ईरान पर अमेरिका-इज़रायल हमलों का 61वां दिन: परमाणु अप्रसार संधि समीक्षा सम्मेलन के उपाध्यक्षों में चुना गया ईरान

ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों के 61 दिन पूरे हो चुके हैं. युद्ध विराम के बावजूद लेबनान और ग़ज़ा में इज़रायली हमले जारी हैं. इस बीच संयुक्त राष्ट्र में ईरान को वर्ष 2026 के परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन का उपाध्यक्ष चुना गया है. इस फैसले को वैश्विक मंच पर वॉशिंगटन की अलग-थलग पड़ती स्थिति के रूप में देखा जा रहा है.

तेहरान के डाउनटाउन स्थित इंकलाब-ए-इस्लामी (इस्लामी क्रांति) चौक पर सरकार समर्थक प्रदर्शन के दौरान ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा प्रदर्शित बैलिस्टिक मिसाइल. (तस्वीर: एपी/पीटीआई)

नई दिल्ली: ईरान पर अमेरिका और इज़रायल के हमलों से पैदा हुआ पश्चिम एशिया संकट बुधवार (29 अप्रैल) को 61वें दिन में प्रवेश कर गया. इस बीच संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय से ईरान के पक्ष में एक अहम कूटनीतिक खबर सामने आई है. ईरान को वर्ष 2026 की परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) समीक्षा सम्मेलन का उपाध्यक्ष चुना गया है.

यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका और इज़रायल ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में जुटे हैं. इसे वैश्विक मंच पर वॉशिंगटन की अलग-थलग पड़ती स्थिति के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले भी नाटो देशों ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका की सीधी मदद या भागीदारी से दूरी बनाई थी.

ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की तैयारी, तेल महंगा

रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अधिकारियों को ईरानी बंदरगाहों की लंबी नाकेबंदी की तैयारी करने के निर्देश दिए हैं. इस खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में और तेजी आई है. बाजार को आशंका है कि अगर समुद्री व्यापार बाधित हुआ तो ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ेगा.

लेबनान में युद्धविराम के बावजूद हमले

इज़रायल और लेबनान के बीच युद्धविराम लागू होने के बावजूद हमले जारी हैं. लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, सुबह तड़के इज़रायली सेना ने हानीन कस्बे पर हवाई हमला किया, जिसमें कई मकान तबाह हो गए.

दक्षिणी लेबनान के मजदल ज़ौन इलाके में इज़रायली हमले में पांच लोगों की मौत हुई है. इनमें तीन पैरामेडिक कर्मी शामिल हैं. तीन सैनिकों के घायल होने की भी खबर है.

लेबनानी सेना और सिविल डिफेंस के मुताबिक, सेना की एक गश्ती टीम राहतकर्मियों और बुलडोज़रों के साथ पहले हमले वाली जगह पर बचाव अभियान चला रही थी, तभी दूसरा हमला हुआ. कुछ राहतकर्मी मलबे में दब गए.

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने इस हमले की कड़ी निंदा की है. उन्होंने कहा कि यह राहत और प्राथमिक चिकित्सा कर्मियों को निशाना बनाने वाली घटनाओं की कड़ी है.

उन्होंने कहा कि इज़रायल लगातार अंतरराष्ट्रीय कानूनों और उन संधियों का उल्लंघन कर रहा है जो नागरिकों, पैरामेडिक स्टाफ, सिविल डिफेंस और रेड क्रॉस कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं.

ग़ज़ा अस्पताल निदेशक की हिरासत बढ़ी

इज़रायल की मानवाधिकार संस्था फिजिशियंस फॉर ह्यूमन राइट्स-इज़रायल ने कहा है कि ग़ज़ा के डॉक्टर हुसाम अबू सफिया की हिरासत अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दी गई है.

अबू सफिया उत्तरी ग़ज़ा के कमाल अदवान अस्पताल के निदेशक हैं और इज़रायली बमबारी के बीच इलाज जारी रखने वाले स्वास्थ्यकर्मियों का प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे.

इज़रायली सेना ने उन पर हमास के साथ सहयोग करने का आरोप लगाया है, लेकिन अस्पताल कर्मियों और अंतरराष्ट्रीय सहायता संगठनों ने इन आरोपों से इनकार किया है.

मानवाधिकार समूह का कहना है कि उन्हें नेगेव जेल में कठोर परिस्थितियों में रखा गया है और बिना आरोप तय किए हिरासत बढ़ाई गई है.

यूरोविज़न प्रतियोगिता में इज़रायल के विरोध की मांग

सर्बिया में दर्जनों प्रदर्शनकारियों ने सरकारी प्रसारक आरटीएस के बाहर प्रदर्शन कर यूरोविज़न सॉन्ग कॉन्टेस्ट का बहिष्कार करने की मांग की. प्रदर्शनकारियों ने फ़िलिस्तीनी झंडे लहराए और ग़ज़ा में इज़रायल पर अत्याचार के आरोप लगाए.

इस साल प्रतियोगिता 12 से 16 मई के बीच वियना में होनी है. इज़रायल की भागीदारी को लेकर पहले ही कई देशों में विरोध बढ़ चुका है. स्लोवेनिया, आइसलैंड, आयरलैंड, नीदरलैंड और स्पेन प्रतियोगिता से बाहर होने की घोषणा कर चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र में फ़िलिस्तीनी पक्ष की अपील

फ़िलिस्तीनी मंत्री वारसेन अघाबेकियन ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि इज़रायल को नागरिकों की हत्या तुरंत बंद करनी चाहिए.

उन्होंने आरोप लगाया कि इज़रायल फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है और वेस्ट बैंक में बसने वाले यहूदी बस्तियों के लोग रोज़ाना फ़िलिस्तीनियों को आतंकित कर रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि ग़ज़ा में आश्रय सामग्री, राहत सहायता और मानवीय कर्मियों की पहुंच रोकने का कोई औचित्य नहीं है.

संकट और गहराया

ईरान पर हमलों के 61वें दिन यह संकट अब केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. संयुक्त राष्ट्र की राजनीति, तेल बाजार, लेबनान, ग़ज़ा और यूरोप तक इसका असर दिखाई दे रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेत फिलहाल नहीं दिख रहे.