पाकिस्तान से बातचीत पर आरएसएस के रुख़ को पूर्व सेना प्रमुख नरवणे, फ़ारूक़ अब्दुल्ला का समर्थन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के महासचिव दत्तात्रेय होसबले ने कहा था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध तोड़ने के लिए लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है और बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए. पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज नरवणे, जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फ़ारूक़ अब्दुल्ला और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने इस बयान का समर्थन किया है.

जनरल नरवणे और फारूक अब्दुल्ला. (फोटो साभार: सोशल मीडिया/एक्स)

नई दिल्ली: पूर्व सेना प्रमुख जनरल (सेवानिवृत्त) मनोज नरवणे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के महासचिव दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान के साथ बातचीत को लेकर दिए गए बयान का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बना सकती है.

समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए जनरल नरवणे ने कहा, ‘सीमा के दोनों ओर आम लोग रहते हैं, जिनकी रोटी, कपड़ा और मकान की समस्याएं एक जैसी हैं. आम आदमी का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है. जब दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती होगी, तो दोनों देशों के बीच भी दोस्ती होगी.’

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘यह सही बात है. लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है.’

उल्लेखनीय है कि दत्तात्रेय होसबले ने बीते मंगलवार (12 मई) को एक साक्षात्कार में कहा था कि पाकिस्तान के साथ गतिरोध तोड़ने के लिए लोगों के बीच संपर्क महत्वपूर्ण है और बातचीत के लिए हमेशा एक रास्ता खुला रहना चाहिए.

होसबले ने यह भी कहा था कि पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व ने भारत का विश्वास खो दिया है और अब नागरिक समाज के नेतृत्व करने का समय आ गया है.

इसका समर्थन करते हुए जनरल नरवणे ने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच जुड़ाव होना चाहिए, चाहे वह ‘ट्रैक टू’ (गैर-सरकारी, अनौपचारिक और नागरिकों/विशेषज्ञों जैसे शिक्षाविदों, सेवानिवृत्त राजनयिकों, या गैर-सरकारी संगठनों के बीच बातचीत की एक प्रक्रिया ) कूटनीति के माध्यम से हो या किसी खेल आयोजन के माध्यम से.

उन्होंने कहा, ‘हमारे लोगों को यह भी पता होना चाहिए कि सीमा के पार रहने वाले लोग कट्टर दुश्मन नहीं हैं.’

उन्होंने आगे कहा, ‘विवादों को बातचीत के माध्यम से हल किया जाना चाहिए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम सैन्य बल का प्रयोग नहीं कर सकते. भारत एक ऐसा देश है जो शांति की भाषा बोलता है, लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग करने में संकोच नहीं करेगा.’

फारूक अब्दुल्ला बोले- युद्ध कोई विकल्प नहीं

वहीं, इस संबंध में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के अध्यक्ष और जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी गुरुवार (14 मई) को आरएसएस के पदाधिकारी दत्तात्रेय होसबले की बातों का समर्थन करते हुए कहा कि युद्ध कोई विकल्प नहीं था.

जम्मू-कश्मीर के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके अब्दुल्ला ने श्रीनगर में संवाददाताओं से बात करते हुए पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे द्वारा होसबले का समर्थन करने का भी स्वागत किया.

उन्होंने कहा कि यह एक बहुत बड़ा कदम है कि आरएसएस नेता ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ बातचीत होनी चाहिए और पूर्व सेना प्रमुख ने भी इसका समर्थन किया है. मुझे खुशी है कि अब कोई सोच रहा है कि युद्ध कोई विकल्प नहीं है.

उधर, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमुख महबूबा मुफ़्ती ने भी आरएसएस नेता के बयान का समर्थन करते हुए इसे ‘स्वागत योग्य’ बताया है.

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधारने और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए पाकिस्तान के साथ संवाद की खिड़की हमेशा खुली रखनी चाहिए.

उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बयान का हवाला देते हुए कहा, ‘वाजपेयी जी ने कहा था कि आप अपने दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं बदल सकते.’

उन्होंने जोर दिया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत बंद करना किसी समस्या का हल नहीं है.