नई दिल्ली: असम के सोनितपुर जिले में शुक्रवार (22 मई) को मुस्लिम समुदाय के दो लोगों की कथित रूप से भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. उन पर मवेशी चोरी करने का संदेह था.
सोनितपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बरुण पुरकायस्थ ने स्क्रॉल को बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है, लेकिन अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. पुलिस अधिकारी ने पुष्टि की कि ‘पीड़ित मोरीगांव जिले के अल्पसंख्यक समुदाय से थे.’
यह घटना भालुकपुंग क्षेत्र में हुई, जहां ग्रामीणों ने कथित रूप से तीन गायों को एक मिनी ट्रक में ले जा रहे तीन लोगों को रोक लिया.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीणों को शक था कि वे मवेशी चोरी कर भागने की कोशिश कर रहे थे. पुरकायस्थ ने बताया कि इसके बाद भीड़ ने उनकी पिटाई की.
पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही दो लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया.
गुरुवार को मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा ने कहा था कि असम में मवेशी तस्करी के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है.
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर बताया कि जनवरी से अब तक राज्य में 850 से अधिक कथित मवेशी चोरों को गिरफ्तार किया गया है और 2,980 किलोग्राम से अधिक गोमांस जब्त किया गया है.
शर्मा ने कहा, ‘अगले सप्ताह आने वाले त्योहार को देखते हुए हम पूरी तरह सतर्क बने हुए हैं.’ यह बयान संभवतः 27 मई को पड़ने वाली बकरीद के संदर्भ में था.
बकरीद, जिसे ईद-उल-अजहा भी कहा जाता है, मुस्लिम समुदाय का एक प्रमुख त्योहार है जो बलिदान की भावना की याद में मनाया जाता है. परंपरागत रूप से इस अवसर पर बकरों की कुर्बानी दी जाती है.
मणिपुर: मुख्यमंत्री ने लोगों से बातचीत के लिए आगे आने और बंद-हड़ताल का सहारा न लेने की अपील की
हिंसाग्रस्त मणिपुर में चल रहे बंधक संकट को लेकर कुकी-नगा समुदायों में बढ़ते तनाव के बीच मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने शुक्रवार (22 मई) को राज्य के लोगों से बातचीत के लिए आगे आने और बंद या नाकेबंदी का सहारा न लेने की अपील की.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, सिंह ने कहा, ‘सरकार के प्रति गुस्से में बंद और नाकेबंदी लागू करने से केवल कठिनाइयां बढ़ती हैं, खासकर दिहाड़ी मजदूरों के लिए.’
उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं दो बार जिरीबाम गया हूं. पहली बार हेलीकॉप्टर से और दूसरी बार सड़क मार्ग से. इस दौरान कुकी, पैते, हमार और मेईतेई समुदायों के लोग जमीनी स्तर पर एक साथ एकत्र हुए और आपस में बातचीत की. सभी के संबंध सौहार्दपूर्ण हैं.’
उन्होंने कहा, ‘जिरीबाम से लौटने के अगले दिन बिष्णुपुर जिले के त्रोंग्लाओबी में बम हमले में दो छोटे बच्चों की मौत हो गई, जिससे हम सभी को गहरा दुख पहुंचा. इस घटना के कारण बंद और हड़तालों से राज्य की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई.’
सिंह ने अपील करते हुए कहा, ‘जब भी सरकार के प्रति कोई नाराज़गी या असंतोष हो, लोग आपसी समझ बनाने के लिए बातचीत का रास्ता अपनाएं, क्योंकि बंद और हड़तालों से विशेष रूप से दिहाड़ी मजदूरों के परिवारों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.’
उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार मणिपुर के लोगों के कल्याण और प्रगति के लिए सड़क संपर्क सुधारने और गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना विकसित करने के अपने संकल्प पर दृढ़ है.’
