नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में नव निर्वाचित भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने मवेशियों के वध के संबंध में बुधवार (14 मई) को ‘मारने के लिए उपयुक्त’ (fit-for-slaughter) प्रमाण पत्र अनिवार्य कर दिया है.
राज्य सरकार द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है कि बिना इस अनिवार्य प्रमाण पत्र के किसी भी सांड, बैल, गाय, बछड़े, भैंस, भैंस के बछड़े और बधिया भैंसों का वध पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा. इसके अलावा सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अब सार्वजनिक रूप से पशु वध की अनुमति नहीं होगी. केवल नगरपालिका की ओर से तय या अधिकृत वधशाला में ही पशुओं का वध किया जा सकेगा.
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, इस नोटिस के कई प्रावधान पहले से ही लागू थे. खास बात यह है कि इस नोटिस में धार्मिक, औषधीय या शोध के उद्देश्यों से की जाने वाली कुर्बानी के लिए किसी छूट का ज़िक्र नहीं किया गया है.
उल्लेखनीय है कि यह आदेश 26 मई को मनाए जाने वाले ईद-उल-अज़हा या बकरीद से कुछ ही दिन पहले आया है. ईद के जश्न का एक अहम हिस्सा बकरी, भेड़ या मेमने की कुर्बानी देना है.
गृह और पर्वतीय मामलों के विभाग द्वारा जारी नोटिस में कहा गया है, ‘कोई भी व्यक्ति किसी भी जानवर, जिसमें बैल, बछड़ा, गाय, बछिया, नर और मादा भैंसें, भैंस के बछड़े और बधिया भैंसें शामिल हैं, का वध तब तक नहीं करेगा, जब तक कि उसे इस संबंध में यह प्रमाण पत्र न मिल जाए कि वह जानवर वध के लिए उपयुक्त है.’
नोटिस के अनुसार, प्रमाण पत्र नगर पालिका अध्यक्ष या पंचायत के सभापति द्वारा एक सरकारी पशु चिकित्सक के साथ मिलकर केवल तभी जारी किया जाएगा जब दोनों लिखित रूप में इस बात पर सहमत हों कि पशु की उम्र 14 साल से ज्यादा है और वह काम या प्रजनन के लायक नहीं रहा है या फिर किसी पुरानी बीमारी, चोट, शरीर की खराबी या ठीक न होने वाली बीमारी के कारण हमेशा के लिए अक्षम हो गया है.
इस प्रमाण पत्र का आवेदक आवेदन की अस्वीकृति की सूचना मिलने के 15 दिनों के भीतर राज्य सरकार में अपील कर सकता है.
इसके अलावा आवश्यक प्रमाण पत्रों के साथ भी खुले में जानवरों की हत्या करना ‘सख्ती से प्रतिबंधित’ है. नोटिस में कहा गया है कि जानवर को किसी नगर पालिका वधशाला या स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित किसी अन्य स्थान पर ही ले जाना अनिवार्य है.
नोटिस में आगे कहा गया है, ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम 1950 के प्रावधानों को लागू करने के लिए नगर पालिका के अध्यक्ष, पंचायत समिति के सभापति या सरकारी पशु चिकित्सक द्वारा अधिकृत किसी भी व्यक्ति द्वारा किसी भी परिसर के निरीक्षण का कोई भी व्यक्ति विरोध नहीं करेगा.’
अखबार ने नोटिस का हवाला देते हुए बताया कि इन प्रावधानों का उल्लंघन करते पाए जाने वालों को छह महीने तक की कैद, 1,000 रुपये तक का जुर्माना, या दोनों का सामना करना पड़ सकता है.
