नई दिल्ली: चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों ने देश की राजनीति को नया संदेश दिया है. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने असम में सत्ता बरकरार रखी, पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पुडुचेरी में सहयोगियों के साथ सरकार बचाने में सफलता हासिल की. वहीं तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिझगा वेत्री कड़गम (टीवीके) ने सबसे बड़ी पार्टी बनकर सबको चौंका दिया. केरल में कांग्रेस ने वापसी करते हुए सत्ता परिवर्तन कर दिया.
इन परिणामों ने साफ कर दिया कि भाजपा अब भी राष्ट्रीय राजनीति की सबसे प्रभावशाली चुनावी ताकत बनी हुई है, हालांकि दक्षिण भारत में उसके सामने चुनौतियां कायम हैं. दूसरी ओर, कई राज्यों में क्षेत्रीय राजनीति ने भी नए संकेत दिए हैं.
असम में भाजपा की वापसी
126 सदस्यीय असम विधानसभा में भाजपा ने लगातार दूसरी बार स्पष्ट जनादेश हासिल किया है. निर्वाचन आयोग के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार भाजपा 81 सीटें जीत चुकी है और एक सीट पर आगे है. कांग्रेस 17 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी दल बनी है. बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) और असम गण परिषद (एजीपी) को 10-10 सीटें मिली हैं, जबकि एआईयूडीएफ 2 सीटें जीत सकी है.
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व शर्मा के नेतृत्व में भाजपा ने पिछली बार की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया. 9 अप्रैल को हुए मतदान में 85.64 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया था.
पश्चिम बंगाल में भाजपा का बड़ा उलटफेर
सबसे अधिक चर्चा पश्चिम बंगाल के नतीजों को लेकर रही. 294 सदस्यीय विधानसभा में 292 सीटों के रुझान/नतीजों के अनुसार भाजपा 208 सीटों पर जीत या बढ़त के साथ सत्ता के बेहद करीब पहुंच गई है. तृणमूल कांग्रेस 79 सीटों पर सिमटती दिखी.
भाजपा 173 सीटें जीत चुकी है और 35 पर आगे है. वहीं टीएमसी 59 सीटें जीतकर 20 सीटों पर आगे है. कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं.
यह परिणाम ममता बनर्जी के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है. पिछले डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज टीएमसी को भाजपा ने पहली बार निर्णायक रूप से पीछे छोड़ा है. इसे भाजपा के पूर्वी भारत विस्तार की सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है.
पुडुचेरी में एनडीए बरकरार
30 सदस्यीय पुडुचेरी विधानसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने बढ़त बनाए रखी है. अखिल भारतीय एन.आर. कांग्रेस (एआईएनआरसी) 11 सीटें जीतकर एक सीट पर आगे है. भाजपा को 4 सीटें मिली हैं. डीएमके 5 सीटों पर विजयी रही है, जबकि निर्दलीयों ने 3 सीटें जीती हैं. टीवीके ने यहां भी 2 सीटें जीतकर उपस्थिति दर्ज कराई है.
मुख्यमंत्री एन. रंगासामी ने थट्टांचावडी सीट से जीत दर्ज की. पुडुचेरी में 89.87 प्रतिशत मतदान हुआ था.
तमिलनाडु में विजय का उभार
तमिलनाडु के नतीजों ने सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज दिया. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके 234 सदस्यीय विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. पार्टी 93 सीटें जीत चुकी है और 14 सीटों पर आगे है.
सत्तारूढ़ डीएमके 47 सीटें जीतकर 13 पर आगे रही, जबकि एआईएडीएमके 41 सीटें जीतकर 6 सीटों पर आगे है. कांग्रेस 3 सीटें जीतकर 2 पर आगे है. पीएमके 2 सीटों पर आगे है.
हालांकि टीवीके बहुमत से दूर है, लेकिन पहली बार चुनाव लड़ते हुए यह प्रदर्शन तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
केरल में कांग्रेस की वापसी
140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस के नेतृत्व वाले मोर्चे ने सत्ता में वापसी की है. कांग्रेस 63 सीटें जीत चुकी है. माकपा 26 सीटों पर सिमटी, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) को 22 सीटें मिली हैं. केरल कांग्रेस (केईसी) 7 सीटें जीत सकी है.
यह परिणाम वाम मोर्चे के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
राष्ट्रीय राजनीति को क्या संदेश?
इन पांच चुनावों के नतीजों ने कई स्तरों पर संदेश दिया है. भाजपा ने पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में अपनी ताकत साबित की, जबकि दक्षिण भारत में उसे अभी लंबा रास्ता तय करना है. तमिलनाडु में विजय का उभार और केरल में कांग्रेस की वापसी विपक्ष के लिए राहत की खबर है.
सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश पश्चिम बंगाल से आया, जहां भाजपा ने उस राज्य में सत्ता के दरवाजे तक पहुंच बनाई, जिसे वह लंबे समय से अपनी ‘अंतिम पूर्वी चुनौती’ मानती रही थी.
