिए पीएसए सलाहकार बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है.

गौरतलब है कि उत्तरी कश्मीर ज़िले के प्रमुख 2017 बैच के आईएएस अधिकारी सईद फखरुद्दीन हामिद हैं, जिन्हें हाल ही में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय ने दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग ज़िले के एक व्यक्ति की निवारक हिरासत को मंजूरी देते समय ‘विवेकहीनता’ और ‘मानदंडों की गंभीरता का पालन न करने’ के लिए फटकार लगाई थी.