नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ गए हैं और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए स्पष्ट बहुमत हासिल कर लिया है. निर्वाचन आयोग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, 294 सदस्यीय विधानसभा में 293 सीटों के घोषित रुझानों/नतीजों में भाजपा 208 सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 79 सीटों पर सिमट गई है.
अब तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भाजपा 165 सीटें जीत चुकी है और 43 सीटों पर आगे है. वहीं टीएमसी 59 सीटें जीत चुकी है और 20 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. कांग्रेस 2 सीटें जीत चुकी है. आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) 2 सीटों पर विजयी रही है. माकपा और ऑल इंडिया सेक्युलर फ्रंट (एआईएसएफ) को 1-1 सीट मिली है.
राज्य की 294 सीटों में से आज 293 सीटों पर मतगणना हुई. फलटा सीट पर कथित चुनावी अनियमितताओं के चलते निर्वाचन आयोग ने पुनर्मतदान का आदेश दिया है. वहां 21 मई को मतदान होगा.
ममता का गढ़ टूटा, भाजपा की ऐतिहासिक जीत
यह परिणाम पश्चिम बंगाल की राजनीति में ऐतिहासिक माना जा रहा है. पिछले डेढ़ दशक से राज्य की सत्ता पर काबिज ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को भाजपा ने सीधी चुनौती दी और निर्णायक बढ़त हासिल की. भाजपा लंबे समय से बंगाल को पूर्वी भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती मानती रही थी.
राज्य में इस बार भाजपा ने उत्तर बंगाल, जंगलमहल, औद्योगिक क्षेत्रों और शहरी इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया. वहीं टीएमसी दक्षिण 24 परगना, उत्तर 24 परगना और कुछ पारंपरिक गढ़ों तक सीमित होती दिखी.
भाजपा पर वोट लूट के आरोप
भाजपा की भारी जीत को ममता बनर्जी ने वोट लूट बताया है. पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, ‘भाजपा ने 100 से ज्यादा सीटों की लूट की है. भाजपा ने धोखाधड़ी की है. चुनाव आयोग अब भाजपा आयोग बन गया है. हमने समय-समय पर इसकी शिकायत की है. लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था.’
ममता बनर्जी ने आगे कहा, ‘भाजपा की जीत अनैतिक है. इलेक्शन कमीशन ने प्रधानमंत्री और गृह मंत्री के साथ मिलकर जो किया है वो पूरी तरह अनैतिक है. उन्होंने जोर-जबरदस्ती से एसआईआर किया. अत्याचार किया. काउंटिंग एजेंटों को गिरफ़्तार किया है. हम वापसी करेंगे.’
मतगणना के दौरान विवाद भी
मतगणना के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया था कि जिन सीटों पर टीएमसी आगे है, वहां आधिकारिक परिणाम जारी करने में देरी की जा रही है. हालांकि बाद में आयोग की ओर से नियमित रूप से आंकड़े अपडेट किए गए.
पिछले तीन चुनावों से तुलना
2021 में टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 77 सीटें मिली थीं.
2016 में टीएमसी को 211 सीटें और भाजपा को सिर्फ 3 सीटें मिली थीं.
2011 में टीएमसी ने 184 सीटें जीतकर वाम मोर्चे के 34 साल पुराने शासन का अंत किया था, जबकि भाजपा खाता भी नहीं खोल सकी थी.
राष्ट्रीय राजनीति के लिए क्या मायने?
पश्चिम बंगाल में भाजपा की यह जीत राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम मानी जा रही है. ओडिशा और बिहार के बाद पूर्वी भारत में भाजपा का विस्तार अब बंगाल तक पहुंचता दिख रहा है. इसे 2024 लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी की बड़ी राजनीतिक वापसी के रूप में देखा जा रहा है.
पश्चिम बंगाल की सत्ता में अब बदलाव लगभग तय माना जा रहा है और भाजपा पहली बार राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है.
