नई दिल्ली: भारतीय पत्रकार आनंद आरके और सुपर्णा शर्मा को डिजिटल निगरानी और साइबर फ्रॉड (धोखाधड़ी) पर उनके काम के लिए प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. सोमवार (4 मई) को घोषित इस पुरस्कार में आनंद और सुपर्णा शर्मा को ‘इलस्ट्रेटेड रिपोर्टिंग और कमेंट्री’ श्रेणी में यह पुरस्कार मिला है.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पुरस्कार ब्लूमबर्ग की नताली ओबिको पियर्सन के साथ साझा किया गया, जिन्होंने ‘ट्रैप्ड’ नामक प्रोजेक्ट पर काम किया है.
पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, यह रिपोर्ट भारत की एक न्यूरोलॉजिस्ट की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी बयां करती है, जिन्हें जालसाजों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ किया था. तस्वीरों और शब्दों के अनूठे संगम से तैयार इस खबर ने डिजिटल निगरानी और साइबर ठगी के बढ़ते वैश्विक खतरे को बेहद प्रभावशाली तरीके से उजागर किया है.
उल्लेखनीय है कि कोलंबिया विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पुलित्जर पुरस्कार पत्रकारिता, साहित्य और संगीत रचना के क्षेत्र में दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मानों में गिना जाता है, जो रिपोर्टिंग और स्टोरी कहने में उत्कृष्टता को मान्यता देता है.
पुलित्जर पुरस्कार की वेबसाइट के अनुसार, मुंबई में रहने वाले आनंद इलस्ट्रेटर और विजुअल आर्टिस्ट हैं. उन्होंने 2021 में इमेज कॉमिक्स द्वारा प्रकाशित ग्राफिक उपन्यास ‘ब्लू इन ग्रीन’ के लिए कलरिस्ट जॉन पीयरसन के साथ ‘बेस्ट पेंटर/मल्टीमीडिया आर्टिस्ट’ का आइजनर पुरस्कार भी जीता था.
सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से स्नातक आनंद ने डार्क हॉर्स कॉमिक्स की ‘ग्रैफिटीज वॉल’, वॉल्ट की ‘रेडियो एपोकैलिप्स’ और डीसी कॉमिक्स की ‘रेजरेक्शन मैन’ जैसी कृतियों का चित्रण किया है.
उन्होंने बूम! स्टूडियोज, 2000 एडी, टाइनी अनियन व इमेज कॉमिक्स जैसे प्रकाशकों के लिए कवर आर्ट बनाया है. उन्होंने हुंडई, भारतीय नौसेना, इमेजिन-एफएक्स मैगजीन व हैवी मेटल मैगजीन जैसे क्लाइंट्स के साथ भी काम किया है.
वहीं, सुपर्णा शर्मा एक स्वतंत्र खोजी पत्रकार हैं, जिन्हें तीन दशकों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने अपराध, संघर्ष, राष्ट्रीय आपदाओं और भ्रष्टाचार सहित कई विषयों पर रिपोर्टिंग की है. 2023 में उन्होंने अल जज़ीरा के लिए दिल्ली में दो बुजुर्गों की मौत पर एक खोजी रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें अरबों डॉलर के बुजुर्ग देखभाल उद्योग में व्याप्त लालच और लापरवाही का पर्दाफाश किया गया था. रिपोर्ट में अधिकारियों द्वारा सच्चाई को दबाने के कथित प्रयासों को भी उजागर किया गया था.
उन्होंने भारत की शीर्ष महिला पहलवानों द्वारा देश के तत्कालीन कुश्ती महासंघ प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने के बाद झेली गई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई और प्रतिष्ठित संस्थानों से स्नातक हुए लोगों द्वारा मतदाताओं और चुनावों में हेरफेर करने में राजनीतिक सलाहकारों की सहायता करने के तरीकों पर भी रिपोर्टिंग की है.
उनका काम अल जज़ीरा, रोलिंग स्टोन इंडिया, बीबीसी अफ्रीका, द इंडियन एक्सप्रेस और फ्रंटलाइन में प्रकाशित हो चुका है.
इससे पहले वे द एशियन एज की रेजिडेंट एडिटर, द टाइम्स ऑफ इंडिया की चीफ सब-एडिटर और द इंडियन एक्सप्रेस की खोजी टीम की वरिष्ठ संवाददाता रह चुकी हैं, साथ ही उन्होंने कई न्यूज़ रूम का नेतृत्व भी किया है.
