नई दिल्ली: मणिपुर गृह विभाग द्वारा एक सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून आवेदन के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, मई 2023 में राज्य में जातीय हिंसा भड़कने के बाद से मणिपुर के राहत शिविरों और प्रीफैब्रिकेटेड आवासों में रह रहे कम-से-कम 731 आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों (आईडीपी) की मौत हो चुकी है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी लेखक और राजनीतिक कार्यकर्ता हरेश्वर गोस्वामी को आरटीआई आवेदन के जवाब में दी गई. इससे पहले इस वर्ष एक अपीलीय मामले में मणिपुर सूचना आयोग ने जानकारी उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था.
राज्य के गृह विभाग द्वारा विभिन्न जिला प्रशासनों से इकट्ठा किए गए जिलेवार आंकड़ों से पता चला है कि ये मौतें उन विस्थापित लोगों की हुईं जो मेईतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच हिंसा भड़कने के बाद बनाए गए राहत शिविरों और प्रीफ़ैब्रिकेटेड आवासों में शरण लिए हुए थे.
आरटीआई जवाब के अनुसार, सबसे अधिक 248 मौतें चूड़ाचांदपुर जिले में दर्ज की गईं. इसके बाद बिष्णुपुर में 151, कांगपोकपी में 128, इंफाल पश्चिम में 94, काकचिंग में 60, इंफाल पूर्व में 25, जिरीबाम में 13, थौबल में 11 और तेग्नौपाल में एक मौत दर्ज की गई.
इस जानकारी से यह भी पता चला कि हिंसा शुरू होने के लगभग तीन साल बाद भी 43,000 से ज़्यादा लोग विस्थापित हैं. 30 अप्रैल तक कांगपोकपी में सबसे अधिक 15,694 विस्थापित लोग थे, इसके बाद बिष्णुपुर में 10,092 और चूड़ाचांदपुर में 6,365 लोग राहत शिविरों में रह रहे थे.
आरटीआई जवाब में राहत शिविरों और बस्तियों में 25 अप्राकृतिक मौतों का भी ज़िक्र है. चूड़ाचांदपुर में अधिकारियों ने ऐसी छह मौतों की सूचना दी, जिनमें डूबने की चार घटनाएं, बिजली का झटका लगने से एक मौत और यौन उत्पीड़न का एक मामला शामिल है, जिसमें आरोपी को गिरफ्तार किया गया था.
जिला अधिकारियों ने आरटीआई आवेदक को बताया कि इन घटनाओं के बाद काउंसलिंग और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए थे.
इंफाल पश्चिम में चार अप्राकृतिक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें फांसी लगाने के दो मामले, एक ओवरडोज़ और एक गोली लगने से हुई मौत शामिल है.
दस्तावेज़ों में विस्थापित परिवारों के सामने आ रही स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है. इंफाल पूर्व में शिविर में रहने वाले 217 लोगों को गंभीर या लाइलाज बीमारियां होने की बात सामने आई, जबकि इंफाल पश्चिम में ऐसे 41 और बिष्णुपुर में 26 मरीज़ पाए गए.
ज्ञात हो कि 3 मई 2023 को पहाड़ी ज़िलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद भड़की हिंसा के कारण मेईतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच बड़े पैमाने पर झड़पें हुईं थीं. इस हिंसा में 250 से ज़्यादा लोग मारे गए और हज़ारों लोग अपने घरों से बेघर हो गए.
इसके बाद राज्य जातीय आधार पर बुरी तरह बंटा हुआ है; सुरक्षा संबंधी चिंताओं और किसी राजनीतिक समाधान के अभाव के कारण कई विस्थापित परिवार अपने मूल घरों को नहीं लौट पा रहे हैं. हिंसा के शुरुआती दौर में बनाए गए राहत शिविरों में अभी भी हज़ारों लोग रह रहे हैं.
