एटीएम संगठन ने एसबीआई से मांगा सौ करोड़ रुपये का मुआवज़ा, कहा- छोटे शहरों में नहीं दिया कैश

एटीएम इंडस्ट्री के संगठन सीएटीएमआई ने कहा कि छोटे शहरों और क़स्बों में स्थित एटीएम में नकदी की कमी के कारण उद्योग पर दबाव है. सबसे बड़ी बैंकिंग कंपनी होने के नाते एसबीआई को 100 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए.

Allahabad: A man stand next to an out-of-service Automated Teller Machine (ATM) in Allahabad on Wednesday. PTI Photo (PTI4_18_2018_000120B)
(प्रतीकात्मक फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: एटीएम इंडस्ट्री के संगठन- सीएटीएमआई ने देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई से 100 करोड़ रुपये का मुआवज़ा मांगा है. उनका कहना है कि सरकारी बैंक ने अपने एटीएम नेटवर्क में पर्याप्त कैश नहीं रखा, जिससे उन्हें नुकसान हुआ.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शुक्रवार (5 जून) को एसबीआई और आरबीआई के साथ हुई बैठक में सीएटीएमआई ने यह मुद्दा उठाया. संगठन ने यह भी कहा कि छोटे शहरों और कस्बों में स्थित एटीएम में नकदी की कमी के कारण उद्योग पर दबाव है.

सीएटीएमआई के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि एसबीआई बड़ी मात्रा में नकदी को टियर-1 शहरों के एटीएम की ओर भेज रहा है, जिसके कारण टियर-2 और टियर-3 शहरों में नकदी की कमी हो रही है और बड़े पैमाने पर एटीएम बंद होने का खतरा बढ़ गया है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले हफ़्ते सीएटीएमआई ने इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) को पत्र लिखकर एटीएम मशीनों में कैश की कमी की ओर इशारा किया था. उस पत्र में इस बात पर ज़ोर दिया गया था कि एटीएम को ज़रूरत का सिर्फ़ 55-65% कैश ही मिल रहा है.

यह स्थिति तब है जब 2022 से ग्राहकों के लिए मुफ्त सीमा समाप्त होने के बाद एटीएम से नकदी निकालने पर शुल्क लगभग 20 से 28 रुपये प्रति ट्रांज़ैक्शन (18 प्रतिशत जीएसटी सहित) तक पहुंच चुका है.

यह तब हो रहा है जब बैंकिंग सिस्टम में कुल मिलाकर कैश की उपलब्धता तीन गुना बढ़ गई है. एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, कैश की उपलब्धता वर्ष 2017 में लगभग 13 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 41 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गई है, लेकिन डिजिटल ट्रांज़ैक्शन के कारण एटीएम का महत्व कम हो गया है. इस संदर्भ में एटीएम के इस्तेमाल पर लगने वाले ज़्यादा शुल्क (जिसे बैंकिंग सेक्टर में इंटरचेंज चार्ज कहा जाता है) से एटीएम-लेवल पर ज़्यादा कमाई नहीं हुई है.

ग्राहक जब एटीएम से नकदी निकालते हैं या बैलेंस जांचते हैं, तो उनसे वसूला गया शुल्क बैंकों के माध्यम से सेवा प्रदाताओं तक पहुंचता है ताकि संचालन लागत पूरी की जा सके. लेकिन डिजिटल भुगतान बढ़ने और एटीएम संचालन व रखरखाव की लागत बढ़ने से यह व्यवस्था दबाव में आ गई है.

सीएटीएमआई के अनुसार, अगर एटीएम में कैश की उपलब्धता पर और दबाव पड़ता है, तो उन्हें इंटरचेंज चार्ज का नुकसान होता है. स्थिति इस कारण भी गंभीर हो गई है कि देशभर में एटीएम की संख्या लगातार घट रही है. साथ ही बैंकों को प्रत्येक एटीएम पर आरबीआई द्वारा निर्धारित सुरक्षा और सेवा मानकों को पूरा करने में भी कठिनाई हो रही है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में एटीएम की संख्या 2023-24 में 2,53,000 से ज़्यादा थी, जो 2024-25 में घटकर लगभग 2,51,000 रह गई.

नोटबंदी के बाद के वर्षों में एटीएम की संख्या में गिरावट तेज हुई. उदाहरण के लिए, रेलवे स्टेशनों पर एटीएम लगाने के लिए भारतीय रेलवे द्वारा निकाले गए टेंडरों में अपेक्षित रुचि नहीं दिखाई गई. रेलवे के लिए एटीएम आय का एक स्रोत हैं, इसलिए उसने बाद में नियमों में बदलाव कर बैंकों को स्टेशन परिसरों में एटीएम लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की कोशिश की.

सीएटीएमआई ने दिसंबर 2018 में भी कहा था कि बढ़ती अनुपालन (कम्प्लायंस) लागत के कारण एटीएम उद्योग पर गंभीर दबाव पड़ रहा है.

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) ने मई 2025 से एटीएम ट्रांज़ैक्शन फीस 21 रुपये से बढ़ाकर 23 रुपये (अधिकतम सीमा) कर दी. एटीएम सर्विस प्रोवाइडर एजीएस ट्रांसैक्ट टेक्नोलॉजीज़ 2025 में देनदारों को 38.9 करोड़ रुपये का भुगतान करने में नाकाम रही. सीएटीएमआई ने एसबीआई को लिखे पत्र में इसे एटीएम इंडस्ट्री में संकट की ‘चेतावनी’ बताया है.

आरबीआई ने बताया कि ग्राहक हर महीने अपने बैंक के एटीएम से पांच मुफ़्त ट्रांज़ैक्शन (वित्तीय और गैर-वित्तीय दोनों) करने के हकदार बने रहेंगे. वे दूसरे बैंकों के एटीएम से भी मुफ़्त ट्रांज़ैक्शन कर सकते हैं – महानगरों में तीन और गैर-महानगरीय क्षेत्र में पांच.

सीएटीएमआई का कहना है कि सबसे बड़ी बैंकिंग कंपनी होने के नाते एसबीआई को 100 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई करनी चाहिए.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, एटीएम इंडस्ट्री ने दिसंबर 2018 में अनुपालन लागत को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि इससे देश के आधे एटीएम बंद हो जाएंगे; साथ ही, दिसंबर 2021 में उसने यह भी कहा था कि बैंक एटीएम के लिए ज़रूरी कैश का बमुश्किल ‘30%’ ही सप्लाई कर रहे थे.