सीबीएसई ने मानी उत्तर पुस्तिका बदलने की गलती, सवाल उठाने वाले छात्र को सोशल मीडिया पर कहा गया था ‘पाकिस्तानी’

सीबीएसई की 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी का मामला तब सुर्खियों में आया, जब एक छात्र ने दावा किया कि उसके रोल नंबर पर किसी और की उत्तर पुस्तिका अपलोड कर दी गई. बाद में सीबीएसई ने तकनीकी गलती स्वीकार की, लेकिन इस मुद्दे को उठाने पर छात्र को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और ‘पाकिस्तानी’ जैसे टिप्पणियों का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 18 फरवरी 2026 को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 10वीं की परीक्षा में शामिल होने से पहले सुरक्षा जांच से गुज़रती छात्राएं. (पीटीआई फोटो)

नई दिल्ली: कक्षा 12 के एक छात्र द्वारा केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की परीक्षा मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए जाने के बाद उसे दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़े सोशल मीडिया यूज़र्स की तीखी ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा. यहां तक कि उसे ‘पाकिस्तानी’ तक कहा गया.

और अब (सीबीएसई) ने माना है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी के कारण कक्षा 12वीं  के एक छात्र के रोल नंबर पर गलत स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका अपलोड हो गई थी.

इस साल बोर्ड परीक्षाओं के मूल्यांकन के लिए शुरू की गई नई प्रणाली को लेकर लगातार आलोचना हो रही है. छात्रों ने पोर्टल क्रैश होने, भुगतान संबंधी दिक्कतों, धुंधली स्कैन कॉपियों, गायब पन्नों और यहां तक कि गलत उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड होने जैसी समस्याओं की शिकायत की है.

पारदर्शिता, भरोसे और मूल्यांकन की सटीकता को लेकर चिंताएं तब और बढ़ गईं, जब कक्षा 12 के छात्र वेदांत श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि सीबीएसई द्वारा उनके रोल नंबर पर अपलोड की गई फिजिक्स की उत्तर पुस्तिका उनकी नहीं थी. इस मुद्दे को उठाने के बाद उन्हें सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जाने लगा. 

गलत स्कैन कॉपियां अपलोड

सोमवार (25 मई) रात वेदांत ने एक्स पर कई सारे पोस्ट कर कहा कि ‘हमारी बात सही थी और उत्तर पुस्तिकाएं वास्तव में बदल गई थीं.’

उन्होंने लिखा, ‘सीबीएसई ने हमें मेरी सही उत्तर पुस्तिका भेज दी है. शाम को सीबीएसई अधिकारियों ने हमसे संपर्क किया और मेरी उत्तर पुस्तिका भेजी. हमारी बात सही थी और कॉपियां बदल गई थीं.’

उन्होंने आगे लिखा, ‘इन मुश्किल दिनों में हमारा साथ देने वाले लोगों का धन्यवाद. इस वजह से हमें काफी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी. सिर्फ एक वास्तविक चिंता उठाने पर लोगों ने हमें देशविरोधी और पाकिस्तानी कहा, लेकिन आखिरकार सच सामने आ गया.’

इससे पहले 23 मई को वेदांत ने लिखा था कि 13 मई को परिणाम घोषित होने के बाद उन्होंने फिजिक्स में ‘उम्मीद से कम अंक’ आने पर अपनी उत्तर पुस्तिका की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया था.

स्कैन कॉपी मिलने पर उन्होंने देखा कि उनके रोल नंबर पर अपलोड की गई कॉपी उनकी ‘हैंडराइटिंग, अक्षरों की बनावट, स्पेसिंग, स्लांट और वाक्य संरचना’ से मेल नहीं खाती.

उन्होंने इस गड़बड़ी की ओर ध्यान दिलाते हुए अपनी केमिस्ट्री, इंग्लिश और कंप्यूटर साइंस की उत्तर पुस्तिकाओं के स्क्रीनशॉट भी साझा किए, ताकि लिखावट का अंतर स्पष्ट हो सके.

