ईरान पर अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बाद से जयशंकर और अराग़ची ने छठी बार फोन पर बातचीत की

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत और ईरान के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ा है. विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अब्बास अराग़ची ने गत 60 दिनों में छठी बार बातचीत की है. हालिया फोन कॉल (29 अप्रैल) ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हुई है, जो अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होनी है, हालांकि दोनों पक्षों ने अपने बयानों में इसका जिक्र नहीं किया है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर बीते साल जुलाई में चीन के तियानजिन में अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के साथ. (फोटो: एक्स वाया पीटीआई)

नई दिल्ली: अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के ख़िलाफ़ युद्ध शुरू किए जाने के बाद से भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके ईरानी समकक्ष अब्बास अराग़ची ने बुधवार (29 अप्रैल) को छठी बार फोन पर बात की.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता खटास में पड़ने के बाद भारत और तेहरान के बीच हुई इस बातचीत में दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा की.

उल्लेखनीय है कि यह फोन कॉल ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक से पहले हुई है, जो अगले महीने नई दिल्ली में आयोजित होनी है, हालांकि दोनों पक्षों ने अपने बयानों में इसका जिक्र नहीं किया है.

सोशल मीडिया मंच एक्स पर विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि उन्हें बुधवार को अराग़ची का फोन आया था और दोनों देशों ने ‘मौजूदा स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की’ और संपर्क में रहने पर सहमति जताई.

इस संबंध में भारत में ईरान के दूतावास ने कहा कि दोनों मंत्रियों ने ‘युद्धविराम, द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों से संबंधित नवीनतम घटनाक्रमों पर चर्चा की और विचारों का आदान-प्रदान किया.’

मालूम हो कि ब्रिक्स सदस्य ईरान के विदेश मंत्री के रूप में अराग़ची आगामी 14 और 15 मई को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में शामिल होंगे. हालांकि, बुधवार को न तो तेहरान और न ही जयशंकर की ओर से उनकी उपस्थिति पर किसी चर्चा की कोई जानकारी दी गई है.

ज्ञात हो कि यह बैठक पिछले शुक्रवार को नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स उप विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों के सम्मेलन के तुरंत बाद हो रही है, जहां यह समूह एक संयुक्त बयान पर सहमत नहीं हो सका था, जिसके बाद भारत द्वारा अध्यक्षीय बयान जारी किया था. इसमें समूह के भीतर की दरारें उजागर हुई थी.

बता दें कि इस समूह में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (जिस पर तेहरान ने युद्ध के दौरान हमला किया था) दोनों सदस्य हैं.

उधर, ईरान ने आह्वान किया है कि नई दिल्ली की अध्यक्षता में हो रहे ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल देशों को पश्चिम एशिया संकट के समाधान में ‘मजबूत’ और ‘रचनात्मक’ भूमिका निभानी चाहिए.

इस बीच बुधवार की भारत और ईरान देशों के विदेश मंत्रियों के बीच फोन कॉल होर्मुज जलडमरूमध्य की निरंतर नाकाबंदी की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसने भारत की ऊर्जा आपूर्ति, विशेष रूप से एलपीजी की आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है, जिससे रेस्तरां और प्रवासी श्रमिकों को विशेष रूप से नुकसान हुआ है.

ध्यान रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकाबंदी न हटाने के फैसले के मद्देनजर ईरान द्वारा जलडमरूमध्य की जवाबी नाकाबंदी जारी रखने के निर्णय के बाद इस संकरे मार्ग पर यातायात सीमित बना हुआ है.

ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने के बाद से भारत ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से अपने आठ एलपीजी टैंकरों को सुरक्षित पार कराया है. साथ ही, हाल के दिनों में भारत ने अमेरिका से रिकॉर्ड मात्रा में एलपीजी की आपूर्ति की व्यवस्था भी की है.

बुधवार को अब्बास अराग़ची और एस. जयशंकर के बीच हुई बातचीत 18 अप्रैल की उस घटना के बाद उनकी पहली बातचीत थी, जब ईरानी बलों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ पार करने की कोशिश कर रहे दो भारतीय झंडे वाले जहाज़ों पर फायरिंग की थी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने ईरान के राजदूत मोहम्मद फ़तहली को तलब किया था।

हालांकि, वाशिंगटन ने ईरान के साथ अपने युद्धविराम को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है, लेकिन सप्ताह के आखिर में इस्लामाबाद में दोनों पक्षों के बीच शांति वार्ता के दूसरे दौर की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब अराग़ची पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने के बाद शहर से चले गए और ट्रंप ने वहां अपने दूतों की यात्रा रद्द कर दी.