मणिपुर: कांगपोकपी के गांव में सशस्त्र हमला और आगजनी, तीन नागरिकों की मौत; जांच की मांग

मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले के लोइबोल गांव में सुबह करीब 4 बजे अज्ञात हमलावरों ने हमला किया, जिसमें तीन नागरिकों की मौत हो गई. घटना के दौरान कई घरों में आग भी लगा दी गई. कुकी संगठन कुकी इनपी मणिपुर ने घटना की निंदा करते हुए जांच की मांग की है.

हालिया हिंसा में मणिपुर के एक नगा गांव में क्षतिग्रस्त मकान. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर के कांगपोकपी जिले में शुक्रवार (5 जून) की सुबह एक कुकी गांव में हुए सशस्त्र हमले में तीन आम नागरिक मारे गए और कई घर क्षतिग्रस्त हो गए.

नॉर्थईस्ट टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला न्यू केइथेलमानबी इलाके के अंतर्गत आने वाले लोइबोल गांव में सुबह करीब 4 बजे हुई. मृतकों की पहचान लेतखोंगम हाओकिप, टिनमेरी हाओकिप और जांगमिनलाल हाओकिप के रूप में की गई है और तीनों उसी गांव के रहने वाले थे.

खबर के अनुसार, घटना के दौरान कई घरों में आग भी लगा दी गई, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर भागने के लिए मजबूर होना पड़ा. नुकसान के स्तर का आधिकारिक तौर पर अभी आकलन नहीं किया गया है.

इस बीच, राज्य में कुकी-ज़ो समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था ‘कुकी इनपी मणिपुर’ ने इन हत्याओं की निंदा की और नागरिकों की जान जाने तथा संपत्ति के नुकसान पर चिंता व्यक्त की.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, संगठन ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया कि नगा संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम (एनएससीएन-आईएम) और उसके प्रॉक्सी संगठन ज़ेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ-के) के भारी हथियारों से लैस सदस्यों ने सुबह करीब 4 बजे गांव पर हमला किया. संगठन ने कहा कि इस हमले में तीन नागरिकों की मौत हो गई, सात घर नष्ट हो गए और नागरिकों की संपत्ति को भारी नुकसान पहुंचा.

घटना की निंदा करते हुए केआईएम ने इस हमले को निहत्थे नागरिकों के खिलाफ किया गया ‘हिंसा का बर्बर कृत्य’ बताया. संगठन ने कहा कि निर्दोष लोगों की जानबूझकर हत्या और उनके घरों को नष्ट करना मानवीय गरिमा तथा मौलिक मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है.

केआईएम ने भारत सरकार और सुरक्षा एजेंसियों से घटना की तत्काल जांच शुरू करने, दोषियों को गिरफ्तार करने और बिना किसी देरी के न्याय सुनिश्चित करने की मांग की. संगठन ने संवेदनशील गांवों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की भी अपील की ताकि नागरिकों पर आगे ऐसे हमलों को रोका जा सके.

संगठन ने कहा, ‘इस जघन्य अपराध के दोषियों को पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए.’ साथ ही उसने चेतावनी दी कि कुकी-जो समुदाय पर हुए इस हमले के बाद उत्पन्न होने वाले किसी भी परिणाम के लिए वह जिम्मेदार नहीं होगा.

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, इंफाल के अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार (5 जून) को हुए हमले के पीछे कौन लोग थे, इसका पता लगाने की कोशिशें जारी हैं. यह हमला ऑल नगा स्टूडेंट्स एसोसिएशन, मणिपुर (एएनएसएएम) द्वारा उखरुल से कांगपोकपी जिले के एक गांव तक मार्च शुरू किए जाने के 24 घंटे से भी कम समय हुआ है. इस मार्च का उद्देश्य उन छह नगा पुरुषों के परिवारों से मिलना था, जो 13 मई को तीन चर्च नेताओं की हत्या के तुरंत बाद लापता हो गए है.

दो कुकी संगठनों ने इस मार्च का विरोध किया था. उनका कहना था कि मार्च का मार्ग कुकी-बहुल क्षेत्रों से होकर गुजरता है और इससे क्षेत्र में तनाव बढ़ सकता है.

उल्लेखनीय है कि बीते फरवरी महीने से जातीय हिंसा से प्रभावित राज्य में नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव और हिंसा बढ़ा है. उखरुल के लितान इलाके में इस साल फरवरी से नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है. कई हिंसक घटनाएं हुईं हैं. इन घटनाओं में लोगों की जान गई और कई घर जला दिए गए. इन घटनाओं से प्रभावित लोग दोनों समुदायों के थे. उखरुल एक नगा-बहुल ज़िला है.

बीते 13 मई को तीन आदिवासी चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी. उसके बाद नगा और कुकी समुदाय के कई लोगों को बंधक बनाया गया है, जिसको लेकर नगा और कुकी समुदायों के बीच तनाव बना हुआ है.