नई दिल्ली: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (सीबीएसई) का ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) सिस्टम, जो पहले से ही तकनीकी गड़बड़ियों, सुरक्षा खामियों और मार्किंग में अनियमितताओं को लेकर सवालों के घेरे में है, अब बोर्ड के मूल ‘रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल’ (आरएफपी) (एक औपचारिक व्यावसायिक दस्तावेज़, जिसका उपयोग किसी विशिष्ट प्रोजेक्ट, उत्पाद या सेवा के लिए योग्य विक्रेताओं से विस्तृत प्रस्ताव और बोलियां मांगने के लिए किया जाता है) दस्तावेज़ में स्कैनर के स्पेसिफिकेशन्स में किए गए बदलावों को लेकर नई जांच का सामना कर रहा है.
इस संबंध में कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और शिक्षा पर संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि ओएसएम सिस्टम के लिए मूल आरएफपी दस्तावेज़ में रोबोटिक स्कैनर्स का प्रावधान था. ये ऐसे ऑटोमेटेड सिस्टम होते हैं जो ज़्यादा मात्रा में बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के डिजिटलीकरण करने के लिए ऑप्टिकल स्कैनिंग को एक रोबोटिक आर्म के साथ जोड़ते हैं.
इस पोस्ट में दिग्विजय सिंह ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को टैग करते हुए सवाल उठाया कि क्या किसी खास वेंडर को फ़ायदा पहुंचाने के लिए दस्तावेज़ में बदलाव करके साधारण स्कैनर्स को शामिल किया गया था.
Initially for OSM CBSE had decided to use Robotic Scanner in RFP (Request for Proposal) document. But later it was changed to ordinary Scanner. Why?
Only @dpradhanbjp would know.
Now what is a Robotic Scanner?
A robotic scanner combines a 3D or optical scanner with an…— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) June 3, 2026
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, आईटी मंत्रालय ने संसदीय स्थायी समिति को दिए एक नोट में इस बात की पुष्टि की है कि सीबीएसई, 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के डिजिटल मूल्यांकन के लिए वेंडर ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ द्वारा विकसित ओएसएम पोर्टल का उपयोग करता है. वहीं, 10 सीबीएसई-संबंधित डोमेन को होस्ट करने वाले इस इंफ्रास्ट्रक्चर को अमेजन वेब सर्विसेज (एडब्लूएस) इंंडिया का सहयोग प्राप्त है.
उल्लेखनीय है कि यह आरोप उस विवाद को एक नया आयाम देता है, जो इस बात को लेकर चल रहा है कि बोर्ड ने सिस्टम के लाइव होने से पहले दी गई शुरुआती चेतावनियों को नज़रअंदाज़ कर दिया था.
सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बार-बार उठाया गया
अखबार के अनुसार, भारत की साइबर सुरक्षा एजेंसी CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने मूल्यांकन प्लेटफॉर्म में गंभीर मुद्दों को उजागर किया था. सबसे पहले फरवरी में और फिर मई में तीन बार इसे लेकर आगाह किया गया. एक सुरक्षा ऑडिट के बाद एजेंसी ने इसके एक पोर्टल को इस्तेमाल के लिए अनुपयुक्त भी घोषित कर दिया था.
कमियों की पुष्टि करने के बाद CERT-In ने बोर्ड और एडब्लूएस दोनों को अलर्ट किया, जिन्होंने दावा किया कि उन कमियों को ठीक कर दिया गया है. इस बीच बोर्ड ने ज़ोर देकर कहा कि जिन समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया गया था, उन्हें हल करने के लिए ज़रूरी कदम उठाए गए हैं.
इसमें यह भी बताया गया है कि शिक्षा मंत्रालय की एक रिपोर्ट में गुणवत्ता से जुड़ी चिंताओं पर ज़ोर दिया गया था; रिपोर्ट में यह पाया गया कि 9 मई के आस-पास स्कैन की गई 13,583 उत्तर पुस्तिकाएं ‘असंतोषजनक थीं, जिससे उन्हें पढ़ने और उनका मूल्यांकन करने में दिक्कतें आ रही थीं.’
