मणिपुर: जातीय हिंसा से निपटने में नेतृत्व की नाकामी को लेकर भाजपा प्रवक्ता ने इस्तीफ़ा दिया

मणिपुर भाजपा के प्रवक्ता एलांगबम जॉनसन ने कहा कि 3 मई 2023 से, जब राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़की थी, तब से पार्टी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप काम करने में नाकाम रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की राज्य इकाई पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में है. राज्य इकाई के पास अनुशासनात्मक मामलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार भी नहीं है.

मणिपुर के इंफाल पश्चिम ज़िले के कांगलातोंगबी इलाके में तनाव के बाद 23 अप्रैल 2026 को सुरक्षाकर्मी एक जली हुई मोटरसाइकिल का मुआयना कर रहे हैं. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर में भाजपा के प्रवक्ता एलांगबम जॉनसन ने शुक्रवार (8 मई) को पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. उन्होंने राज्य में चल रहे जातीय संकट से प्रभावी ढंग से निपटने में नेतृत्व की कथित नाकामी पर असंतोष ज़ाहिर किया.

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मीडिया से बात करते हुए जॉनसन ने कहा कि उन्होंने अपने समर्थकों से सलाह-मशविरा करने के बाद यह फ़ैसला लिया है. उन्होंने कहा कि 3 मई 2023 से, जब राज्य में पहली बार जातीय हिंसा भड़की थी, तब से पार्टी लोगों की इच्छाओं के अनुरूप काम करने में नाकाम रही है.

उन्होंने भाजपा की मणिपुर इकाई की इस कथित नाकामी की आलोचना की कि वह राज्य से जुड़े मामलों पर स्वतंत्र रूप से फ़ैसले नहीं ले पा रही है और उन पर निर्णायक कार्रवाई नहीं कर पा रही है.

जॉनसन ने आरोप लगाया कि पार्टी की राज्य इकाई पूरी तरह से केंद्रीय नेतृत्व के नियंत्रण में है. अपने दावे के समर्थन में उन्होंने कहा कि राज्य इकाई के पास अनुशासनात्मक मामलों पर फ़ैसले लेने का अधिकार भी नहीं है.

राजनीति में आने से पहले वह नागरिक समाज संगठन ‘यूनाइटेड कमेटी मणिपुर’ से जुड़े थे. उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनावों में इंफाल घाटी की कीशमथोंग सीट से चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी.

ज्ञात हो कि मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा में अब तक कम से कम 260 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. यह हिंसा सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुई थी और अब लगभग सभी समूह इसमें शामिल हो गए हैं. मेईतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहते हैं, जबकि कुकी पहाड़ी क्षेत्रों में निवास करते हैं. हिंसा शुरू होने के बाद मेईतेई और कुकी अपने-अपने क्षेत्रों में सिमट गए हैं.

हमलों की निंदा

मणिपुर की कई राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने भारत-म्यांमार सीमा पर तांगखुल नगा गांवों पर 7 मई को हुए हमलों की निंदा की है. आरोप है कि ये हमले उग्रवादी संगठन ‘कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा’ के सदस्यों ने किए थे.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस और नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) ने आरोप लगाया कि राज्य के कामजोंग जिले में हुए इन हमलों में कुकी उग्रवादी शामिल थे. दोनों दलों ने सरकार से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की.

मणिपुर की सभी नगा जनजातियों के शीर्ष संगठन यूनाइटेड नगा काउंसिल ने भी सीमा पार से हुए इन हमलों की निंदा की और म्यांमार से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा पर तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों की निष्क्रियता की आलोचना की.

‘सुरक्षा बलों ने तुरंत कार्रवाई की’

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए अर्धसैनिक बल असम राइफल्स ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के निकट ज़ेड. चोरो इलाके में भारी गोलीबारी और विस्फोटों की सूचना मिलने के तुरंत बाद उसके जवानों ने कार्रवाई की.

असम राइफल्स ने कहा कि अस्थिर और तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद उसके जवान नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे.

रक्षा मंत्रालय की ओर से शुक्रवार को जारी बयान में कहा गया, ‘अभियान के दौरान कई बचाव दलों को बिना किसी देरी के तैनात किया गया. हिंसा से प्रभावित 10 घरों को सुरक्षित किया गया और नागरिकों को वहां से निकाला गया. महिलाओं और बच्चों सहित 15 ग्रामीणों को सुरक्षित बचाया गया तथा अलोयो स्थित असम राइफल्स शिविर में मानवीय सहायता प्रदान की गई.’

बयान में आगे कहा गया कि असम राइफल्स ने स्थिति को और बिगड़ने से रोकने तथा स्थिरता बहाल करने के लिए इलाके में त्वरित तलाशी अभियान चलाया.

इस दौरान तलाशी अभियान में एनएससीएन (आईएम) के एक संदिग्ध सशस्त्र सदस्य को एक एके-47 राइफल, मैगजीन और गोला-बारूद के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसे बाद में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को सौंप दिया गया.

बयान में कहा गया, ‘तनाव बने रहने के बावजूद असम राइफल्स ने कामजोंग जिले के अन्य संवेदनशील इलाकों में लगातार गश्त जारी रखी, ताकि निवासियों की शांति और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके.’

असम राइफल्स ने भारत-म्यांमार सीमा पर भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और शांति बनाए रखने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.