दिल्ली सरकार ने हिंदी साहित्यिक सम्मानों का नाम बदलकर सावरकर, भाजपा नेताओं के नाम पर रखा

दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने शीर्ष साहित्यिक सम्मानों का नाम बदलकर आरएसएस और भाजपा से जुड़े व्यक्तियों के नाम पर रखा है. वीडी सावरकर और अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर पुरस्कार के नामकरण के साथ ही अकादमी ने सर्वोच्च सम्मान ‘हिंदी अकादमी शलाका सम्मान’ के नाम में पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम जोड़ा है.

बाएं से दाएं: वीर सावरकर, अटल बिहारी वाजपेयी और विजय कुमार मल्होत्रा. (फोटो: विकीमीडिया कॉमन्स)

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार की हिंदी अकादमी ने अपने वार्षिक साहित्यिक पुरस्कार कार्यक्रम में बड़ा बदलाव करते हुए कई मौजूदा पुरस्कारों का नाम हिंदुत्व विचारधारा से जुड़े व्यक्तित्वों और स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रख दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, अकादमी ने पुरस्कारों के नाम और कुछ मामलों में उनकी पुरस्कार राशि में भी परिवर्तन किया है.

आरएसएस के विचारक विनायक दामोदर सावरकर के नाम पर रखा गया ‘वीर सावरकर सम्मान’ राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में योगदान के लिए दिया जाएगा और इसके साथ दो लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी. वहीं, ‘अटल बिहारी वाजपेयी संस्कृति तथा ज्ञान परंपरा सम्मान’ भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपराओं के प्रचार-प्रसार के लिए किए गए कार्यों को सम्मानित करेगा. इस सम्मान के साथ पांच लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी.

अकादमी के सर्वोच्च सम्मान ‘हिंदी अकादमी शलाका सम्मान’ का नाम बदलकर ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय शलाका सम्मान’ कर दिया गया है. इसके साथ मिलने वाली पुरस्कार राशि भी पांच लाख रुपये से बढ़ाकर सात लाख रुपये कर दी गई है.

इसके अलावा, ‘हिंदी सेवी सम्मान’ का नाम बदलकर भाजपा के वरिष्ठ नेता विजय कुमार मल्होत्रा के नाम पर रखा गया है, जिनका पिछले वर्ष सितंबर में निधन हो गया था. यह सम्मान हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और सेवा के लिए दिया जाएगा.

महिला साहित्यकारों के लिए दिया जाने वाला पुरस्कार, जो पहले भ्रष्टाचार विरोधी कार्यकर्ता संतोष कोली की स्मृति में स्थापित था, अब मराठा हिंदू शासक रानी अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर होगा. आम आदमी पार्टी (आप) सरकार ने 2013 में सड़क दुर्घटना में संतोष कोली की मृत्यु के बाद यह पुरस्कार शुरू किया था. राष्ट्रीय चेतना के क्षेत्र में योगदान के लिए दिए जाने वाले इस सम्मान के साथ दो लाख रुपये की राशि प्रदान की जाती है.

एक-एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि वाले सम्मानों में ‘पंडित मदन मोहन मालवीय हिंदी साहित्यकार सम्मान’, बाल साहित्य के लिए ‘बाबा जोरावर सिंह सम्मान’ और ‘स्वामी विवेकानंद युवा प्रतिभा सम्मान’ शामिल हैं. हिंदी पत्रकारिता में योगदान देने वालों को ‘विद्यानिवास मिश्र सम्मान’ के तहत एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाएगी.

अन्य सम्मानों में अनुवाद के लिए ‘निर्मल वर्मा सम्मान’, ‘रामचंद्र शुक्ल हिंदी उत्कर्ष सम्मान’, लोक लेखन के लिए ‘वासुदेव शरण अग्रवाल सम्मान’, सामाजिक विज्ञान विषय में लेखन के लिए ‘देवेंद्र स्वरूप सम्मान’, महिला लेखिकाओं के लिए ‘मृदुला सिन्हा सम्मान’ और विभिन्न साहित्यिक विधाओं में योगदान के लिए ‘नरेंद्र कोहली सम्मान’ शामिल हैं.

कुल मिलाकर 16 पुरस्कार श्रेणियां निर्धारित की गई हैं, जिनकी पुरस्कार राशि एक लाख रुपये से लेकर सात लाख रुपये तक है. अकादमी ने शैक्षणिक वर्ष 2022-23, 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के लिए पात्र साहित्यकारों से नामांकन मांगा हैं. नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 23 जून 2026 है. सभी पुरस्कारों का विवरण अकादमी की वेबसाइट पर उपलब्ध कराया गया है.

हिंदी अकादमी की स्थापना वर्ष 1981 में हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से एक स्वायत्त संस्था के रूप में की गई थी. अकादमी ‘साहित्यकार सम्मान योजना’ भी संचालित करती है, जिसके तहत दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के लेखकों, कवियों और पत्रकारों को सम्मानित किया जाता है.