कुकी-जो परिषद ने शांति की अपील की, मणिपुर में सभी बंधकों की वापसी की मांग की
मणिपुर में बढ़ते तनाव के बीच कुकी-जो परिषद (केजेडसी) ने शुक्रवार (22 मई) को शांति की अपील की. परिषद ने सभी सशस्त्र समूहों से हिंसा से दूर रहने का आग्रह किया और ‘जीवित या मृत’ सभी बंधकों को तुरंत प्रशासन और उनके परिवारों को सौंपने की मांग की.
कुकी-जो समुदायों की शीर्ष संस्था ने सरकार से निष्पक्ष कार्रवाई करने और आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी अपील की.
13 मई को दो अलग-अलग स्थानों पर हुए दोहरे हमले में कांगपोकपी जिले में तीन चर्च नेताओं और नोनी जिले में एक नगा व्यक्ति की मौत हो गई थी. कुकी और नगा संगठनों का कहना है कि 48 लोगों (28 कुकी और 20 नगा) को बंधक बनाया गया है.

मणिपुर के गृह मंत्री गोविंदास कोंथौजम ने कहा कि दोनों समुदायों के 38 से अधिक लोग अब भी बंधक बनाए गए हैं.
14 मई को यूनाइटेड नगा काउंसिल ने मणिपुर सरकार को अल्टीमेटम जारी कर बंधकों की तत्काल रिहाई की मांग की थी. इसके एक दिन बाद कुकी और नगा समुदायों के 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया गया. हालांकि, अब भी छह नगा बंधक, जिनमें दो पादरी शामिल हैं, लापता हैं.
यह बयान शुक्रवार को उस घोषणा के तहत जारी किया गया, जिसे गुरुवार को मणिपुर के चूड़ाचांदपुर जिले के तुईबोंग स्थित कुकी इनपी चूड़ाचांदपुर (केआईसी) हॉल में आयोजित नेताओं की परामर्श बैठक में अपनाया गया था.
बैठक में विभिन्न जनजातीय नेताओं, मुखिया संघों, चर्च, परोपकारी समूहों, विधायकों और ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ (एसओओ) समूहों के नेताओं ने हिस्सा लिया. बैठक में सर्वसम्मति से शांति, आपसी समझ और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की दिशा में काम करने का संकल्प लिया गया.
बयान में कहा गया, ‘मानवता, न्याय और शांति के हित में हम सभी संबंधित और जिम्मेदार पक्षों से गंभीर आग्रह करते हैं कि सभी बंधकों को, चाहे वे जीवित हों या मृत, बिना देरी के संबंधित अधिकारियों और परिवारों को सौंप दिया जाए.’
कुकी-जो परिषद ने सरकार और सुरक्षा बलों से भी निष्पक्ष तरीके से कार्य करने, सभी नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और सामान्य स्थिति, विश्वास तथा जन-आस्था बहाल करने की दिशा में ईमानदारी से प्रयास करने की अपील की.
बयान में कहा गया, ‘इस संवेदनशील और गंभीर समय में हमारा दृढ़ विश्वास है कि हिंसा और टकराव के बजाय संवाद, आपसी सम्मान और मेल-मिलाप को प्राथमिकता मिलनी चाहिए.’
परिषद ने यह भी कहा कि स्थायी शांति केवल समझ, सहयोग और सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से ही संभव है.
बंधक संकट मणिपुर में जारी कई संकटों की कड़ी में ताजा घटना है, जहां हजारों सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बावजूद जातीय हिंसा रुक-रुक कर जारी है. मई 2023 में जातीय संघर्ष शुरू होने के बाद से राज्य के मेईतेई और कुकी-जो समुदायों ने एक-दूसरे के प्रभाव वाले इलाकों से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली है. इस हिंसा में अब तक कम-से-कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.
अरुणाचल: सुप्रीम कोर्ट की जांच आदेश के बाद मुख्यमंत्री खांडू का पद पर बने रहना न्याय का मज़ाक -कांग्रेस
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि भ्रष्टाचार के आरोपों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बावजूद पेमा खांडू को पद से क्यों नहीं हटाया गया.