वेदांत ने लिखा, ‘मैंने पूरे साल पढ़ाई की. इन परीक्षाओं के लिए मैंने नींद, मानसिक शांति, घूमना-फिरना सब छोड़ दिया. और अब मुझे यह भी नहीं पता कि मेरी असली फिजिक्स कॉपी जांची भी गई या नहीं. क्या छात्र इसी के हकदार हैं?’

उन्होंने दावा किया कि इस गलती का असर उनके फिजिक्स-केमिस्ट्री-मैथ्स (पीसीएम) के कुल प्रतिशत पर पड़ा, जो कई उच्च शिक्षा और पेशेवर पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए जरूरी 75 प्रतिशत पात्रता मानदंड से जुड़ा है.

ओएसएम सिस्टम की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ‘अगर उत्तर पुस्तिकाएं ही आपस में बदल रही हैं, तो छात्र इस प्रक्रिया पर भरोसा कैसे करें? छात्र कोई प्रयोग नहीं हैं.’

ऑनलाइन ट्रोलिंग और विवाद

वेदांत के पोस्ट के बाद यह विवाद तब और बढ़ गया जब एक वकील ने कहा कि वह छात्र का ऑनलाइन पता नहीं लगा पा रहे हैं, जिसके बाद सोशल मीडिया पर अटकलें शुरू हो गईं.

कई यूजर्स ने वेदांत पर सीबीएसई को बदनाम करने का आरोप लगाया और उन्हें ‘देशविरोधी’ तथा ‘पाकिस्तानी’ जैसे शब्दों से ट्रोल किया. इसकी वजह यह थी कि उनके एक्स अकाउंट पर उनका लोकेशन ‘इंडिया’ की जगह ‘साउथ एशिया’ दिख रहा थी.

इसके जवाब में कई लोगों ने कहा कि भारत दक्षिण एशिया का ही हिस्सा है और अकाउंट की कुछ सेटिंग्स या तकनीकी कारणों से ऐसा दिख सकता है. वेदांत के भाई ने भी एक्स पोस्ट के जरिए ट्रोलिंग की आलोचना की और स्पष्ट किया कि उनके भाई ने केवल इस मुद्दे को उठाने के लिए अकाउंट बनाया था.

डीडी न्यूज़ के एंकर अशोक श्रीवास्तव ने एक्स पर एक पोस्ट में वेदांत को ट्रोल करते हुए सवाल पूछा कि ‘क्या पाकिस्तानियों ने भी सीबीएसई की परीक्षा दी थी?’ हालांकि बाद में उन्होंने अपना पोस्ट डिलीट कर दिया.

हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए वेदांत के पिता संजय श्रीवास्तव ने बताया कि परिणाम आने के बाद पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने में भी उनके बेटे को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

उन्होंने कहा, ‘अकाउंट पर लोकेशन साउथ एशिया दिखने के कारण उसे पाकिस्तानी कहा गया और जमकर ट्रोल किया गया. बाद में उसके भाई ने साफ किया कि यह अकाउंट बनाते समय हुई तकनीकी समस्या थी. इसका उसकी मानसिक सेहत पर असर पड़ा है और अब वह फोन से दूर रह रहा है.’

सीबीएसई का जवाब

वेदांत को भेजे गए ईमेल में सीबीएसई ने गलती स्वीकार की और कहा कि उनके अंकों को सही तरीके से अपडेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

बोर्ड ने लिखा, ‘मामले की समीक्षा की गई है और आपकी उत्तर पुस्तिका की सही कॉपी आपके पंजीकृत ईमेल पते पर भेज दी गई है. आवश्यकता अनुसार आपके परिणाम को अपडेट करने की प्रक्रिया भी की जा रही है.’

हिंदुस्तान टाइम्स से नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले एक वरिष्ठ सीबीएसई अधिकारी ने भी इस गड़बड़ी की पुष्टि की, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि यह गलती आखिर हुई कैसे.

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसियों पर बढ़ता अविश्वास

सीबीएसई ने ओएसएम सिस्टम को तेज और अधिक सटीक डिजिटल मूल्यांकन के उद्देश्य से लागू किया था. बोर्ड का दावा था कि इससे परिणामों के बाद पारदर्शिता बढ़ेगी.

