नई दिल्ली: मणिपुर में जातीय तनाव के बीच नगा समूहों ने मंगलवार (9 जून) को लगभग एक महीने से बंधक बनाकर रखे गए 14 कुकी लोगों को रिहा कर दिया. हालांकि, उन छह नगाओं, जिन्हें कुकी लोगों ने बंधक बना रखा था- उनकी स्थिति के बारे में कोई जानकारी नहीं है.
मणिपुर पुलिस ने मंगलवार को बताया कि 14 कुकी लोगों को नगा-बहुल सेनापति जिले से मुक्त कराया गया और मेडिकल जांच के बाद उन्हें कांगपोकपी जिले के उनके ताफौ कुकी गांव वापस भेज दिया गया.
यूनाइटेड नगा काउंसिल के अध्यक्ष एन. लोरहो ने पत्रकारों से कहा कि 14 कुकी लोगों को इसलिए रिहा किया गया क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नगालैंड के मुख्यमंत्री के माध्यम से आश्वासन दिया था कि सरकार छह लापता नगाओं का पता लगाने के लिए प्रयास करेगी. उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘हमने मानवीय आधार पर पहला कदम उठाया है.’
मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई. खेमचंद सिंह और उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन, जो कुकी समुदाय से हैं, ने 14 कुकी लोगों की रिहाई का स्वागत किया और उन्हें मुक्त करने के लिए नगा समूहों की सराहना की. हालांकि, दोनों नेताओं ने अपने बयानों में छह लापता नगाओं का कोई ज़िक्र नहीं किया.
कुकी और नगा समूहों ने 13 मई को एक-दूसरे के समुदाय के लोगों को प्रतिशोधात्मक कार्रवाई के तहत बंधक बनाया था. यह कदम दोनों पक्षों के बीच बढ़ते जातीय हिंसा के बीच उठाया गया था, जो उसी दिन कांगपोकपी में तीन थाडो चर्च नेताओं पर घात लगाकर किए गए हमले और उनकी हत्या के बाद और भड़क गया था. कुछ लोगों का मानना है कि थाडो समुदाय कुकी-जो समुदाय का ही हिस्सा है, लेकिन दूसरे लोग इस बात से इनकार करते हैं.
दोनों पक्षों ने दो दिन बाद 14-14 बंधकों को रिहा कर दिया था, लेकिन नगा समूहों ने 14 कुकी लोगों को बंधक बनाए रखा था. उन्होंने बाकी कुकी बंधकों को 1 जून को रिहा करने की योजना बनाई थी, लेकिन बंधकों की अदला-बदली की मांग कर रहे नगा संगठनों के विरोध को देखते हुए इसे टाल दिया गया.
इस बीच, कुकी समूहों ने इस बात से इनकार किया कि उन्होंने किसी भी अन्य नगा व्यक्ति को बंधक बना रखा है, जबकि नगा समुदाय के छह सदस्य अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो और मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने भी मंगलवार को कुकी बंधकों की रिहाई का स्वागत किया और साथ ही छह नगाओं को भी वापस लाने की मांग की.
यह बंधक संकट मणिपुर के कुकी और नगा समुदायों के बीच चल रहे संघर्ष की पृष्ठभूमि में सामने आया है. यह संघर्ष फरवरी में हुई एक झड़प से शुरू हुआ था, लेकिन बाद में हिंसा में बदल गया. दोनों समुदायों से जुड़े लोगों ने एक-दूसरे के घरों में आग लगा दी और यहां तक कि म्यांमार सीमा पार से उग्रवादी हमलों के आरोप भी लगाए गए.
ये तनाव मणिपुर में कुकी और मेईतेई समुदायों के बीच चल रहे संघर्ष के साथ-साथ हो रहे हैं. 3 मई, 2023 को शुरू हुआ यह संघर्ष अभी भी सुलग रहा है और समय-समय पर हिंसा का रूप ले लेता है. इस संकट ने दोनों समुदायों को भौगोलिक रूप से अलग कर दिया है और सुरक्षा बलों की निगरानी वाले ‘बफर ज़ोन’ के कारण वे एक-दूसरे से लगभग पूरी तरह अलग-थलग हो गए हैं.