मंगलवार (19 मई) को सोशल मीडिया प्लेफार्म एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि खांडू का मुख्यमंत्री पद पर बने रहना सुप्रीम कोर्ट के आदेश का ‘घोर मज़ाक’ है.

रमेश ने कहा कि 6 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट की तीन-न्यायाधीशों वाली पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) को प्रारंभिक जांच शुरू करने का निर्देश दिया था. आरोप यह है कि जनवरी 2015 से दिसंबर 2025 तक के 10 वर्षों में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़ी कंपनियों को 1,270 करोड़ रुपये के ठेके दिए गए, जिससे हितों के टकराव को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए.
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा, ‘यह किसी निचली अदालत या हाईकोर्ट का आदेश नहीं है. यह सुप्रीम कोर्ट का आदेश है. फिर भी मुख्यमंत्री पद पर बने हुए हैं. वह लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री भी हैं और उन्हीं के नियंत्रण में वे फाइलें हैं जिनकी सीबीआई को जांच के लिए आवश्यकता होगी.
उन्होंने कहा, ‘जो व्यक्ति कभी कहता था ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’, वह अब चुप क्यों है और अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफा क्यों नहीं मांगा गया? यह स्वयं सुप्रीम कोर्ट के फैसले का घोर मज़ाक है.’
रमेश ने आगे कहा, ‘भाजपा के अन्य मुख्यमंत्री भी हैं जो अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जैसी ही श्रेणी में आते हैं.’
ज्ञात हो कि 6 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को दो सप्ताह के भीतर प्रारंभिक जांच दर्ज करने का निर्देश दिया था. यह जांच अरुणाचल प्रदेश में सार्वजनिक निर्माण कार्यों के ठेकों को कथित रूप से खांडू के परिवार के सदस्यों के स्वामित्व वाली या उनसे जुड़ी कंपनियों को प्राथमिकता देकर आवंटित किए जाने के आरोपों से संबंधित है.
सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस विक्रम नाथ कर रहे थे, ने कहा कि राज्य और उसकी संस्थाएं किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक पदाधिकारी की ‘मनमर्जी’ के अनुसार लाभ नहीं बांट सकतीं. पीठ ने कहा कि यह मामला ‘स्वतंत्र जांच’ की मांग करता है.
अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक खरीद प्रणाली की निष्पक्षता और सर्वोच्च स्तर पर हितों के टकराव के आरोपों से जुड़े मामलों में जांच ‘सिर्फ निष्पक्ष होनी ही नहीं चाहिए, बल्कि निष्पक्ष दिखाई भी देनी चाहिए.’
मेघालय: विरोध प्रदर्शनों के बीच चूना पत्थर खनन परियोजना पर जन सुनवाई रद्द
मेघालय के पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में प्रस्तावित 1,800 करोड़ रुपये की एकीकृत सीमेंट संयंत्र और चूना पत्थर खनन परियोजना पर शुक्रवार को होने वाली जन सुनवाई का विरोध हुआ, जिसके चलते अधिकारियों को इसे रद्द करना पड़ा.
पुलिस के अनुसार, उपद्रवियों ने कुछ दूरी पर खड़े एक ट्रक में आग लगा दी. हालांकि ट्रक में न तो कोई सामान था और न ही उसमें कोई व्यक्ति मौजूद था.
जनसुनवाई स्थल पर परियोजना के समर्थन और विरोध में मौजूद दो समूहों के बीच कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति बनी रही. यह घटना उस झड़प के एक दिन बाद हुई है जिसमें जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास दो समूहों के बीच हुई हिंसक झड़प में दो लोग घायल हो गए थे.

पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार रसगानिया ने बताया कि एक समूह द्वारा जनसुनवाई को आगे बढ़ने से रोकने और इसे रद्द करने की मांग किए जाने के कारण सुनवाई स्थगित करनी पड़ी.
