ओडिशा: खनन-विरोध पर अदालतें दे रही हैं आदिवासी, दलित प्रदर्शनकारियों को थाने साफ करने का आदेश

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच ओडिशा हाईकोर्ट और रायगड़ा ज़िला अदालत ने क्षेत्र में खनन का विरोध करने वाले कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों को ज़मानत की शर्त के तौर पर पुलिस थाने साफ करने का आदेश दिया है. प्रदर्शनकारियों में अधिकतर आदिवासी और दलित समुदाय के लोग हैं. कार्यकर्ताओं, नागरिक समाज संगठनों और वकीलों ने इन आदेशों को जातिवादी और अपमानजनक बताया है.

वेदांता कंपनी के खिलाफ एक विरोध प्रदर्शन. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: ओडिशा के रायगड़ा ज़िले में खनन-विरोधी प्रदर्शनों को 2023 में अपराध की श्रेणी में रखना शुरू किया गया, जब वेदांता परियोजना का विरोध कर रहे दलित और आदिवासी ग्रामीणों को गिरफ्तार किया गया. तब से कम से कम 40 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है और अदालतों ने कम से कम आठ प्रदर्शनकारियों को ज़मानत की शर्त के तौर पर पुलिस थाने साफ करने का आदेश दिया है.

आर्टिकल 14 की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यकर्ताओं का कहना है कि ये फ़ैसले, जो सवर्ण और ओबीसी जातियों के जजों द्वारा दिए गए हैं, जातिवादी हैं.

अदालत के एक आदेश में कहा, ‘याचिकाकर्ता को रोज सुबह 6:00 बजे से 9:00 बजे के बीच काशीपुर पुलिस स्टेशन परिसर की सफाई करनी होगी.’

यह उन ज़मानत शर्तों में से एक थी, जो ओडिशा हाईकोर्ट ने 28 मई 2025 को रायगड़ा ज़िले के 26 वर्षीय दलित खनन-विरोधी प्रदर्शनकारी कुमेश्वर नायक को ज़मानत देते समय लगाई थी.

वेबसाइट की रिपोर्ट के अनुसार, मई 2025 से जनवरी 2026 के बीच ऐसे आठ आदेशों जारी किए गए – इनमें से सात रायगड़ा ज़िले की अदालत के दो जज ने दिए थे- एक सवर्ण जाति से और दूसरा अन्य पिछड़ा वर्ग से – और एक हाईकोर्ट के जज ने दिए थे, जो सवर्ण जाति से था.

जिन आठ लोगों को ऐसी ‘जातिवादी’ शर्तों पर ज़मानत मिली है, उनमें से छह दलित हैं और दो आदिवासी हैं.

नायक, जिनकी इलाके में एक छोटी सी किराने की दुकान है, रायगड़ा ज़िले के अन्य दलित और आदिवासियों के साथ मिलकर, जिन्हें विस्थापित होना पड़ेगा, 2023 में नवीन पटनायक के नेतृत्व वाली बीजू जनता दल सरकार द्वारा वेदांता लिमिटेड को बॉक्साइट खनन का ठेका दिए जाने का विरोध कर रहे थे.

वेदांता लिमिटेड मुंबई स्थित एक 50 साल पुरानी बहुराष्ट्रीय खनन कंपनी है, जिसके गोवा, कर्नाटक, ओडिशा, आयरलैंड, नामीबिया और ऑस्ट्रेलिया सहित कई जगहों पर खनन कार्य चल रहे हैं.

जून से अगस्त 2025 तक – लगभग दो महीनों तक कुमेश्वर नायक – जिन्हें ज़मानत मिलने से पहले रायगढ़ ज़िले की काशीपुर जेल में पांच महीने बिताने पड़े थे – को काशीपुर पुलिस स्टेशन में झाड़ू-पोछा करना पड़ा. यह वही पुलिस स्टेशन था जहां उन्हें कभी हिरासत में रखा गया था.

नायक के अनुसार, उन्हें ज़लील करने के लिए ही ऐसा किया गया था. उन्होंने कहा, ‘पुलिस स्टेशन की ओर जाते हुए, यह जानते हुए कि हमें यह अपमानजनक काम करना पड़ेगा, मैंने अपने दिल से कहा कि हमारा मकसद इस मामूली आदेश से कहीं ज़्यादा बड़ा है.’

उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन, मैं यह ज़रूर कहना चाहूंगा कि यह जातिवादी आदेश खुद न्यायपालिका ने दिया था, जिससे मुझे यह सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि हम आज कहां खड़े हैं.’

रायगड़ा ज़िले के काशीपुर ब्लॉक के कांतामाल गांव, जो काशीपुर थाने से लगभग 20 किमी दूर है, के निवासी नायक को 6 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया था. उन पर आरोप लगाया कि वह और लगभग सौ अन्य लोगों ने सितंबर 2024 में पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शनों के दौरान दंगा किया, अधिकारियों को रोका, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और लोक सेवकों पर हमला किया.

28 मई 2025 को उन्हें ओडिशा हाईकोर्ट ने ज़मानत दे दी. नायक ने कहा, ‘इस ज़मानत आदेश के ज़रिए अधिकारियों ने हमें खनन-विरोधी आंदोलन का हिस्सा होने के कारण अपमानित करने की कोशिश की- एक ऐसा आंदोलन जो न केवल हमें विस्थापित करेगा, बल्कि इन सुंदर पहाड़ियों को भी नष्ट कर देगा, जो हमारी बुनियादी ज़रूरतें पूरी करती हैं.’