इस बीच मंगलवार (2 जून) को 18 साल के सार्थक सिद्धांत ने शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों की संसदीय स्थायी समिति के सामने बोर्ड की खरीद प्रक्रिया से जुड़े अपने निष्कर्ष पेश किए. सार्थक सिद्धांत ने संसदीय समिति को 7 पन्नों का एक नोट सौंपा. इस नोट में उन्होंने ओएसएम टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ियों का आरोप लगाया, जिसमें ऐसे नियम-कायदे भी शामिल थे जिनके बारे में उनका दावा था कि उन्हें किसी खास वेंडर को फ़ायदा पहुंचाने के लिए ही बनाया गया था.
बताया जाता है कि समिति के कुछ सदस्यों ने इस मुद्दे पर उसकी समझ की तारीफ़ की और सुझाव दिया कि मंत्रालय उनकी विशेषज्ञता से फ़ायदा उठा सकता है.
दिलचस्प बात यह है कि इस सिस्टम की सबसे बड़ी कमियों को बच्चों ने ही लोगों के सामने उजागर किया. सार्थक के अलावा एक 19 साल के एथिकल हैकर, निसर्ग अधिकारी ने 31 मई को एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि वह पोर्टल के ज़रिए छात्रों की स्कैन की हुई आंसर शीट तक पहुंच बना सकते हैं; उन्होंने सबूत के तौर पर एक इमेज भी शेयर की. बोर्ड ने इन खांमियों को स्वीकार भी किया.
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, इस सिस्टम को शुरू करने से पहले सीबीएसई ने वेंडर के सिक्योरिटी ऑडिट सर्टिफ़िकेट को स्वतंत्र रूप से वेरिफ़ाई नहीं किया था.
बता दें कि आंसर शीट के मेल न खाने और मूल्यांकन में विसंगतियों की बढ़ती शिकायतों के बाद दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका भी दायर की गई है; इसमें प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी कमियों और बोर्ड की शिकायत निवारण प्रक्रिया में हुई चूकों की न्यायिक जांच की मांग की गई.
ड्राई रन के दौरान मिली चेतावनियों को नज़रअंदाज़ किया गया
‘इंडियन एक्सप्रेस’ के अनुसार, 12वीं कक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से कई महीने पहले ही इस प्लेटफ़ॉर्म की कमियों की ओर बोर्ड का ध्यान आकर्षित किया गया था. जनवरी 2026 में सीबीएसई ने दिल्ली में तीन-दिवसीय ओएसएम पायलट परीक्षण आयोजित किया था. इसमें पांच स्कूलों के प्रधानाचार्य, मुख्य परीक्षक और विषय विशेषज्ञ शामिल हुए थे. इन संस्थानों में केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और शीर्ष निजी स्कूल शामिल थे.
इस अभ्यास के बाद दो औपचारिक रिपोर्टें प्रस्तुत की गईं, जिनमें सिस्टम की अनगिनत तकनीकी और परिचालन संबंधी विफलताओं का विस्तृत ब्योरा दिया गया था.
इस दौरान जिन समस्याओं की ओर विशेष रूप से ध्यान दिलाया गया था, उनमें ये शामिल थीं: अतिरिक्त मुख्य परीक्षकों द्वारा बढ़ाए गए अंकों का सिस्टम में कटौती के रूप में दिखाई देना; स्क्रीन पर दिख रहे अंकों का आधिकारिक अंकन योजना (marking scheme) से मेल न खाना; बहु-भाग वाले प्रश्नों में केवल एक उप-भाग के अंकों की ही गणना होना; सिस्टम द्वारा उन स्थानों पर भी भिन्नात्मक अंक (fractional marks) देने के लिए बाध्य करना, जहां अंकन योजना इसकी अनुमति नहीं देती थी; मूल्यांकन की प्रगति का अपने-आप (auto-save) सुरक्षित न होना; ‘undo’ फ़ंक्शन का उपयोग करने पर प्लेटफ़ॉर्म का ‘फ़्रीज़’ हो जाना; और सिस्टम द्वारा परीक्षकों को खाली या अनुत्तरित प्रश्नों के लिए भी अंक देने की अनुमति देना.
