नई दिल्ली: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-6) की रिपोर्ट (फैक्ट शीट) से कुछ महत्वपूर्ण संकेतकों के ‘गायब’ होने को लेकर चिंताएं सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्टीकरण जारी किया है.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में जारी एनएफएचएस-6 रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण संकेतक, जैसे स्वच्छ ईंधन, स्वच्छता और एनीमिया आदि को शामिल न करने पर सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने केंद्र सरकार की काफ़ी आलोचना की थी.
उल्लेखनीय है कि इन संकेतकों के आधार पर उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी सरकारी योजनाओं के प्रभाव का आकलन किया जाता रहा है.
इसके जवाब में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि बीते दिनों जारी हुई एनएफएचएस-6 की फैक्ट शीट पूरी रिपोर्ट नहीं है. उसे रिपोर्ट का सिर्फ शुरुआती चरण माना जाना चाहिए.
एनीमिया के डेटा को शामिल नहीं करने पर मंत्रालय ने कहा कि पिछले सर्वेक्षणों में इस्तेमाल की गई कैपिलरी ब्लड सैंपलिंग तकनीक की सटीकता को लेकर चिंताएं थीं, इसलिए इसमे खून (हीमोग्लोबिन) की जांच शामिल नहीं की गई है.
अधिकारियों ने बताया कि अब एनीमिया के अनुमानों को इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के डाइट और बायोमार्कर सर्वे में शामिल किया जाएगा. इस सर्वे में ‘वेन्स ब्लड सैंपल’ (नस से लिए गए खून के नमूने) का इस्तेमाल होता है और उम्मीद है कि इसके नतीजे ज़्यादा सटीक होंगे.
उल्लेखनीय है कि सरकार की ओर से यह स्पष्टीकरण ऐसे समय में सामने आया है जब एनएफएचएस-6 फैक्ट शीट से इन अहम संकेतकों के गायब होने की खबरों के बाद सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है.
मालूम हो कि इस रिपोर्ट में स्वास्थ्य, पोषण और जनसंख्या से जुड़े 101 अहम पैरामीटर शामिल होते हैं. ऐसे में अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि एनएफएचएस-6 से अहम संकेतकों को हटा दिया गया है.
अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट शीट डेटा जारी करने का सिर्फ़ पहला चरण है, न कि एनएफएचएस-6 की अंतिम रिपोर्ट.
अखबार के अनुसार, उन्होंने आगे कहा कि बाद में जारी होने वाली विस्तृत राष्ट्रीय रिपोर्ट में अतिरिक्त संकेतक, विश्लेषण और कार्यप्रणाली से जुड़ी जानकारी शामिल होगी.
गौरतलब है कि एनएफएचएस- जो देश का सबसे बड़ा हेल्थ सर्वे है, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की देखरेख में ‘इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फॉर पॉपुलेशन साइंसेज’ (आईआईपीएस) द्वारा किया जाता है. एनएफएचएस-6 सर्वे 2023-24 में और एनएफएचएस-5 सर्वे 2019-21 में किया गया था. एनएफएचएस-6 की फैक्टशीट 29 मई, 2026 को जारी की गई थीं.
मालूम हो कि इससे पहले द वायर ने रिपोर्ट किया था कि एनएफएचएस-6 में कुछ अहम संकेतक शामिल नहीं हैं, जिनसे नरेंद्र मोदी सरकार की कम से कम दो प्रमुख योजनाओं के प्रदर्शन का पता चल सकता था.
गायब संकेतकों में से एक खाना पकाने के लिए साफ़ ईंधन की उपलब्धता से जुड़ा है, जिसका डेटा जारी की गई रिपोर्ट में शामिल नहीं है. इसके अलावा जन्म के समय लिंगानुपात और शिशु व बाल मृत्यु दर के आंकड़े भी गायब हैं .
हालांकि, सरकार के डेटा इकट्ठा करने के दूसरे तरीकों में ये दोनों बातें दिखाई देती हैं.
