नई दिल्ली: महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में लिए गए एक निर्णय में गढ़चिरौली जिले में खनन गतिविधियों के लिए 937.077 हेक्टेयर आरक्षित वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी दे दी है. यह ज़मीन लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी को लौह अयस्क के वैज्ञानिक अन्वेषण और खनन के विस्तार के लिए निर्धारित की गई है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यह प्रस्ताव, जो शुरू में मार्च 2024 में प्रस्तुत किया गया था, एक कड़ी अनुमोदन प्रक्रिया से गुजरा और अंततः मई 2025 तक केंद्र से सैद्धांतिक (इन-प्रिंसिपल) स्वीकृति मिल गई. घटनाक्रम वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत आता है, जिसके तहत राज्य को फरवरी 2026 तक नियमों के पालन की रिपोर्ट जमा करनी थी.
अब अप्रैल 2026 में केंद्रीय मंत्रालय द्वारा अंतिम मंज़ूरी दिए जाने के साथ ही यह परियोजना आगे बढ़ने के लिए तैयार है और इसके लिए वन्यजीवों से जुड़ी अलग से मंज़ूरी लेने की ज़रूरत नहीं होगी. हालांकि, परियोजना शुरू करने से पहले संबंधित वन प्राधिकरणों से प्रमाणन प्राप्त करना ज़रूरी होगा.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य सरकार के एक आदेश में कहा गया है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने गढ़चिरौली में लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड के पक्ष में 937.077 हेक्टेयर वन भूमि देने के लिए अपनी अंतिम मंज़ूरी दे दी है.
आदेश में कहा गया है कि कंपनी इस भूमि का उपयोग गढ़चिरौली जिले के एटापल्ली में हेडरी, बांदे और पारसलगोंडी गांवों में मौजूदा खदानों से कम ग्रेड वाले लौह अयस्क की खनन और निकालने के लिए करेगी. आदेश में कहा गया है, ‘अब महाराष्ट्र सरकार इस वन भूमि को लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी लिमिटेड, गढ़चिरौली को देने का निर्देश देती है.’
आदेश में आगे कहा गया है कि गढ़चिरौली के मुख्य वन संरक्षक, प्रधान मुख्य वन संरक्षक के परामर्श से यह सुनिश्चित करेंगे कि वन भूमि सौंपने से पहले इस परियोजना के लिए वन्यजीव मंज़ूरी की आवश्यकता न हो.
इसमें यह भी कहा गया है कि यदि कंपनी मुफ्त पहुंच प्रदान नहीं करती है या बाधाएं पैदा करती है, तो वन भूमि को गैर-वन उपयोग के लिए देने की अनुमति वापस ले ली जाएगी.
बता दें कि पिछले साल फरवरी में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नक्सल प्रभावित गढ़चिरौली जिले को ‘भारत के ग्रीन स्टील हब’ के रूप में विकसित करने की एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी. इसके कुछ महीनों बाद लॉयड ने कहा कि वह गढ़चिरौली के हेडरी में लौह अयस्क को स्टील में बदलने के लिए एक बड़े विस्तार की योजना लागू करना चाहती है.
उल्लेखनीय है कि इससे पहले द वायर अपनी रिपोर्ट में बताया था कि गढ़चिरौली जिले में लॉयड कंपनी को जमीनें देने के लिए सरकार वन अधिकार कानून और पेसा कानूनों का उल्लंघन कर रही है.
गढ़चिरौली जिला खनन प्राधिकरण (जीडीएमए) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस हैं. 30 जून 2025 को महाराष्ट्र सरकार ने गढ़चिरौली जिले में खनन स्वीकृतियों में तेजी लाने और खनिज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एकीकृत प्राधिकरण स्थापित करने के लिए विधानसभा में एक विधेयक पेश किया था.
इस विधेयक के अनुसार, प्राधिकरण के पास सभी मौजूदा कानूनों को दरकिनार करने की शक्ति होगी और किसी भी अदालत को इसके किसी भी कार्य या आदेश के खिलाफ कोई मुकदमा/कार्यवाही चलाने का अधिकार नहीं होगा.
7 जुलाई 2025 को इस विधेयक को महाराष्ट्र विधान परिषद ने पारित कर दिया था. 7 जुलाई को ही महाराष्ट्र के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने गढ़चिरौली को एक स्टील उत्पादन केंद्र में बदलने के लिए एक लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी.
22 मई 2025 को पर्यावरण मंत्रालय ने लॉयड्स मेटल्स एंड एनर्जी के अयस्क-वाशिंग प्लांट के लिए 900 हेक्टेयर से अधिक जंगल साफ करने और 1,23,000 से अधिक पेड़ों को काटने के लिए हरी झंडी दे दी थी. कंपनी के परियोजना को पहले ही ‘उल्लंघन मामले’ (violations category case) के रूप में वर्गीकृत किया गया था, लेकिन कंपनी को पर्यावरण उल्लंघन के लिए दोषी ठहराए जाने के बावजूद विस्तार की मंजूरी मिल गई थी.
