नई दिल्ली: जातीय हिंसा से प्रभावित मणिपुर में शनिवार (25 मार्च) को एक नागरिक समाज संगठन, कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी (कोकोमी) द्वारा आयोजित रैली में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हो गई.
न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी राज्य की राजधानी इंफाल के बाबूपाड़ा इलाके में स्थित मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह के बंगले की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे.
शहर के अलग-अलग इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात थे. प्रदर्शनकारियों ने चार अलग-अलग दिशाओं से जुलूस निकाले थे. हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने उनके मार्च को बीच में ही रोक दिया.
रैली के दौरान इंफाल पूर्वी जिले के खुराई लामलोंग इलाके में तनाव बढ़ गया. यह इलाका मुख्यमंत्री के बंगले से करीब 2 किलोमीटर दूर है. यहां सुरक्षाकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, क्योंकि प्रदर्शनकारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे.
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कम से कम 22 लोग घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया.
प्रदर्शनकारी इंफाल घाटी स्थित मेईतेई संगठन, ‘कोऑर्डिनेटिंग कमिटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (कोकोमी) के आह्वान पर सड़कों पर उतरे थे. उनका आरोप है कि राज्य सरकार नागरिकों पर हो रहे उग्रवादी हमलों को रोकने में नाकाम रही है.
हाल ही में कोकोमी ने सत्तारूढ़ भाजपा का बहिष्कार करने की घोषणा की थी. उसने सरकार के सामने 25 अप्रैल की समय सीमा तय की थी. इस समय सीमा के भीतर सरकार को बिष्णुपुर जिले में हुए हालिया बम हमले में शामिल सभी लोगों को गिरफ्तार करना था. इस हमले में दो बच्चों की मौत हो गई थी.
ज्ञात हो कि मणिपुर में ताज़ा विरोध प्रदर्शन 7 अप्रैल को बिष्णुपुर जिले के ट्रोंगलाओबी गांव में दो बच्चों की हत्या और उनकी मां के गंभीर रूप से घायल होने के बाद भड़क उठे. यह घटना कथित तौर पर कुकी उग्रवादियों द्वारा दागे गए एक प्रोजेक्टाइल के घर पर गिरने से हुई.
शनिवार को सुरक्षाकर्मियों की रोक के बावजूद प्रदर्शनकारी कांगला के पास एक सभा आयोजित करने में सफल रहे. इस सभा में कोकोमी के नेताओं ने संबोधित किया. बाद में अधिकारियों ने कोकोमी के कुछ नेताओं को मुख्यमंत्री से मिलने की अनुमति दे दी, और उन्होंने मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा.
संगठन ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह केंद्र सरकार पर दबाव डालेगी ताकि चल रहे ‘छद्म युद्ध’ (proxy war) को रोका जा सके और हालिया हिंसक घटनाओं, मुख्य रूप से उन दो बच्चों की हत्याओं के मामले में न्याय सुनिश्चित किया जा सके. इसके अलावा, संगठन ने एक केंद्रीय बल के जवानों द्वारा की गई गोलीबारी की घटना की न्यायिक जांच की मांग की. इस गोलीबारी में बिष्णुपुर में तीन प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई थी. उन दो बच्चों की हत्याओं के कारण ही यह विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था.
दो कुकी पुरुषों की हत्या के ख़िलाफ़ में कांगपोकपी में विरोध प्रदर्शन
कांगपोकपी जिले में शनिवार को जनजीवन प्रभावित रहा, जब कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी (सीओटीयू) द्वारा 10 घंटे के पूर्ण बंद का आह्वान किया गया. यह बंद दो कुकी वालिंटयर्स को श्रद्धांजलि देने के लिए किया गया, जिनकी शुक्रवार को उखरुल जिले के मुलाम में संदिग्ध नगा उग्रवादियों के साथ गोलीबारी में मौत हो गई थी.
स्थानीय खबरों के अनुसार, सुबह 6 बजे शुरू हुआ यह बंद शाम 4 बजे शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त हुआ. बंद के दौरान दोनों मृतकों के शवों को कांगपोकपी जिले के फैजांग गांव स्थित शहीद कब्रिस्तान में दफनाया गया. यह कब्रिस्तान राज्य में जारी जातीय संघर्ष के दौरान मारे गए कुकी-जो समुदाय के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण दफन स्थल बन गया है.
शुक्रवार (24 अप्रैल) को मणिपुर के उखरुल ज़िले में कुकी और नगा समुदायों के बीच हिंसा भड़कने से तीन लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हो गए. मारे गए लोगों में से दो कुकी समुदाय के थे, जबकि तीसरा व्यक्ति तांगखुल नगा समुदाय से था. तांगखुल इस ज़िले का प्रमुख समुदाय है.
कुकी मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे, हथियारबंद तांगखुल नगा लोगों ने कुकी गांवों – मुल्लम और शोंगफाल पर हमला कर दिया, जब वहां के निवासी अपने घरों में सो रहे थे. संगठन ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने दो ‘विलेज़ वालिंटयर्स’ को गोली मारकर मार डाला, महिलाओं और बच्चों सहित कई अन्य लोगों को घायल कर दिया और एक दर्जन से अधिक घरों में आग लगा दी.
मई 2023 में राज्य में जातीय झड़पें शुरू होने के बाद से गांवों की रखवाली करने वाले हथियारबंद नागरिकों के लिए ‘विलेज़ वालिंटयर्स’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है.
कुकी समुदाय से मारे गए दो व्यक्तियों पहचान – पाओमिनलुन हाओलाई (22), जो चूड़ाचांदपुर जिले के सिंगनगट उप-मंडल के हाइजांग गांव के निवासी थे और लेटलाल सितलहौ (41), जो कांगपोकपी जिले के के. खोनोम गांव के निवासी थे – के रूप में हुई.
सीओटीयू ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे ‘जघन्य अपराध’ बताया और क्षेत्र में शांति व स्थिरता पर इसके प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की.
संगठन ने अधिकारियों से दोषियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार करने और राज्य में कथित रूप से ‘बेकाबू हो चुके’ सशस्त्र मिलिशिया समूहों पर नियंत्रण के लिए कड़े कदम उठाने की भी अपील की.
बता दें कि बीते 10 अप्रैल को उखरुल जिले के लितान क्षेत्र में कथित उग्रवादियों की बिना उकसावे की गोलीबारी में बीएसएफ का एक जवान मारा गया. उखरुल का नगा-बहुल लितान क्षेत्र 7 फरवरी से नगा और कुकी समुदायों के बीच हिंसा और आगजनी की घटनाएं हुईं थीं, जिनमें दोनों पक्षों के 30 से अधिक घर जलकर नष्ट हो गए थे.
ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.
