नई दिल्ली: हाल के वर्षों की सबसे भीषण विमान दुर्घटनाओं में से एक के एक साल बाद भी एयर इंडिया के अहमदाबाद विमान हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों को यह पता नहीं चल पाया कि आखिर बोइंग 787 ड्रीमलाइनर उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद क्यों दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) शुक्रवार (12 जून) को एआई-171 उड़ान दुर्घटना पर अपनी अंतरिम रिपोर्ट जारी करते हुए अपनी प्रगति साझा की है. हालांकि यह दस्तावेज़ इस त्रासदी के कारणों का खुलासा नहीं करता क्योंकि विमान के इंजनों की जांच अभी भी जारी है.
गुरुवार (11 जून) को प्रकाशित रॉयटर्स की एक रिपोर्ट भी इस दावे की पुष्टि करती है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जांचकर्ता अंतिम रिपोर्ट जारी करने में देरी कर सकते हैं, क्योंकि दुर्घटना की जांच के केंद्र में रहे जीई एयरोस्पेस द्वारा निर्मित इंजनों का विश्लेषण अभी लंबित है. 12 जून 2025 को हुई इस दुर्घटना में 260 लोगों की मौत हुई थी.
एएआईबी की अपडेट अब तक किए गए कार्यों और उन क्षेत्रों का विवरण है, जिनकी जांच अभी जारी है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक सूत्र ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, ‘मूल रूप से यह ऐसा अपडेट है जिसे जांच एजेंसियों को तब जारी करना होता है जब एक वर्ष के भीतर अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की जा सकती.’
उन्होंने कहा, ‘यह बताती है कि जांच किस स्थिति में है और अब तक कौन-कौन सा काम पूरा हो चुका है. लेकिन इसे ऐसी रिपोर्ट नहीं माना जाना चाहिए जो दुर्घटना का कारण स्थापित कर दे.’
यह अपडेट अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के अनुबंध-13 के तहत जारी किया जा रहा है, जिसके अनुसार किसी भी विमान दुर्घटना के एक वर्ष के भीतर या तो अंतिम रिपोर्ट या फिर प्रगति रिपोर्ट जारी करना अनिवार्य है.
खबरों के अनुसार, जांचकर्ताओं ने अप्रैल में इंजन संबंधी जांच किए थे और मई में इंजन प्रबंधन इकाई का अध्ययन करने के लिए फ्रांस का दौरा किया था. ब्लूमबर्ग न्यूज ने गुरुवार (11 जून) को रिपोर्ट किया कि अमेरिका भेजे गए इंजनों के मूल्यांकन के पूरा होने के लगभग तीन महीने बाद अंतिम रिपोर्ट जारी होने की संभावना है.
भारतीय पायलट संघ ने अंतरिम अपडेट का विरोध किया
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स ने गुरुवार (11 जून) को मंत्रालय से अनुरोध किया कि वह यह अपडेट जारी न करे. संघ का कहना था कि इससे दुर्घटना को लेकर भ्रम कम होने के बजाय और बढ़ेगा.
संघ के अध्यक्ष सीएस रंधावा ने दुर्घटना की पहली बरसी से पहले पत्रकारों से कहा, ‘इससे और अधिक अटकलें तथा गलतफहमियां पैदा होंगी. हमने भारत सरकार और एएआईबी से अनुरोध किया है कि वे कोई अंतरिम रिपोर्ट जारी न करें.’
रॉयटर्स के अनुसार, पायलट संघ पहले भी बोइंग और एयर इंडिया से विमान से जुड़ा अधिक तकनीकी डेटा मांग चुका है, ताकि एएआईबी द्वारा जांच की जा रही ‘पायलट आत्महत्या की थ्योरी’ का खंडन किया जा सके.
यह विवाद एएआईबी की पिछले वर्ष जारी प्रारंभिक रिपोर्ट से पैदा हुआ, जिसने कई तरह के कॉन्सपिरेसी थ्योरी को जन्म दिया. इनमें अधिकांश में मानवीय हस्तक्षेप की आशंका जताई गई थी. संघ को आशंका है कि यदि नया अपडेट भी असली कारण बताए बिना जारी किया गया, तो फिर वैसी ही अटकलें शुरू हो जाएंगी.