दोनों रिपोर्टों में ओएसएम सिस्टम को लागू करने में कम से कम एक साल की देरी करने की सिफ़ारिश की गई थी, और इसके लिए ज़्यादा ट्रायल और मूल्यांकन करने वालों की बेहतर ट्रेनिंग की ज़रूरत बताई गई थी.
अखबार के अनुसार, दूसरी रिपोर्ट में 36 से ज़्यादा तकनीकी और ऑपरेशनल चिंताओं पर रोशनी डाली गई थी. इसमें यह भी कहा गया कि बोर्ड की गवर्निंग बॉडी ने सुझाव दिया था कि ओएसएम को क्षेत्रीय कार्यालयों में पायलट प्रोजेक्ट पूरे होने के बाद ही लागू किया जाए, जो जून 2025 तक हो सकता है. हालांकि, जनवरी में हुआ ड्राई रन सिर्फ़ पांच स्कूलों तक ही सीमित था.
बोर्ड की प्रतिक्रिया
इन रिपोर्ट्स के जवाब में सीबीएसई ने कहा कि तकनीकी गड़बड़ियां ठीक कर दी गईं थी; लेकिन इस प्लेटफ़ॉर्म को लेकर हफ़्तों से चल रहे विवाद के कारण इस दावे पर काफ़ी सवाल उठाए गए हैं.
सुरक्षा में सेंध की बात सार्वजनिक होने के बाद से सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और बोर्ड के सचिव हिमांशु गुप्ता को उनके पदों से हटा दिया गया है.
ओएसएम सिस्टम के लिए सेवाओं की खरीद की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसे एक महीने के भीतर कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट सौंपनी है.
इसके साथ ही छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने हेतु 6 जून तक का समय दिया गया है. स्कैनर के स्पेसिफिकेशन में बदलाव को लेकर अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है.
गौरतलब है कि सीबीएसई के नए ओएसएम सिस्टम पर छात्र, अभिभावक और विपक्षी दल सभी सवाल उठा रहे हैं. ऐसा दावा किया जा रहा था कि जिस सिस्टम को परीक्षा में सटीक और तेज़ जांच के लिए लाया गया, अब भी सवालों के घेरे में आ गया है. क्योंकि 12वीं कक्षा के बहुत से छात्र धुंधली आंसर शीट, पोर्टल क्रैश और यहां तक कि आंसर शीट्स बदलने तक की शिकायत कर रहे हैं.
सीबीएसई के 26 मई 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक परीक्षा में शामिल 17 लाख 68 हजार 968 छात्रों में से 4 लाख 4 हजार 319 छात्रों ने स्कैन कॉपी के लिए आवेदन किया, जो कुल का करीब 23 फीसदी है.
बीते दिनों लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सीबीएसई द्वारा ओएसएम कॉन्ट्रैक्ट देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी ‘टीसीएस’ को छोड़कर ‘कोएम्प्ट एडुटेक’ को दिए जाने को लेकर सवाल उठाए थे. उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीबीएसई की गड़बड़ी पर चुप्पी दिखाती है कि उन्हें केवल अपनी सरकार बचाने की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं.
मालूम हो कि बीते दिनों नीट पेपर लीक विवाद के बाद ओएसएम गड़बड़ी अब केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय के सामने बड़ी चुनौती बन गई है. छात्र संगठनों से लेकर विपक्ष और नागरिक समाज के लोग भी इसे लेकर अपनी नाराज़गी जाहिर कर रहे हैं.
बताया गया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक भी व्यंग्यात्मक सोशल मीडिया कैंपेन कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके के भारत लौटने पर 6 जून को उनके विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे.
खबरों के अनुसार, कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने घोषणा की है कि वो 6 जून को भारत लौटेंगे और दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करके शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग करेंगे. अभिजीत दीपके फ़िलहाल अमेरिका में हैं. उन्होंने वहां पर बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपना ग्रैजुएशन पूरा किया है.
