चार साल से अधिक समय से जेल में बंद कश्मीरी एक्टिविस्ट ख़ुर्रम परवेज़ को एनआईए केस में ज़मानत मिली

कश्मीर के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ को दिल्ली हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है. एनआईए ने परवेज़ के कार्यालय पर छापेमारी के बाद 22 नवंबर 2021 को उन्हें यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया था, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संगठनों ने आपत्ति जताई थी.

खुर्रम परवेज. (फोटो साभार: Facebook/UN Geneva)

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार (10 जून) को कश्मीर के जाने माने मानवाधिकार कार्यकर्ता ख़ुर्रम परवेज़ को ज़मानत दे दी. यह राहत उस केस से जुड़ी है, जिसमें राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने परवेज़ के खिलाफ ‘गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम’ (यूएपीए) के तहत कार्रवाई की थी.

मालूम हो कि एनआईए ने परवेज़ के कार्यालय पर छापेमारी के बाद 22 नवंबर 2021 को उन्हें यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया था, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र समेत कई वैश्विक संगठनों ने आपत्ति जताई थी.

लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंदर दुडेजा की डिवीज़न बेंच ने परवेज़ की उस अपील को मंज़ूरी दे दी, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट के 17 दिसंबर, 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उन्हें ज़मानत देने से इनकार कर दिया गया था.

बेंच ने कहा, ‘हमने कई शर्तों के साथ ज़मानत दी है.’

फिलहाल पूरे आदेश का इंतज़ार है.

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, ख़ुर्रम के ख़िलाफ़ यूएपीए के तहत गंभीर धाराएं लगाई गई हैं. उन पर यूएपीए की धारा 17 (आतंकी गतिविधियों के लिए फ़ंड जुटाना), धारा 18 (साज़िश रचना) और 18B (आतंकी गतिविधि के लिए किसी व्यक्ति या व्यक्तियों को तैयार या बहाल करना), धारा 38 (किसी आतंकी संगठन का सदस्य होना) और धारा 40 (आतंकी संगठन के लिए फंड जुटाना) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है.

2021 से पहले ख़ुर्रम परवेज़ को वर्ष 2016 में भी उस समय गिरफ़्तार किया गया था जब कश्मीर में बुरहान वानी की एक मुठभेड़ में मौत के बाद कश्मीर में कई दिनों तक हिंसा जारी रही थी. उस समय ख़ुर्रम संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के सेशन में भाग लेने के लिए जेनेवा जा रहे थे, तभी उन्हें दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर गिरफ़्तार कर लिया गया था.

तब महबूबा मुफ़्ती मुख्यमंत्री थीं और ख़ुर्रम पर जन सुरक्षा कानून (पीएसए) लगाया गया था. ख़ुर्रम को दो महीने से ज़्यादा जेल में रहना पड़ा था. बाद में अदालत से उन्हें राहत मिली थी. कोर्ट के आदेश पर उनके ख़िलाफ़ लगे पीएसए को हटा लिया गया.

इससे पहले साल 2004 में ख़ुर्रम परवेज़ की गाड़ी उत्तरी कश्मीर के लोलाब इलाके में उस समय विस्फोट की ज़द में आ गई थी, जब वह उस समय हो रहे चुनाव की निगरानी कर रहे थे. उस विस्फोट में उनकी एक टांग कट गई, उनकी एक साथी आसिया जीलानी गंभीर रूप से ज़ख़्मी हो गई थीं जिनकी बाद में मौत हो गई थी.

उल्लेखनीय है कि 2023 में परवेज़ को 2023 के मार्टिन एनल्स अवॉर्ड के तीन विजेताओं में से एक चुना गया था. यह अवॉर्ड, जो एक मशहूर ब्रिटिश मानवाधिकार कार्यकर्ता के नाम पर रखा गया है, उन ‘बेहतरीन कार्यकर्ताओं को सम्मानित करता है जिन्होंने मानवाधिकारों के क्षेत्र में नई पहल की है.’

इससे पहले वर्ष 2006 में ख़ुर्रम को रीबॉक ह्यूमन राइट्स अवार्ड से भी नवाज़ा गया था. ये अवार्ड तीस वर्ष की उम्र के अंदर के उस व्यक्ति को दिया जाता है जिसने अहिंसा के रास्ते पर चलते हुए मानवाधिकार के लिए लड़ाई लड़ी हो.