नई दिल्ली: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार (5 मई) को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में गिरफ्तार एक मुस्लिम व्यक्ति को ज़मानत दे दी, जिन्हें ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद से जुड़े एक इंस्टाग्राम पोस्ट के कारण गिरफ्तार किया गया था. अदालत ने कहा कि उनकी पोस्ट में किसी भी जाति या समुदाय का नाम नहीं लिया गया था.
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने कहा कि नदीम 7 अक्टूबर, 2025 से हिरासत में है और इस मामले में चार्जशीट भी दायर की जा चुकी है. उनके वकील अतुल कुमार ने कहा कि मुक़दमे की सुनवाई जल्द पूरी होने की कोई संभावना नहीं है. अदालत ने दो ज़मानतदारों के साथ निजी मुचलके पर नदीम को ज़मानत दे दी.
राज्य सरकार ने नदीम की याचिका का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि उनका वीडियो उकसाने वाला था, जिसमें उन्होंने ‘आई लव मोहम्मद’ नारे के लिए ‘अपना और दूसरों का गला काटने’ की बात कही थी. पुलिस ने इस नारे को सितंबर 2025 में बरेली में हुई अशांति की घटनाओं से जोड़ा.
गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि
सितंबर 2025 की शुरुआत में कानपुर के रावतपुर इलाके के हिंदू निवासियों ने ईद-ए-मिलाद-उन-नबी (पैगंबर के जन्मदिन) के जुलूस के दौरान मुसलमानों द्वारा ‘आई लव मोहम्मद’ नारे के उपयोग का विरोध किया. जब मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस नारे (एक लाइटबोर्ड पर) को बनाए रखने पर जोर दिया, तो तीखी बहस हुई और पुलिस को बुलाना पड़ा.
बोर्ड को हटाकर दूसरी जगह लगा दिया गया. इंडियन एक्सप्रेस ने घटना के कुछ दिन बात रिपोर्ट किया था कि उस समय पुलिस ने कहा कि कार्रवाई नारे के खिलाफ नहीं, बल्कि इसलिए की गई क्योंकि जुलूस ‘निर्धारित मार्गों’ का पालन नहीं कर रहा था.
4 सितंबर को एक पुलिस अधिकारी की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई. रिपोर्ट के अनुसार, इसमें कहा गया था: ‘रावतपुर गांव में कुन्नू कबाड़ी के घर पर ‘आई लव मोहम्मद’ का बैनर लगाकर जानबूझकर एक नई परंपरा शुरू करने की कोशिश की गई, जिसके परिणामस्वरूप सांप्रदायिक तनाव और टकराव की स्थिति पैदा हो गई.’
कुछ दिनों बाद पुलिस ने 24 लोगों के खिलाफ और एफआईआर दर्ज की, जिनमें से 15 नामजद थे, यह दावा करते हुए कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ा था. यह सब तब शुरू हुआ जब आरोप लगे कि 5 मई को रावतपुर में बारावफ़ात के जुलूस के दौरान हिंदुओं से जुड़े धार्मिक पोस्टर फाड़ दिए गए थे.
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, एफआईआर में जिन लोगों के नाम हैं, उनमें जुलूस के आयोजक शराफ़त हुसैन, शबनूर आलम, बाबू अली, मोहम्मद सिराज, फ़ज़ू रहमान, इक़राम अहमद और इक़बाल शामिल हैं.
पुलिस ने अपने काम का बचाव करते हुए कहा कि बैनर उस इलाके में लगाया गया था, जहां से रामनवमी के जुलूस गुज़रते थे.
बरेली में तनाव और विरोध
कुछ हफ़्तों बाद 26 सितंबर को बरेली शहर में पुलिस की कार्रवाई को लेकर तनाव पैदा हो गया. इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के मौलवी मौलाना तौक़ीर रज़ा ख़ान ने एक प्रदर्शन बुलाया था. प्रशासन ने इसकी इजाज़त नहीं दी थी, लेकिन फिर भी यह प्रदर्शन हुआ.
प्रदर्शनकारी एक मैदान की तरफ़ मार्च करने लगे, और जब पुलिस ने उन्हें रोका, तो हिंसा भड़क उठी. प्रदर्शनकारियों पर पुलिस पर पत्थर फेंकने के आरोप लगे. पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया और गिरफ़्तार किए गए लोगों में ख़ान भी शामिल थे. पुलिस ने अशांति फैलाने की साज़िश का आरोप लगाया.
फ्रंटलाइन द्वारा बताए गए आंकड़ों के अनुसार, जिन्हें एसोसिएशन फ़ॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स ने इकट्ठा किया था, कानपुर की घटना और 23 सितंबर के बीच पूरे उत्तर प्रदेश और दूसरे राज्यों में ‘आई लव मोहम्मद’ नारे को लेकर कम से कम 21 एफआईआर दर्ज की गईं, 1,300 से ज़्यादा लोगों पर केस दर्ज हुए और दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया.
नदीम का मामला
मुज़फ़्फ़रनगर के बुढ़ाना थाने में नदीम के ख़िलाफ़ दर्ज एफआईआर इन मामलों के अलावा है, क्योंकि यह 6 अक्टूबर को दर्ज की गई थी. पुलिस ने गिरफ़्तारी की जानकारी देते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ‘बुढ़ाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर अश्लील और भद्दे कमेंट करने के आरोप में एक आरोपी को गिरफ़्तार किया है.’
पुलिस ने यह भी लिखा कि किसी को भी सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और सभी को एक-दूसरे के धर्म का सम्मान करना चाहिए. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि नदीम की पोस्ट में किसी भी धर्म या जाति का ज़िक्र नहीं था.
रंगोली विवाद और ‘फर्जी’ घटनाएं
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (पहले अहमदनगर) में कथित आपत्तिजनक टिप्पणी वाली एक रंगोली को लेकर झड़प हुई. एनडीटीवी ने 29 सितंबर, 2025 को रिपोर्ट किया कि लगभग 30 लोगों को हिरासत में लिया गया. एक एफआईआर दर्ज की गई और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अधिकारी इस बात की जांच करेंगे कि क्या सांप्रदायिक शांति भंग करने की कोई ‘साज़िश’ थी.
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में चार लोगों को मंदिर की दीवारों पर ‘आई लव मोहम्मद’ लिखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया, ताकि संपत्ति विवाद में अपने मुस्लिम पड़ोसियों को झूठा फंसाया जा सके. पुलिस ने कहा कि नारों में वर्तनी की गलतियों के कारण आरोपियों की पहचान हो सकी. हालांकि, बाद में सामने आया था कि पुलिस ने बताया था कि इस घटना के पीछे हिंदू युवकों का हाथ था, जिन्होंने कथित तौर पर ज़मीन विवाद में अपने विरोधियों को झूठा फंसाने के लिए यह हरकत की थी.