उन्होंने कहा, ‘वे चाहते हैं कि हम अपनी ज़मीन छोड़ दें. हम दलित हैं और हममें से कई भूमिहीन हैं, लेकिन फिर भी हम इस ज़मीन के लिए लड़ रहे हैं.’

45 वर्षीय दलित कार्यकर्ता और किसान हीरामल नायक को भी इसी तरह की शर्तों पर रिहा किया गया और रायगड़ा ज़िला अदालत ने पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों दोनों से आदेश का पालन सुनिश्चित करने को कहा.

18 फरवरी 2026 को तीन और प्रदर्शनकारी – नारंगीदेई माझी, रमाकांत नायक और सुंदर सिंह माझी – एक साल से ज़्यादा समय तक हिरासत में बिताने के बाद जेल से बाहर आए. लेकिन उनकी रिहाई भी उसी विवादास्पद शर्त के साथ हुई.

नागरिक संगठनों ने इन आदेशों को जातिवादी और अपमानजनक बताया

तिजिमाली के खनन-विरोधी आंदोलन का समर्थन करने वाली कार्यकर्ता शरण्या नायक के अनुसार, विवादास्पद आठ ज़मानत आदेश में से पांच को लागू किया गया.

शरण्या नायक ने कहा, ‘यह ज़मानत शर्त दलित और आदिवासी समुदायों के प्रति हाईकोर्ट और रायगड़ा सत्र न्यायालय के न्यायाधीशों के जातिगत पूर्वाग्रह को दर्शाती है. मुझे पूरा विश्वास है कि किसी भी समान मामले में गिरफ्तार किसी सवर्ण नेता को इस तरह की ज़मानत शर्त कभी नहीं दी जाती.’

जिन लोगों को ऐसी ज़मानत शर्तें दी गईं, वे ‘मां माटी माली सुरक्षा मंच’ से जुड़े हैं. यह एक जमीनी संगठन है, जिसे रायगड़ा ज़िले के कुई-भाषी आदिवासी और दलित निवासियों ने तिजिमाली पहाड़ियों में खनन का विरोध करने के लिए बनाया है.

नागरिक समाज संगठनों और वकीलों ने भी इन आदेशों को जातिवादी और अपमानजनक बताया है. उनका कहना है कि ये शर्तें व्यक्तियों को ऐसा श्रम करने के लिए मजबूर करती हैं, जो ऐतिहासिक रूप से वंचित जातियों पर थोपा जाता रहा है.

जुलाई 2025 में 86 से अधिक नागरिकों, वकीलों और कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट को पत्र लिखकर इस मामले पर स्वतः संज्ञान लेने और इन ज़मानत शर्तों को वापस लेने की मांग की और इन्हें ‘समाज के कमजोर वर्गों के प्रति पूर्वाग्रह से मुक्त न होने वाला’ बताया.

गिरफ़्तारियों का सिलसिला

साल 2023 से तिजिमाली इलाके के आदिवासी और दलित समुदाय वेदांता लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित एक बॉक्साइट खनन परियोजना का विरोध कर रहे हैं. यह विरोध तब शुरू हुआ, जब कंपनी को तिजिमाली बॉक्साइट ब्लॉक आवंटित किया गया, ताकि वह ओडिशा के कालाहांडी ज़िले में स्थित लांजीगढ़ एल्युमिनियम रिफ़ाइनरी के लिए कच्चा माल जुटा सके.

इस परियोजना में पूर्वी घाट की तिजिमाली पहाड़ी श्रृंखला में बड़े पैमाने पर वन भूमि का डायवर्जन शामिल है – प्रस्तावित 1560.40 हेक्टेयर के खनन पट्टा क्षेत्र का लगभग 46.37% हिस्सा वन भूमि है. इस परियोजना के तहत दो गांव – रायगड़ा ज़िले का मालिपदर और कालाहांडी ज़िले का तिजिमाली – हटाए जाएंगे, जिनमें 140 से अधिक परिवारों की आबादी है.

2023 से अब तक परियोजना का विरोध करने पर कम से कम 40 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

13 अगस्त से 25 अगस्त 2023 के बीच 24 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया, क्योंकि उन्होंने वेदांता द्वारा नियुक्त एक कंपनी के अधिकारियों और पुलिस को क्षेत्र में प्रवेश कर स्थानीय लोगों से सहमति लेने से रोका था.

20 सितंबर 2024 को काशीपुर पुलिस ने खनन-विरोधी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक कार्तिक नायक को गिरफ्तार किया. काशीपुर पुलिस स्टेशन द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, उनकी रिहाई की मांग को लेकर लगभग 200 ग्रामीण थाने के बाहर एकत्र हुए.

इसके बाद पुलिस ने 58 नामजद व्यक्तियों और 140 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया.

कार्यकर्ताओं के अनुसार, सितंबर 2024 से अब तक विभिन्न आरोपों के तहत कम से कम 50 लोगों को विरोध प्रदर्शन करने के कारण गिरफ्तार किया गया है.