रसगानिया ने कहा, ‘दो समूह हैं. एक परियोजना के पक्ष में है, जबकि दूसरा इसका विरोध करता है. विरोध करने वाले समूह ने परियोजना पर प्रस्तुति (presentation) नहीं होने दी. अंततः जनसुनवाई रद्द करनी पड़ी.’
उन्होंने कहा कि आगजनी की घटना की जांच कर दोषियों का पता लगाया जाएगा.
स्थानीय लोग भूमि मुआवजे और पर्यावरणीय चिंताओं सहित कई कारणों से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं.
अखबार के अनुसार, हाल ही में 60 ग्रामीणों के एक समूह ने मेघालय हाईकोर्ट में परियोजना को चुनौती दी थी. उनका दावा था कि जिस भूमि पर परियोजना प्रस्तावित है, वह उनके उपयोग और कब्जे में है. उन्होंने जनसुनवाई पर रोक लगाने की भी मांग की थी.
हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ताओं की अपील पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया और उन्हें सलाह दी कि वे अपने आपत्तियों और संबंधित दस्तावेजों को जनसुनवाई के दौरान अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करें.
उपमुख्यमंत्री प्रेस्टोन तिनसोंग ने गुरुवार को कहा था कि ने कि जनसुनवाई का उद्देश्य हितधारकों को अपनी राय व्यक्त करने का अवसर देना है. उन्होंने इस आरोप को खारिज किया कि सरकार परियोजना को जबरन लागू कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ऐसी मंशा होती तो जनसुनवाई आयोजित ही नहीं की जाती.
श्री सीमेंट इस परियोजना को जिले के दाइस्तोंग गांव में स्थापित कर रही है. परियोजना में 0.95 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) क्लिंकर क्षमता और 0.99 एमटीपीए सीमेंट उत्पादन क्षमता होगी. इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
स्थानीय लोगों के साथ-साथ विपक्षी दल ‘वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी’ भी इस परियोजना का विरोध कर रही है. पार्टी का कहना है कि सभी विकास परियोजनाओं को उचित प्रक्रिया का पालन करते हुए और स्थानीय भावनाओं का सम्मान करते हुए आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
मेघालय: राज्य सरकार ने लापांगाप विवाद में असम के बार-बार यू-टर्न को बताया तनाव की वजह
मेघालय सरकार ने मंगलवार (19 मई) को संवेदनशील लापांगाप सीमा विवाद पर बातचीत में बढ़ती मुश्किलों को स्वीकार किया और आरोप लगाया कि असम के वेस्ट कार्बी आंगलोंग जिले के अधिकारी वार्ताओं के दौरान बनी मौखिक सहमतियों से बार-बार पीछे हट रहे हैं, जिससे शांति बनाए रखने और विवाद सुलझाने के प्रयास जटिल हो रहे हैं.
कैबिनेट मंत्री और एमडीए-2 सरकार के प्रवक्ता वाइलाडमिकी श्याला ने कहा कि दोनों राज्यों के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत के बावजूद मेघालय को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि बैठकों में तय किए गए रुख कुछ ही घंटों में बदल दिए जाते हैं.

उन्होंने कहा कि मेघालय और असम दोनों राज्यों के डिप्टी कमिश्नर और पुलिस अधीक्षक लगातार संपर्क में हैं और स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए बातचीत जारी है.
श्याला ताज़ा तनाव को लेकर उठी चिंताओं का जवाब दे रहे थे. लापांगाप क्षेत्र में हाल में हुई शांति बैठक के तुरंत बाद पत्थरबाज़ी की घटनाएं सामने आई थीं और ग्रामीणों ने आरोप लगाया था कि असम की ओर से सहयोग नहीं मिल रहा है.
