नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार राज्य के विभिन्न विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाले लगभग 49 लाख छात्रों के लिए अनिवार्य ड्रेस कोड लागू करने जा रही है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में एक वर्ष से भी कम समय बचा है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने गुरुवार (21 मई) को घोषणा की कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ड्रेस कोड अनिवार्य किया जाएगा. यह निर्णय राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के निर्देशों के तहत लिया जा रहा है.
विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे युवाओं को नियंत्रित करने की सोची-समझी कोशिश बताया है.
इससे पहले बुधवार (20 मई) को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा था कि सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में छात्रों के लिए यूनिफॉर्म लागू की जानी चाहिए. उन्होंने यह टिप्पणी बलिया स्थित जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक के दौरान जन भवन में की थी.
हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि छात्रों के लिए एक निर्धारित यूनिफॉर्म होगी या केवल सामान्य ड्रेस कोड लागू किया जाएगा, लेकिन उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि इस कदम से छात्रों में ‘समानता और अनुशासन की भावना’ विकसित होगी.
उन्होंने कहा कि छात्र समुदाय, जो एक समरूप समूह होता है, उसमें किसी भी प्रकार की सामाजिक ऊंच-नीच या भेदभाव दिखाई नहीं देना चाहिए. लेकिन कई बार पहनावे के ज़रिए सामाजिक और आर्थिक असमानताएं साफ नज़र आने लगती हैं. इसका नतीजा यह होता है कि कुछ छात्रों में हीन भावना पैदा हो जाती है, जबकि दूसरों में श्रेष्ठता की भावना पनपने लगती है.
उन्होंने कहा, ‘ड्रेस कोड लागू होने से ऐसी परिस्थितियों पर प्रभावी रूप से रोक लगेगी और सभी छात्र समान वातावरण में अपनी पढ़ाई कर सकेंगे.’
लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रोफेसर रूपरेखा वर्मा जैसी वरिष्ठ शिक्षाविदों ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को यूनिफॉर्म लागू करने के बजाय अन्य गंभीर मुद्दों पर अधिक ध्यान देना चाहिए, जैसे शिक्षकों के खाली पद, नियमित कक्षाओं का संचालन, छात्रों की घटती संख्या, शोध कार्य की गुणवत्ता में सुधार और छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना.
वर्मा ने अखबार से कहा, ‘राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय को समझना चाहिए कि स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा में अंतर होता है. स्कूल के बच्चों के लिए यूनिफॉर्म ठीक है, लेकिन वयस्क छात्रों को किसी दायरे में नहीं बांधना चाहिए. ड्रेस कोड में कोई बुराई नहीं है, लेकिन सत्ता में बैठे लोगों को इससे कहीं बड़े मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए.’
विपक्ष ने इस घोषणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि दुनिया के अधिकांश विश्वविद्यालय सख्त यूनिफॉर्म नीति लागू नहीं करते हैं.
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अब्दुल हाफिज गांधी ने कहा, ‘यूनिवर्सिटी ऐसी जगहें हैं जहां आलोचनात्मक सोच, बौद्धिक आज़ादी और व्यक्तित्व का विकास होता है. हालांकि, एक जैसे ड्रेस कोड के पीछे का मकसद शायद समानता और अनुशासन को बढ़ावा देना हो, लेकिन असली समानता एक जैसे कपड़े पहनने से नहीं, बल्कि सबको बराबर मौके और अच्छी शिक्षा मिलने से आती है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘दुनिया के अधिकांश विश्वविद्यालयों में, कुछ खास प्रोफ़ेशनल कोर्स को छोड़कर, यूनिफ़ॉर्म को लेकर कोई सख़्त नियम नहीं होते. यूनिवर्सिटी के छात्र बालिग होते हैं, इसलिए उन्हें गरिमा और अनुशासन की सीमाओं के अंदर रहते हुए, अपनी बात कहने की उचित आज़ादी मिलनी चाहिए.’
