उन्नाव रेप: सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर की सज़ा निलंबित करने वाले हाईकोर्ट के आदेश को रद्द किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते साल दिसंबर में उन्नाव रेप मामले में भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी थी. इस फैसले के बाद व्यापक सार्वजनिक आक्रोश देखने को मिला था, जिसके बाद सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं. अब शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले को रद्द करते हुए मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया है.

कुलदीप सिंह सेंगर और दिल्ली में सर्वाइवर के पक्ष में हुआ एक प्रदर्शन. (फोटो साभार: फेसबुक/पीटीआई)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (15 मई) को उन्नाव बलात्कार मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सज़ा को निलंबित करने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को नए सिरे से सुनवाई के लिए वापस दिल्ली हाईकोर्ट भेज दिया है.

लाइव लॉ की ख़बर के मुताबिक, भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट से कहा कि या तो सेंगर की दोषसिद्धि के ख़िलाफ़ दायर अपील पर तीन महीने के भीतर फैसला किया जाए या फिर सज़ा निलंबन की अर्जी पर नया आदेश पारित किया जाए.

मालूम हो कि दिल्ली हाईकोर्ट ने बीते साल 23 दिसंबर को कुलदीप सिंह सेंगर की सज़ा निलंबित करते हुए उन्हें ज़मानत दे दी थी. इस फैसले के बाद व्यापक सार्वजनिक आक्रोश देखने को मिला था. इस मामले की पीड़िता, उनकी मां, कई सामाजिक कार्यकर्ता और नागरिक समाज के लोग लगातार हाईकोर्ट के फैसले का विरोध कर रहे थे, जिसके बाद सीबीआई सुप्रीम कोर्ट पहुंची थीं.

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने 29 दिसंबर 2025 को सीबीआई, अधिवक्ता अंजले पटेल और पूजा शिल्पकार द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी.

इस मामले में सेंगर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन. हरिहरन ने दलील दी कि यह साबित करने के पर्याप्त साक्ष्य हैं कि कथित घटना के समय पीड़िता नाबालिग नहीं थी. वहीं, सीबीआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस तर्क का विरोध किया.

उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने यह मानकर गलती की कि विधायक पॉक्सो एक्ट के तहत ‘लोक सेवक’ की श्रेणी में नहीं आते. जस्टिस बागची ने भी इस मुद्दे पर सॉलिसिटर जनरल से सहमति जताते हुए कहा, ‘हम हाईकोर्ट के इस अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण का समर्थन नहीं कर रहे हैं.’

उन्होंने कहा कि पॉक्सो कानून बच्चों की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाया गया है और किसी प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा अपराध को गंभीरता से देखा जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट को मामले पर व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए. सुनवाई के दौरान सीजेआई ने टिप्पणी की कि चूंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, इसलिए हाईकोर्ट मुख्य अपील की सुनवाई में संकोच कर सकता था.

सीबीआई ने अपनी याचिका में कहा था कि हाईकोर्ट का फैसला पॉक्सो एक्ट की संरक्षणात्मक भावना को कमजोर करता है. एजेंसी ने तर्क दिया कि विधायक जैसे प्रभावशाली व्यक्ति को ‘लोक सेवक’ की परिभाषा से बाहर रखना कानून के उद्देश्य के विपरीत है.

सीबीआई ने यह भी कहा कि लंबे समय तक जेल में रहना मात्र उम्रकैद की सज़ा निलंबित करने का आधार नहीं हो सकता, विशेषकर तब जब मामला नाबालिग से रेप जैसे जघन्य अपराध का हो.

सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि सेंगर की रिहाई से पीड़िता और गवाहों की सुरक्षा को खतरा हो सकता है तथा इससे आपराधिक न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा कमजोर हो जाता है.

उल्लेखनीय है कि उक्त मामला जून, 2017 का है, जब पीड़िता के साथ यूपी के बांगरमऊ से पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर ने कथित तौर पर बलात्कार किया था. उस समय पीड़िता की उम्र 17 साल थी.

बांगरमऊ से चार बार भाजपा के विधायक रह चुके सेंगर को अगस्त 2019 में पार्टी से तब निकाल दिया गया जब पीड़िता और उसका परिवार सड़क हादसे का शिकार हो गया. वह 28 जुलाई 2019 को रायबरेली जिले में हुए सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गई थी. पीड़िता की कार को एक तेज रफ्तार ट्रक ने टक्कर मार दिया था, जिसमें उनके दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी और उनका वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे.

इसके बाद 3 अप्रैल, 2018 को उनके पिता को कथित तौर पर अवैध हथियार मामले में फंसाया गया और गिरफ्तार कर लिया गया. कुछ दिनों बाद 29 अप्रैल, 2018 को न्यायिक हिरासत में उनकी मौत हो गई.

इसके बाद चार मार्च, 2020 को सेंगर, उनके भाई एवं पांच अन्य को बलात्कार पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में मौत के मामले में भी दोषी ठहराया गया था और उन्हें दस साल की कैद की सजा सुनाई गई थी.

उच्चतम न्यायालय ने एक अगस्त, 2019 को इस मामले की सुनवाई उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दी थी. 20 दिसंबर, 2019 को सेंगर को 2017 में नाबालिग से बलात्कार करने के एक अलग मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.