नई दिल्ली: चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश के विधानसभा चुनाव ख़त्म होने के 16 दिन बाद पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में शुक्रवार (15 मई) को तीन-तीन रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है. वहीं, सीएनजी भी अब दो रुपये प्रति किलो महंगी हो गई है.
मालूम हो कि यह वृद्धि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के चलते वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमतों के बीच की गई है. हालांकि, केंद्र सरकार लगातार यह कहती रही है कि ईरान संघर्ष और होर्मुज संकट के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने के बावजूद देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है और पेट्रोल, डीज़ल या एलपीजी की राशनिंग की कोई योजना नहीं है.
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, तेल कंपनियों ने वैश्विक ऊर्जा क़ीमतों में आई तेज़ी का बोझ अब उपभोक्ताओं पर डालना शुरू कर दिया है. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये से बढ़ाकर 97.77 रुपये प्रति लीटर कर दी गई. वहीं डीज़ल अब 87.67 रुपये के मुक़ाबले 90.67 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.
समाचार एजेंसी पीटीआई को तेल उद्योग से जुड़े सूत्रों ने बताया, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई में पेट्रोल की खुदरा क़ीमत अब क्रमशः 106.68 रुपये, 108.74 रुपये और 103.67 रुपये प्रति लीटर होगी. जबकि डीज़ल मुंबई में 93.14 रुपये, कोलकाता में 95.13 रुपये और चेन्नई में 95.25 रुपये प्रति लीटर मिलेगा.
ज्ञात हो कि राज्यों में ईंधन की दरें वैल्यू-एडेड टैक्स (वैट) के ढांचे के आधार पर अलग-अलग होती हैं.
उल्लेखनीय है कि मई के पहले ही दिन सरकार ने कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम में रिकॉर्ड बढ़ोतरी करते हुए इसे लगभग 40 प्रतिशत से अधिक बढ़ा दिया था. होटलों और रेस्तरां में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 19 किलोग्राम के कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. यह वृद्धि पांच राज्यों के चुनाव खत्म होने के सिर्फ दो दिन बाद ही की गई थी.
हालांकि, सरकार अब तक पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोतरी से बचती रही है और ईंधन की क़ीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर रही हैं. सिर्फ चुनावी साल मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पेट्रोल और डीज़ल दोनों की क़ीमतों में दो रुपये प्रति लीटर की कटौती की गई थी.
सरकारी कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने अप्रैल 2022 में दैनिक मूल्य संशोधन प्रणाली को बंद कर दिया था.
इस साल फरवरी तक भारत कच्चे तेल का आयात लगभग 69 डॉलर प्रति बैरल की औसत क़ीमत पर किया था जो बाद के महीनों में बढ़कर औसतन क़ीमत 113-114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई.
हाल की सरकारी बैठकों में समीक्षा किए गए आधिकारिक आकलनों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची क़ीमतों और खुदरा दरों में बदलाव न होने के कारण तेल कंपनियों को प्रतिदिन लगभग 1,000 करोड़ से 1,200 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था.
भारत अपनी कच्चे तेल की ज़रूरतों का लगभग 90 प्रतिशत आयात करता है. ऐसे में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बना रहता है.
कच्चे तेल की वैश्विक कीमतें, जो पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने से पहले 70-72 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के दायरे में थीं, तनाव के चरम पर पहुंचने पर 120 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई थी. तब से कीमतों में थोड़ी नरमी आई है, लेकिन वे अभी भी 104 से 110 डॉलर प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं.
कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से ईंधन बेचने वालों का नुकसान काफ़ी बढ़ गया है. उद्योग के सूत्रों ने बताया कि शुक्रवार को हुई बढ़ोतरी से पहले, तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 14 रुपये प्रति लीटर, डीज़ल पर 42 रुपये प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर पर 674 रुपये का नुकसान हो रहा था.
इस हफ़्ते की शुरुआत में तेल मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा था कि सरकारी रिटेलरों को रोज़ाना लगभग 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि तिमाही नुकसान पूरे साल में कमाए गए मुनाफ़े को खत्म कर सकता है. उन्होंने कुल नुकसान का अनुमान लगभग 1 लाख करोड़ रुपये लगाया था.
उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने 27 मार्च को पेट्रोल और डीज़ल पर एक्साइज़ ड्यूटी में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती की थी.
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से ईंधन बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम अपनाने और सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की अपील की थी.
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में तनाव शुरू होने के बाद से भारतीय मुद्रा ‘रुपया’ एशिया की सबसे ख़राब प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में शामिल रहा है. युद्ध शुरू होने के समय डॉलर के मुक़ाबले रुपया लगभग 91 था, जो अब गिरकर ऐतिहासिक स्तर 95 प्रति डॉलर से नीचे पहुंच गया है.
विपक्ष का सरकार पर हमला
विपक्ष ने पेट्रोल और डीज़ल के साथ सीएनजी के दामों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पहले भी चेतावनी दी थी कि 29 अप्रैल को विधानसभा चुनावों के समाप्त होने के बाद पेट्रोल डीज़ल के दाम बढ़ जाएंगे.
उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, ‘गलती मोदी सरकार की, कीमत जनता चुकाएगी.’
गलती मोदी सरकार की,
कीमत जनता चुकाएगी।₹3 का झटका आ चुका,
बाकी वसूली क़िस्तों में की जाएगी।— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) May 15, 2026
इस संबंध में कांग्रेस ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ‘महंगाई मैन’ मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया. पेट्रोल और डीज़ल 3-3 रुपये महंगा कर दिया गया. वहीं, सीएनजी के दाम भी 2 रुपये बढ़ा दिए गए. चुनाव ख़त्म – मोदी की वसूली शुरू.’
