नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने हंसराज कॉलेज प्रशासन की शिकायत के आधार पर 21 लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की है, जिसमें 17 हंसराज कॉलेज के छात्र और चार बाहरी लोग शामिल हैं.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबित, पुलिस ने सोमवार (27 अप्रैल) को बताया कि कॉलेज प्रशासन ने इस महीने की शुरुआत में वार्षिक उत्सव के दौरान संगठित हिंसा का आरोप लगाया है.
उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह कॉलेज प्रशासन ने हिंसा के संबंध में लगभग 30 छात्रों को निलंबित भी किया था. सोमवार को प्रशासन के निलंबन आदेश और एफआईआर के ख़िलाफ़ कई छात्रों ने कॉलेज के गेट नंबर दो के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और इसे वापस लेने की मांग भी की गई.
13 अप्रैल को दायर अपनी शिकायत में कॉलेज प्रशासन ने आरोप लगाया है कि 9 अप्रैल को ‘लगभग 50-60 व्यक्तियों, जिनमें कॉलेज के छात्र और कुछ बाहरी लोग शामिल थे,’ के एक समूह ने गैरकानूनी रूप से एकत्र होकर परिसर में ‘अशांति फैलाने और नुकसान पहुंचाने’ के इरादे से प्रवेश किया.
शिकायत के अनुसार, यह समूह ‘चाकू और अन्य धारदार वस्तुओं जैसे अवैध हथियारों’ से लैस था और उन्होंने ‘एक कॉलेज छात्र पर बेरहमी से हमला किया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं और खून बहने लगा.’
प्रशासन ने अनुसार, इस हिंसा से परिसर में दहशत का माहौल बन गया और सार्वजनिक व्यवस्था बिगड़ गई. प्रशासन ने यह भी बताया कि यह शिकायत कॉलेज को पहले प्राप्त लिखित शिकायतों की ही कड़ी है.
इन शिकायतों में एक शिकायत छात्र विभोर भाटिया की थी, जिन्होंने ‘जानलेवा अस्त्र से हमले’ की सूचना दी थी, और दूसरी शिकायत कॉलेज के एक संकाय सदस्य डॉ. जितेंद्र नागर की थी, जिन्होंने अपने बेटे पर हिंसक हमले का आरोप लगाया है.
शिकायत में वार्षिक उत्सव के आयोजन को लेकर भी चिंता जताई गई है, जिसमें कहा गया है कि ‘उक्त पदाधिकारियों ने कार्यक्रम के आयोजन और प्रबंधन की जिम्मेदारी ली थी,’ लेकिन ‘भीड़ प्रबंधन में चूक, अनाधिकृत प्रवेश और पर्यवेक्षण में विफलता गंभीर लापरवाही का संकेत देती है.’
कॉलेज प्रशासन ने आगे कहा है कि यह घटना ‘पूर्व नियोजित, सुनियोजित थी और इसमें लोग हथियार के साथ शामिल थे, इसलिए तत्काल आपराधिक जांच आवश्यक है.’
पुलिस ने बताया कि एफआईआर में नामजद 17 कॉलेज छात्रों में चार छात्रसंघ पदाधिकारी शामिल हैं. एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘हमने चारों सदस्यों को जांच में सहयोग करने के लिए कहा है. बाकी को बाद में बुलाया जाएगा.’
‘कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के ‘विरुद्ध’
उल्लेखनीय है कि 8-9 अप्रैल को होने वाले वार्षिक उत्सव से कुछ दिन पहले एक कलाकार को आमंत्रित करने को लेकर प्रशासन और निर्वाचित छात्रसंघ समेत छात्रों के एक वर्ग के बीच विवाद शुरू हुआ था. प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए पहले कलाकार को बुलाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था, जबकि छात्रों ने इस प्रतिबंध को ‘अनावश्यक’ बताया था.
बाद में इस शर्त पर अनुमति दी गई कि छात्रसंघ भीड़ का प्रबंधन करेगा. उत्सव के दौरान हंसराज कॉलेज के छात्रों और दिल्ली विश्वविद्यालय के अन्य कॉलेजों के छात्रों के बीच विवाद और झड़प हुए. कॉलेज प्रशासन के अनुसार, दो दिन बाद परिसर में बाहरी लोगों के प्रवेश के बाद एक और विवाद सामने आया.
इसके बाद एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया गया, जिसके परिणामस्वरूप 22 से अधिक छात्रों को निलंबित कर दिया गया, जिनमें कथित तौर पर झड़पों में शामिल 18 छात्र और जवाबदेही न निभाने के आरोप में चार यूनियन पदाधिकारी शामिल थे. इस कार्रवाई के विरोध में हुए प्रदर्शनों के कारण लगभग सात और छात्रों को अनुशासनहीनता के आधार पर निलंबित कर दिया गया.
अखबार को नाम न छापने की शर्त पर निलंबित यूनियन सदस्यों में से एक ने बताया, ‘हमने उत्सव के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य लोग- जिनमें शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी और पुलिस शामिल हैं- अपने कर्तव्यों से मुक्त हो गए थे. जब स्थिति हिंसक हो गई, तो हमने पुलिस हस्तक्षेप का अनुरोध किया, लेकिन एक कर्मचारी ने हमें बताया कि वे प्रशासन के निर्देश के बिना कार्रवाई नहीं कर सकते.’
कॉलेज की अनुशासनात्मक कार्रवाई का विरोध करते हुए कई छात्रों ने ‘निलंबन आदेशों को वापस लेने की मांग की, उन्हें परिसर की लोकतांत्रिक व्यवस्था के ‘विरुद्ध’ बताया.
एक प्रदर्शनकारी छात्रा, जो स्नातक की पढ़ाई कर रही हैं, ने नाम न छापने की शर्त पर पर कहा कि कॉलेज के प्रिंसिपल ने ‘महिला विरोधी’ टिप्पणियां कीं और कहा कि देर रात पुरुष छात्रों के साथ बाहर उनकी उपस्थिति उनके पारिवारिक मूल्यों पर धब्बा है.
इस आरोप का जवाब देते हुए प्रधानाचार्य रमा शर्मा ने बताया कि छात्र 20 घंटे के विरोध प्रदर्शन का हिस्सा थे और चार कर्मचारियों ने रात में सुरक्षा कारणों से उन्हें अंदर जाने के लिए कहा था, लेकिन उन्होंने बात नहीं मानी. उन्होंने आगे कहा कि छात्रों को असहमति और विरोध करने का अधिकार है, लेकिन कॉलेज परिसर में हिंसा के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाता है.
शर्मा ने कहा कि बीस घंटे के विरोध प्रदर्शन के बाद कॉलेज ने छात्रसंघ को भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी सख्त शर्तों के साथ एक कलाकार को आमंत्रित करने की अनुमति दी. हालांकि, जब झड़प हुई, तो प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की.
उन्होंने बताया कि इस मामले को देखने के लिए एक अनुशासनात्मक समिति का गठन किया गया और सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत समीक्षा की गई. जांच के आधार पर कई छात्रों को निलंबित किया गया और पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई गई है.