अंतिम 32 सेकेंड के बारे में क्या पता है?
12 जून 2025 को 08:08:39 GMT पर बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर अहमदाबाद के रनवे से उड़ान भरकर लंदन के गैटविक हवाई अड्डे की ओर रवाना हुआ. विमान में 242 लोग सवार थे.
हवा में उठने के मात्र तीन सेकेंड के भीतर दोनों इंजनों के फ्यूल-कंट्रोल स्विच तेजी से ‘रन’ से ‘कटऑफ’ मोड में चले गए. हवाई अड्डे की सीमा से बाहर निकलने से पहले ही विमान की ऊंचाई कम होने लगी. ईंधन का प्रवाह बहाल करने और इंजनों को दोबारा चालू करने की कोशिशें की गईं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. विमान के पास संभलने के लिए न तो पर्याप्त ऊंचाई बची थी और न ही समय.
इसके बाद विमान बी.जे. मेडिकल कॉलेज के छात्रावास परिसर से टकरा गया. दुर्घटना में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 की मौत हो गई, जबकि जमीन पर मौजूद 19 छात्रों की भी जान चली गई.
एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर में दोनों पायलटों के बीच एक संक्षिप्त बातचीत दर्ज हुई थी. एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि ईंधन आपूर्ति क्यों बंद कर दी, जबकि दूसरे पायलट ने ऐसा करने से इनकार किया.
इस बातचीत और रिपोर्ट में यह संकेत कि कोई तकनीकी या डिजाइन संबंधी खामी नहीं मिली थी, कई महीनों तक अटकलों का कारण बना रहा. पायलट संगठनों ने तकनीकी खराबी की संभावना पूरी तरह खारिज किए बिना जानबूझकर मानवीय हस्तक्षेप के दावों का विरोध किया.
एआई-171 का विवादास्पद तकनीकी इतिहास
जांच का एक और अहम पहलू इस विमान का चिंताजनक इतिहास है. पूर्व बोइंग प्रबंधक एड पियर्सन के नेतृत्व वाले फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (एफएएस) ने जनवरी 2026 में अमेरिकी सीनेट को एक रिपोर्ट सौंपा था. इसमें आरोप लगाया गया कि एआई-171 में तकनीकी खराबी का एक रिकॉर्डेड इतिहास रहा है, जो 1 फरवरी 2014 – यानी भारत में इसके आने के दिन से ही शुरू हो गया था.
द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, दस्तावेज़ों में इंजीनियरिंग, निर्माण, गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव से जुड़ी बार-बार होने वाली खराबियों का उल्लेख है, जिनमें उड़ान के दौरान लगी आग की घटनाएं भी शामिल हैं.
केवल 2022 में ही विमान में दो बार आग लगी. जनवरी 2022 की आग इतनी गंभीर थी कि विमान के बिजली डिस्ट्रीब्यूशन पैनल को पूरी तरह बदलना पड़ा. दूसरी घटना अप्रैल 2022 में हुई, जो लैंडिंग गियर इंडिकेशन सिस्टम से जुड़ी थी.
एफएएस ने विमान के 11 साल के कार्यकाल के दौरान कई तरह की समस्याओं की लिस्ट बनाई, जिसमें इलेक्ट्रिकल सिस्टम की खराबी, तारों की क्षति, सॉफ्टवेयर में खराबी, धुआं निकलना, शॉर्ट सर्किट और पुर्जों का बहुत ज्यादा गर्म होना शामिल था.
रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि सरकार, बोइंग और एयर इंडिया के अधिकारी ‘महत्वपूर्ण सुरक्षा जानकारी जानबूझकर छिपा रहे हैं’ और इस कथित ‘आपराधिक लीपापोती’ की जांच की मांग की गई.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि एयर इंडिया के अन्य 787 विमानों में भी इलेक्ट्रिकल सिस्टम के खराब होने के संकेत मिले हैं.
एयर इंडिया का एक और ड्रीमलाइनर उड़ान से रोका गया
जैसा कि द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था, जांच में एक महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब 1 फरवरी 2026 को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे से बेंगलुरु जाने वाली एयर इंडिया की एक अन्य 787 ड्रीमलाइनर उड़ान को रोक दिया गया.