मंत्री ने कहा कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है. उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी, खासकर पिछली फसल कटाई के मौसम में, ऐसी घटनाएं हुई थीं जब स्थानीय ग्रामीणों को कथित तौर पर फसल काटने से रोका गया था. उनके अनुसार, मेघालय सरकार ने हस्तक्षेप कर यह मामला असम सरकार के समक्ष उठाया, जिसके बाद ग्रामीणों को अपनी फसल काटने की अनुमति दी गई.
असम-मेघालय सीमा समझौता प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए श्याला ने कहा कि मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (एमडीए) सरकार ने असम के साथ 12 विवादित क्षेत्रों में से 6 का समाधान कर महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है.
हालांकि, उन्होंने कहा कि शेष छह क्षेत्र बेहद संवेदनशील और जटिल बने हुए हैं, क्योंकि इनमें शामिल पेचीदगियां और विवादित इलाकों में रहने वाले लोगों की भावनाएं महत्वपूर्ण हैं.
श्याला ने यह भी कहा कि असम में हालिया चुनावों के कारण सीमा विवाद पर चर्चा कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई थी, लेकिन अब चुनाव समाप्त होने के बाद उन्हें उम्मीद है कि वार्ता और बातचीत फिर पूरी तरह शुरू होगी.
सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंत्री ने कहा कि मेघालय सभी विवादित क्षेत्रों का समाधान लगातार संवाद और आपसी समझ के जरिए करने पर केंद्रित है.
सोमवार (18 मई) को मेघालय-असम सीमा पर स्थित विवादित लापांगाप क्षेत्र में पत्थरबाज़ी और दोनों पक्षों के लोगों के बीच हल्की झड़प के बाद तनाव बढ़ गया.
यह घटना दोनों पक्षों की बैठक शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त होने के तुरंत बाद हुई, हालांकि बैठक में कोई समाधान नहीं निकल सका.
वेस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक जगपाल सिंह ने बताया कि ताज़ा झड़प में दोनों पक्षों के गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के सदस्यों के बीच हुई तनातनी में एक व्यक्ति को मामूली चोटें आईं. उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए इलाके में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
उन्होंने बताया कि अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक बेनतीजा रही, क्योंकि विवादित क्षेत्र में खेती और वृक्षारोपण गतिविधियों को लेकर मतभेद बने रहे.
उन्होंने कहा कि मेघालय के ग्रामीणों ने समझदारी दिखाते हुए प्रस्ताव रखा था कि सीमा विवाद सुलझने तक दोनों पक्षों के लोग पहाड़ी क्षेत्रों में मौसमी फसलों की संयुक्त खेती करें.
हालांकि, असम पक्ष ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और इसके बजाय क्षेत्र में वृक्षारोपण का सुझाव दिया. मेघालय के प्रतिनिधियों ने इसका कड़ा विरोध किया और कहा कि इससे विवाद के समाधान में सीमा आयोग की मध्यस्थता और जटिल हो सकती है.
मणिपुर: कुकी संगठन ने कुकी-ज़ो विधायकों के ख़िलाफ़ ‘सामाजिक बहिष्कार’ हटाया
कुकी इनपी मणिपुर (केआईएम), जो कुकी समुदाय का एक शीर्ष नागरिक संगठन है, ने बुधवार (20 मई) को घोषणा की कि उसने उन सभी 9 कुकी-ज़ो विधायकों पर लगाया गया सामाजिक बहिष्कार हटा लिया है, जिन्होंने इस साल फरवरी में नई भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के गठन में हिस्सा लिया था.
इस शीर्ष संगठन ने कहा कि सभी कुकी-ज़ो विधायकों के ख़िलाफ़ सामाजिक बहिष्कार की घोषणा 5 फरवरी को कुकी-ज़ो काउंसिल (केजेडसी) – जो कुकी-ज़ो समुदाय का एक और संगठन है – की कैबिनेट द्वारा पारित प्रस्ताव के अनुसार की गई थी.

