डीयू: हंसराज कॉलेज ने अनुशासनहीनता के लिए छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों समेत 30 छात्रों को निलंबित किया

हंसराज कॉलेज ने छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों समेत लगभग 30 छात्रों को अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया मंच के माध्यम से संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोप में निलंबित कर दिया है. छात्रसंघ ने प्रशासन के इस क़दम की कड़ी निंदा करते हुए विरोध का आह्वान किया है.

हंसराज कॉलेज. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज में बीते एक हफ्ते के दौरान छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों समेत लगभग 30 छात्रों को निलंबित कर दिया गया है. यह कार्रवाई कॉलेज प्रशासन द्वारा अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल, अनुशासनहीनता और सोशल मीडिया मंच के माध्यम से संस्थान की छवि को नुकसान पहुंचाने के आरोपों के चलते की गई है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, हंसराज कॉलेज के छात्रसंघ ने प्रशासन के इस कदम की कड़ी निंदा करते हुए विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है.

उल्लेखनीय है कि निलंबन का पहला नोटिस छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष पार्थ श्रीवास्तव को 20 अप्रैल को जारी किया गया था. कॉलेज की वेबसाइट पर अपलोड किए गए इस नोटिस में कहा गया है कि छात्र को अनुशासनहीनता के कृत्यों में शामिल पाया गया है, जिसमें संस्थान को बदनाम करना और शिक्षण एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का प्रयोग करना शामिल है.

इस पत्र में आगे कहा गया है कि छात्र को अपने माता-पिता के साथ कॉलेज समिति के समक्ष पेश होने के कई अवसर दिए गए, लेकिन वह असफल रहे.

पत्र के अनुसार, ‘छात्र को 23.03.2026 को अंतिम अवसर दिया गया, जहां वह अकेले पेश हुए. आरोपों से अवगत कराए जाने के दौरान, उन्होंने न तो पश्चाताप व्यक्त किया और न ही अपने आचरण को स्वीकार किया.’

हालांकि, पार्थ श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए उन्होंने परिसर में प्रधानाचार्य के बेटे की शादी के विरोध में फरवरी में हुए प्रदर्शनों का जिक्र किया.

पार्थ ने पीटीआई को बताया, ‘प्रधानाचार्य के बेटे की शादी के बाद मैंने कॉलेज में विभिन्न अनियमितताओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए एक आरटीआई आवेदन प्रस्तुत किया था.’ उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें ‘इसके कुछ ही समय बाद’ निलंबन पत्र मिल गया.

उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज प्रशासन का यह कदम पूरी तरह मनमाना है और उन्होंने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है.

इस संबंध में कॉलेज ने 20 अप्रैल को दूसरा नोटिस जारी कर 14 छात्रों को निलंबित किया था. इन सभी छात्रों को 8 और 9 अप्रैल को कॉलेज वार्षिक उत्सव के दौरान परिसर में हुई हिंसा, दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता की गंभीर घटना के मद्देनजर निलंबित करने की बात कही गई है.

कॉलेज फेस्ट के वीडियो, जिनमें कथित तौर पर छात्रों के बीच झड़प दिखाई दे रही है, सोशल मीडिया पर भी प्रसारित किए जा रहे हैं.

बता दें कि जिन छात्रों को निलंबन का नोटिस जारी किया गया है, उन्हें इसकी अवधि नहीं बताई गई है, लेकिन यह उल्लेख किया गया है कि निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें परीक्षा और आंतरिक मूल्यांकन को छोड़कर कॉलेज परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी.

इस तरह का एक अन्य नोटिस 22 अप्रैल को जारी कर परिसर में कथित शारीरिक हिंसा और दुर्व्यवहार का हवाला देते हुए चार और छात्रों को निलंबित कर दिया गया.

इसके बाद 23 अप्रैल को जारी एक नोटिस में कहा गया कि सात छात्रों को ‘सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से कॉलेज को बदनाम करने और संस्थान के शैक्षणिक वातावरण को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल होने’ के आरोप में निलंबित कर दिया गया है.

आखिरी नोटिस 25 अप्रैल को जारी किया गया, जिसमें छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के नाम शामिल थे.

इसमें कहा गया, ‘वार्षिक उत्सव के दौरान हुई हिंसा, दुर्व्यवहार और अनुशासनहीनता की गंभीर घटना के मद्देनजर… हंसराज कॉलेज छात्रसंघ के निम्नलिखित पदाधिकारियों को अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित रहने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.’

उल्लेखनीय है कि छात्रों के खिलाफ इस कार्रवाई की दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) ने  भी कड़ी आलोचना की है. डूसू ने इसे ‘छात्र लोकतंत्र पर हमला और प्रशासनिक शक्ति का घोर दुरुपयोग’ बताया है.

इस मामले पर डूसू के अध्यक्ष आर्यन मान ने कहा, ‘ये वही प्रतिनिधि हैं जो छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए कई दिनों तक धरने पर बैठते हैं, तो आखिर उनका अपराध क्या है? सच बोलना? प्रशासनिक विफलताओं को उजागर करना?’

छात्र नेतृत्व को कुचलने के प्रयास का आरोप लगाते हुए आर्यन ने कहा कि ‘चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज़ दबाना शासन नहीं, बल्कि डर फैलाना है,’ और निलंबन को ‘तत्काल और बिना शर्त रद्द’ करने की मांग की.

उन्होंने कहा, ‘परिसर असहमति, संवाद और जवाबदेही के लिए हैं, न कि तानाशाही कार्रवाई के लिए. छात्रों को धमकाया नहीं जा सकता. छात्रों को चुप नहीं कराया जा सकता.’

गौरतलब है कि बीते दिनों कॉलेज प्रिंसिपल रमा शर्मा के बेटे की शादी कैंपस परिसर में किए जाने पर छात्रों ने विरोध किया था. छात्रों का कहना था कि कॉलेज एक सार्वजनिक शिक्षण संस्थान है, न कि कोई निजी बैंक्वेट हॉल, जिसमें इस तरह का आयोजन बिना छात्रों को बताए किया जाए.

हालांकि, विवाद बढ़ने पर दिल्ली यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने सफाई देते हुए कहा था कि प्रिंसिपल कॉलेज के एक आवंटित आवास में रहती हैं और वहां निजी समारोह करना उनका अधिकार है.