17 मई को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने कहा था कि सिस्टम में विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करने के लिए तीन स्तर की सुरक्षा जांच रखी गई है. उन्होंने यह भी कहा था कि प्रक्रिया के डिजिटलीकरण से अंकों के जोड़ में होने वाली मानवीय गलतियां खत्म हो जाएंगी.

हालांकि, वेदांत सहित कई छात्रों ने ओएसएम सिस्टम के कारण गड़बड़ियों की शिकायत की है. इनमें गलत उत्तर पुस्तिकाएं अपलोड होना, धुंधली कॉपियां, गायब पन्ने और पोर्टल क्रैश जैसी समस्याएं शामिल हैं.

हाल में हुए नीट-यूजी पेपर लीक विवाद के बाद इस प्रक्रिया को लेकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है.

वेदांत को मिला विपक्षी नेताओं का साथ 

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी सहित कई लोगों ने वेदांत के समर्थन में आवाज उठाई.

गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘17 साल के एक लड़के की उत्तर पुस्तिका गलत जांची गईं. न्याय की उम्मीद में वह सोशल मीडिया पर आया. लेकिन मदद मिलने की बजाय उसे गालियां दी गईं. भाजपा की आईटी सेल ने उसे ‘एंटी-नेशनल’, ‘सोरोस एजेंट’ और ‘डीप स्टेट’ का हिस्सा बताया.’

उन्होंने यह भी कहा कि दशकों में पहली बार सीबीएसई बोर्ड परीक्षाओं पर सवाल उठे हैं और ‘मोदी-प्रधान की जोड़ी ने एक और संस्थान को धांधली का प्रतीक बना दिया है.’

राहुल गांधी ने आगे कहा, ‘सच्चाई यह है कि मोदी सरकार युवाओं और जेन-ज़ी से डरती है, क्योंकि अब वे सवाल पूछ रहे हैं. और जो भी सवाल पूछता है, इस सरकार द्वारा उसे बदनाम किया जाता है, डराया जाता है और कुचला जाता है. लेकिन सुन लीजिए, यही युवा और यही जेन-ज़ी आपके अहंकार को तोड़ेंगे.’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी ओएसएम सिस्टम में गड़बड़ियों को लेकर सीबीएसई की आलोचना की.

उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के कारण धुंधली उत्तर पुस्तिकाएं, गलत कॉपियां, गलत मूल्यांकन, भुगतान में देरी और छात्रों से अत्यधिक पुनर्मूल्यांकन शुल्क वसूले जाने जैसी समस्याएं सामने आई हैं.

उन्होंने एक्स पोस्ट में यह भी कहा कि कक्षा 12 का पास प्रतिशत 88 प्रतिशत से घटकर 85 प्रतिशत हो गया है और सवाल उठाया कि सिस्टम लागू करने से पहले तकनीकी समस्याओं का अनुमान क्यों नहीं लगाया गया.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल सीबीएसई कक्षा 12 का कुल पास प्रतिशत 85.2 प्रतिशत रहा, जबकि पिछले साल यह 88.39 प्रतिशत था. यह 2019 के बाद सबसे कम है.

आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.

उन्होंने आरोप लगाया कि मूल्यांकन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया ने देशभर के छात्रों और अभिभावकों को भारी तनाव में डाल दिया है.

हाल में गठित व्यंग्यात्मक राजनीतिक संगठन कॉकोरोच जनता पार्टी ने भी वेदांत और अन्य प्रभावित छात्रों के समर्थन में बयान जारी करते हुए धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की.

संगठन ने कहा, ‘हम वेदांत के साथ खड़े हैं. उसने सिर्फ सीबीएसई परीक्षाओं में हो रही अव्यवस्था को उजागर किया है.’

बढ़ते दबाव के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने घोषणा की कि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) के प्रोफेसर और तकनीकी विशेषज्ञ सिस्टम की गड़बड़ियां दूर करने में सीबीएसई की मदद करेंगे.