बयान में कहा गया, ‘मौजूदा परिस्थितियों और सभी के एकजुट होकर साथ काम करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए मामले की समीक्षा करने के बाद, कुकी-जो काउंसिल ने 29 अप्रैल 2026 की बैठक में पारित प्रस्ताव के माध्यम से उक्त सामाजिक बहिष्कार को वापस लेने का निर्णय लिया है.’
मणिपुर में मई 2023 में जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से राज्य के मेईतेई और कुकी-जो समुदायों ने एक-दूसरे के प्रभुत्व वाले इलाकों से लगभग पूरी तरह दूरी बना ली है. इस हिंसा में 260 से अधिक लोगों की मौत हुई और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं. ये झड़पें सबसे पहले मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच शुरू हुईं. बाद में इनमें राज्य के लगभग हर समुदाय के लोग शामिल हो गए.
पिछले साल फ़रवरी में भाजपा विधायक युमनाम खेमचंद ने मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी.
मणिपुर के नए मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान दो कुकी-ज़ो विधायक- एलएम खौते और न्गुरसांगलुर सनाते- समारोह में शामिल हुए थे. कुकी विधायक नेमचा किपगेन ने भी मणिपुर की नई उपमुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, जिसके चलते केआईएम और केजेडसी ने उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया था.
नगालैंड: पुलिस ने लोगों से शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की
पड़ोसी राज्य मणिपुर में बिगड़ती कानून-व्यवस्था की स्थिति और उसके असर के नगालैंड तक फैलने की आशंका के बीच पुलिस ने नागरिकों से शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और सतर्कता बनाए रखने की अपील की है.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, नगालैंड के पुलिस महानिदेशक रुपिन शर्मा ने लोगों से जिम्मेदारी से व्यवहार करने और किसी भी अपुष्ट जानकारी, अफवाह या भड़काऊ सोशल मीडिया सामग्री को साझा या प्रसारित न करने का आग्रह किया, क्योंकि इससे दहशत, गलतफहमी या सांप्रदायिक तनाव पैदा हो सकता है.

शुक्रवार को जारी एक अपील में पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए झूठी और भ्रामक खबरों के प्रसार के प्रति चेतावनी दी. पुलिस ने कहा कि एआई से तैयार की गई सामग्री के इस दौर में फर्जी सूचनाएं बनाना और फैलाना पहले से कहीं अधिक आसान और खतरनाक हो गया है.
यह परामर्श ऐसे समय में जारी किया गया है जब मणिपुर के कांगपोकपी जिले में उन लोगों को छुड़ाने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है जिन्हें अब भी सशस्त्र समूहों ने बंधक बना रखा है.
नागरिकों से यह भी कहा गया है कि वे नगालैंड के बाहर की घटनाओं पर भावनात्मक प्रतिक्रिया न दें और ऑनलाइन फैल रही अफवाहों या भड़काऊ नैरेटिव से प्रभावित होने से बचें.
नगालैंड पुलिस ने आश्वासन दिया कि स्थिति पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है और राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं. पुलिस ने जोर देकर कहा कि शांति और स्थिरता बनाए रखने में जनता का सहयोग अत्यंत आवश्यक है.
नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे ऑनलाइन सामग्री देखते या साझा करते समय विशेष सावधानी बरतें, खासकर ऐसी सामग्री के मामले में जो राज्य में जातीय और सामुदायिक संबंधों को प्रभावित कर सकती हो.
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी कि सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से जानबूझकर फर्जी खबरें, अफवाहें या भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
परामर्श में लोगों से सतर्क रहने और सामाजिक सौहार्द तथा समुदायों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बिगाड़ने की कोशिश करने वाले किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या गतिविधि की तुरंत सूचना देने की अपील भी की गई.
यह दोहराते हुए कि पड़ोसी राज्यों में तनाव के बावजूद नगालैंड में शांति और सामान्य स्थिति बनी हुई है, पुलिस ने राज्य में सौहार्द बनाए रखने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग की अपील की.
