ईरान दूतावास ने परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका की टिप्पणियों को खारिज किया

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा था कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता और उसे अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को सौंप देना चाहिए. इसके जवाब में ईरान ने कहा कि ईरान परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को अपने लोगों का वैध और अविभाज्य अधिकार मानता है और इस बात पर जोर देता है कि वह इस कानूनी तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा.

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा के दौरान की गई उन टिप्पणियों के जवाब में कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता और उसे अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम को सौंप देना चाहिए, नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने कहा है कि वह ‘परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को अपने लोगों का वैध और अविभाज्य अधिकार मानते हैं.’ और इस बात पर जोर दिया कि वह इस कानूनी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, शनिवार को नई दिल्ली में एक आधिकारिक स्वागत समारोह के इतर अमेरिका-ईरान वार्ता पर बात करते हुए रुबियो ने कहा, ‘कुछ प्रगति हुई है… यहां तक कि जब मैं अभी आपसे बात कर रहा हूं, तब भी कुछ काम चल रहा है… जैसा कि राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने कहा है, इस मुद्दे का समाधान किसी न किसी तरीके से होना चाहिए. ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं रख सकता. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बिना किसी शुल्क के खोला जाना चाहिए. उन्हें उच्च संवर्धित यूरेनियम सौंप देना चाहिए.’

रविवार को जवाब में जारी एक बयान में ईरानी दूतावास ने कहा कि वह हालिया टिप्पणियों को खारिज करता है.

बयान में कहा, ‘ईरान के परमाणु कार्यक्रम के संबंध में अमेरिकी विदेश मंत्री द्वारा किए गए दावों के संदर्भ में, ईरान एक बार फिर याद दिलाता है कि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी- नॉन-प्रोलिफरेशन ऑफ न्यूक्लियर वेपन्स) का एक प्रतिबद्ध सदस्य होने के नाते उसने लगातार यह घोषित किया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में है.’

दूतावास ने कहा कि अब तक खुद आईएईए ने भी ईरान की परमाणु गतिविधियों में किसी प्रकार के भटकाव को न तो देखा है और न ही उसकी कोई रिपोर्ट दी है.

बयान में कहा गया, ‘ईरान परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी के शांतिपूर्ण उपयोग को अपने लोगों का वैध और अविभाज्य अधिकार मानता है और इस बात पर जोर देता है कि वह इस कानूनी तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त अधिकार को कभी नहीं छोड़ेगा.’

इसने होर्मुज़ जलडमरूमध्य संकट और तेल प्रतिबंधों पर भी अपनी राय व्यक्त की.

द हिंदू के अनुसार, बयान में कहा, ‘दुनिया के प्रमुख तेल और ऊर्जा निर्यातकों में से एक होने के नाते, ईरान हमेशा भारत सहित सभी देशों को अपने ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार रहा है. हाल के वर्षों में वैश्विक ऊर्जा बाजार को बंधक बनाए रखने वाली चीज अमेरिका द्वारा ईरान के तेल निर्यात पर लगाए गए अवैध और अन्यायपूर्ण प्रतिबंध हैं; ऐसे प्रतिबंध जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का उल्लंघन करते हुए ईरानी राष्ट्र पर आर्थिक दबाव डालने के उद्देश्य से तैयार और लागू किया गया है.’

इसमें आगे कहा, ‘तेल प्रतिबंध पिछले 47 वर्षों में अमेरिकी सरकार द्वारा ईरानी जनता पर थोपे गए शत्रुतापूर्ण कदमों और दबावों के व्यापक पैटर्न का केवल एक छोटा हिस्सा हैं. इन कदमों में दवाओं पर प्रतिबंध और ईरानी मरीजों की आवश्यक दवाइयों तथा जीवनरक्षक चिकित्सा उपकरणों तक पहुंच पर रोक भी शामिल रही है, जिसने दुर्भाग्यवश अनेक निर्दोष मरीजों के जीवन को खतरे में डाला और व्यापक मानवीय पीड़ा पैदा की है.’

ईरान ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ‘होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा और जहाज़ों की आवाजाही में जो चीज़ें इस समय बाधा डाल रही हैं और उन्हें खतरे में डाल रही हैं, वे इस क्षेत्र में अमेरिका और ज़ायोनी शासन की सैन्य, उकसावे वाली और दुस्साहसिक कार्रवाइयां हैं.’

उसने अमेरिका और इज़रायल को वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा संकटों के बढ़ने के पीछे ‘मुख्य कारक’ बताया. कहा कि ये दोनों अस्थिरता तथा असुरक्षा पैदा करके अपने राजनीतिक और सैन्य उद्देश्यों को आगे बढ़ाना चाहते हैं.