‘महंगाई मैन’ मोदी ने आज फिर जनता पर हंटर चलाया.
• पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपये महंगा कर दिया गया
• वहीं, CNG के दाम भी 2 रुपये बढ़ा दिए गएचुनाव खत्म – मोदी की वसूली शुरू
— Congress (@INCIndia) May 15, 2026
कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर कहा कि सालों तक जब अंतरराष्ट्रीय तेल क़ीमतें कम थीं या गिर रही थीं, तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही कि उसका लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए और गैस, पेट्रोल और डीज़ल की घरेलू क़ीमतों में कमी की जाए. लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उपभोक्ताओं को लूटा गया.
उन्होंने आगे कहा, ‘अब जबकि प्रधानमंत्री के करीबी दोस्तों-अमेरिका और इसराइल-द्वारा पश्चिम एशिया में छेड़े गए युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल क़ीमतें बढ़ रही हैं और विधानसभा चुनाव भी समाप्त हो चुके हैं, मोदी सरकार ने पहले कॉमर्शियल एलपीजी की क़ीमतें बढ़ाने के बाद अब पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में भी बढ़ोतरी कर दी है.’
वर्षों तक जब अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतें कम थीं या गिर रही थीं, तब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगातार यह मांग करती रही कि उसका लाभ भारतीय उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए और गैस, पेट्रोल तथा डीजल की घरेलू कीमतों में कमी की जाए। लेकिन ऐसा नहीं हुआ और उपभोक्ताओं को लूटा गया।
अब जबकि…
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) May 15, 2026
जयराम रमेश के अनुसार, इससे महंगाई और बढ़ना तय है, जो अब इस वित्त वर्ष में करीब 6% तक पहुंचने का अनुमान है और विकास दर के अनुमान भी काफ़ी कम हो जाएंगे.
उधर, टीएमसी के राज्यसभा नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने पूछा कि क्या पश्चिम बंगाल की सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर वैट कम करेगी?
उन्होंने एक्स पर पोस्ट किया, ‘पहले आपका वोट लूटते हैं, फिर वहीं चोट पहुंचाते हैं जहां सबसे ज़्यादा दर्द होता है. बेहद अनुमानित. डीज़ल और पेट्रोल की क़ीमतें बढ़ा दी गईं. क्या अब बंगाल सरकार पेट्रोल और डीज़ल पर वैट कम करेगी, जबकि अब दिल्ली के नियंत्रण वाली सरकार है जिसे केंद्र की तरफ़ से फ़ंड रोके जाने की चिंता नहीं करनी पड़ेगी?’
First they loot your vote, then they kick you where it hurts. Pathetically predictable. Diesel and petrol prices hiked.
Will Bengal Govt reduce VAT on petrol & diesel now that there’s a Delhi-controlled government which doesn’t have to worry about funds being blocked by Centre?— Derek O’Brien | ডেরেক ও’ব্রায়েন (@derekobrienmp) May 15, 2026
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री मोदी पर अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में नाकाम होने और इसे ठीक से संभाल न पाने के आरोप लगाए.
उन्होंने कहा, ‘जैसे कोविड के दौरान कहा गया था, घंटी बजाओ, दीया जलाओ वगैरह. मैं अपने घर में तेल का इस्तेमाल कैसे बंद करूं? मैं गाड़ी चलाना कैसे रोक दूं?’
विपक्षी नेताओं ने केंद्र सरकार पर तथ्य छिपाने और आम लोगों पर बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार समर्थक नेताओं ने वैश्विक संकट और युद्ध की स्थिति को इसकी वजह बताया है.
पूर्व पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने एक इंटरव्यू में सरकार की आलोचना करते हुए कहा, ‘उन्होंने साफ़ तस्वीर सामने नहीं रखी और तथ्यों को छुपाया.’ उन्होंने पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में बढ़ोतरी को लेकर सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठाए.
समाजवादी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज़ करते हुए एक्स पर लिखा, ‘आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है.’
आगे बढ़ना है तो साइकिल ही विकल्प है। pic.twitter.com/FDDpykbGrr
— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) May 15, 2026
गौरतलब है कि बीते मार्च में घरेलू एलपीजी की क़ीमतें भी 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाई गई थीं, हालांकि अधिकारियों ने कहना है कि कीमतें अभी भी असल लागत से कम हैं.
उद्योग के सूत्रों ने शुक्रवार की इस बढ़ोतरी को एक सोचा-समझा कदम बताया, जिसका मकसद तेल कंपनियों पर पड़ रहे दबाव को कुछ हद तक कम करना था, ताकि महंगाई का कोई बड़ा झटका न लगे.
हालांकि, अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी कि ईंधन की कीमतें बढ़ने से ट्रांसपोर्ट, माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स की लागत भी बढ़ेगी, जिसका महंगाई पर व्यापक असर पड़ेगा.
भारत की खुदरा महंगाई दर (रिटेल इन्फ्लेशन), जिसे कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) से मापा जाता है, मार्च के 3.40 प्रतिशत से बढ़कर अप्रैल 2026 में 3.48 प्रतिशत हो गई थी; वहीं थोक महंगाई दर (होलसेल इन्फ्लेशन) 42 महीनों के उच्चतम स्तर 8.3 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिसकी मुख्य वजह ईंधन और ऊर्जा की बढ़ती लागत है.