उड़ान से पहले जांच के दौरान उसके एक फ्यूल स्विच दो बार बिना जरूरी ‘लिफ्ट एक्शन’ के ‘रन’ से ‘कटऑफ’ मोड में चला गया. इस घटना ने उस धारणा को चुनौती दी, जिसके अनुसार, एआई-171 दुर्घटना पायलट की मैन्युअल कार्रवाई के कारण हुआ था.
टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक सीनियर कमांडर के हवाले से कहा कि यह घटना उस धारणा को मूल रूप से चुनौती देती है कि दुर्घटना में स्विच का बदलना किसी व्यक्ति की जानबूझकर की गई कार्रवाई थी. उनके अनुसार जंग लगना या मैकेनिकल डिटेंट फेलियर इसके संभावित कारण हो सकते हैं.
विमान सुरक्षा विशेषज्ञ कैप्टन अमित सिंह ने भी कहा कि 2018 में अमेरिकी विमानन नियामकों द्वारा बोइंग 787 के फ्यूल स्विच को लेकर जारी चेतावनी का कभी समुचित समाधान नहीं किया गया. एयर डेक्कन के संस्थापक कैप्टन जीआर गोपीनाथ ने भी एयर इंडिया की लंबे समय से चली आ रही रखरखाव संबंधी समस्याओं और टाटा समूह के अधिग्रहण के बाद चार अलग-अलग एयरलाइनों के विलय से पैदा हुई जटिलताओं की ओर इशारा किया था, क्योंकि उन सभी के स्टैंडर्ड अलग-अलग थे.
खास बात यह है कि एएआईबी की प्रारंभिक रिपोर्ट में बोइंग या जीई एयरोस्पेस के खिलाफ किसी सुरक्षा कार्रवाई का उल्लेख नहीं किया गया था.
मृतकों के परिवारों से कानूनी अधिकार छोड़ने को कहा गया
जीई एयरोस्पेस इंजनों की जांच का अंतिम चरण अभी पूरा नहीं हुआ है और उसके बिना अंतिम रिपोर्ट जारी नहीं की जा सकती, दुर्घटना में मारे गए लोगों के परिवारों से एयर इंडिया द्वारा मुआवजा प्राप्त करने के लिए ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने को कहा गया है, जिनसे वे मौजूदा और भविष्य के कानूनी अधिकारों को छोड़ देंगे.
दुर्घटना में मारे गए पूर्व गुजरात मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की पुत्री राधिका मिश्रा ने टाटा संस और एयर इंडिया के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन को ईमेल लिखकर पूछा कि जांच पूरी होने से पहले परिवारों से अंतिम समझौता दस्तावेजों पर हस्ताक्षर क्यों कराए जा रहे हैं.
मुआवजा पाने के लिए ज़रूरी ‘वेवर’ (अधिकार छोड़ने का समझौता) न सिर्फ़ एयर इंडिया, बल्कि इसमें शामिल किसी भी दूसरी पार्टी – जैसे बोइंग, जीई एयरोस्पेस, सैफ़्रान, हनीवेल, सरकारी एजेंसियों या एयरपोर्ट ऑपरेटरों – के ख़िलाफ़ मौजूदा और भविष्य के कानूनी दावों पर भी लागू होता है.
हालांकि एयर इंडिया का कहना है कि इस ऑफर को स्वीकार करने की कोई समयसीमा नहीं है, लेकिन मिश्रा का ईमेल इस बात पर ज़ोर देता है कि शामिल पार्टियों को बेगुनाह साबित करने और किसी भी अथॉरिटी की मिलीभगत साबित होने से पहले ही मामले को पूरी तरह बंद करने की कोशिश की जा रही है.
दुर्घटना के एक साल बाद भी 260 मृतकों के परिवारों के लिए – जिनमें से कई अब भी अपने परिजनों के अवशेषों की अंतिम पहचान की प्रतीक्षा कर रहे हैं – सच्चाई सामने नहीं आई है. जारी किया गया अपडेट भी उन्हें कोई राहत नहीं देता, क्योंकि अंतिम निष्कर्ष अब भी लंबित है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)
