नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर एक दर्जन से ज़्यादा जगहों पर बांग्लादेश के बॉर्डर गार्ड्स (बीजीबी) ने हथियारबंद ग्रामीण सुरक्षा स्वयंसेवकों (वॉलंटियर) को तैनात किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब भाजपा सरकारें बिना दस्तावेज़ वाले उन लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई कर रही हैं जिन पर अवैध प्रवासी होने का शक है.
अख़बार के अनुसार, पिछले हफ़्ते सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) जवानों ने बंगाल और त्रिपुरा में कई जगहों पर बांग्लादेशी ग्रामीणों को बीजीबी जवानों की मदद करते देखा है. ये ग्रामीण सीमा के अपनी तरफ़ रहकर बाड़ लगाने के काम पर नज़र रख रहे हैं, जो बंगाल के नौ अलग-अलग ज़िलों में शुरू हुआ है.
इनके निगरानी की खबरें मुख्य रूप से बांग्लादेश के चापईनावाबगंज, ठाकुरगांव और दिनाजपुर ज़िलों से मिली हैं- ये सभी बंगाल के साथ सीमा साझा करते हैं.
बीएसएफ अधिकारियों ने अखबार को यह भी बताया कि बांग्लादेश के इन ज़िलों में एक दर्जन से ज़्यादा जगहों पर बांग्लादेशी गृह मंत्रालय ने ‘बांग्लादेश अंसार’ और ‘विलेज डिफेंस पार्टी’ (जो देश की अर्धसैनिक बल हैं) के जवानों को तैनात किया है, ताकि लोगों को वापस बांग्लादेश भेजे जाने से रोका जा सके.
बीएसएफ के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर बताया, ‘पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा, दोनों जगहों पर बीएसएफ के जवानों और स्थानीय लोगों ने हथियारबंद ग्रामीणों को देखा है, जो बीजीबी के लिए वॉलंटियर का काम भी कर रहे हैं. सीमा के उस पार मौजूद बांग्लादेशी नागरिकों ने हमारी तरफ के ग्रामीणों को बताया कि तैनाती से पहले बीजीबी ने उन्हें ट्रेनिंग दी थी.’
उन्होंने आगे कहा, ‘ऐसा घुसपैठियों के खिलाफ की गई सख्ती की वजह से हो रहा है, जिसके कारण सैकड़ों बांग्लादेशी नागरिक खुद ही वापस बांग्लादेश भागने की कोशिश कर रहे हैं. बीजीबी ने ग्रामीणों को अलग-अलग शिफ्ट में चौबीसों घंटे सीमा की निगरानी करने और यह पक्का करने के लिए ट्रेनिंग दी है कि उनके अपने नागरिक भी गैर-कानूनी तरीके से देश में वापस न आ सकें.’
उल्लेखनीय है कि सात जून को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा था कि उनकी नई सरकार पहले ही लगभग 4,800 ‘अवैध प्रवासियों’ को वापस भेज चुकी है और 836 अन्य लोगों को अस्थायी डिटेंशन सेंटरों में रखा गया है.
अधिकारी ने बीएसएफ को लगभग 100 किलोमीटर के हिस्से में बॉर्डर पर बाड़ लगाने के लिए ज़मीन भी आवंटित की है.
ज्ञात हो कि भारत की बांग्लादेश के साथ 4,096.70 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जिसमें से पश्चिम बंगाल की सीमा सबसे लंबी 2216.7 किलोमीटर है. दोनों देशों की सीमा के अपने-अपने हिस्से में सुरक्षा चौकियां हैं.
हालांकि, बीजीबी का ग्रामीणों को ट्रेनिंग देना और हथियार मुहैया कराना नियमों के खिलाफ नहीं है, लेकिन उनका आक्रामक रुख भारत-बांग्लादेश सीमा पर हालात को लेकर उनकी चिंता को दिखाता है. यह चिंता हाल के वर्षों में उन लोगों के घुसपैठ की बढ़ती घटनाओं के कारण है जिन्हें मोदी सरकार ने ‘घुसपैठिया’ कहा है.
मालूम हो कि यह मुद्दा पश्चिम बंगाल और असम के विधानसभा चुनावों में प्रचार का एक अहम विषय रहा है. इस बीच केंद्र सरकार ने ऐसी आबादी के आंकड़ों की जांच के लिए एक कमेटी भी बनाई है.
हालांकि, कई भारतीय नागरिकों को भी बांग्लादेशी होने के शक में बांग्लादेश भेजा गया है या हिरासत में लिया गया है. अव्वल शेख और सुनाली खातून का केस ऐसे ही मामलों में शामिल हैं.
द वायर के लिए हाल ही में लिखे एक लेख में आसिफ़ फ़ारुख़ कहते हैं कि इन मामलों को ‘डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट’ (पहचानना, हटाना, निकालना) नीति यानी 3डी पॉलिसी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जो आजकल माइग्रेशन (प्रवास) की राजनीति को आकार दे रही है.
वे कहते हैं, ‘अवैध प्रवास को रोकना राज्य का अधिकार और ज़िम्मेदारी, दोनों है. हालांकि, अगर ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ पॉलिसी को बिना सही जांच-पड़ताल, सबूत, अपनी बात रखने का मौका दिए और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लागू किया जाता है, तो यह संविधान और कानून के शासन के ख़िलाफ़ हो सकता है. राष्ट्रीय सुरक्षा महत्वपूर्ण है, लेकिन साथ ही निर्दोष नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना भी उतना ही ज़रूरी है.’
बांग्लादेशी अधिकारियों के अनुसार, हाल के महीनों में लोगों को सीमा पार धकेलने की कोशिशें काफी बढ़ गई हैं. ‘घुसपैठियों’ की वापसी को लेकर सीमा पर बीएसएफ और बीजीबी के जवानों के बीच कई जगहों पर टकराव की स्थिति बनी है.
घुसपैठियों को लेने से बीजीबी के इनकार के मुद्दे को सुलझाने के लिए दोनों सुरक्षा बलों ने कई जगहों पर कंपनी कमांडर स्तर की फ्लैग मीटिंग भी कीं.
हालांकि, सरकार की एक प्रेस ब्रीफिंग में बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण सलाहकार ज़ाहिद उर रहमान ने घुसपैठियों को वापस भेजने (पुश-इन) के विवाद पर बात की, लेकिन इस बात को खारिज कर दिया कि भारत सरकार जानबूझकर टकराव चाहती है.
उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि भारत सरकार बांग्लादेश के साथ तनाव पैदा करने के लिए ऐसा कर रही है.’
उन्होंने पश्चिम बंगाल के चुनावी अभियान की ओर इशारा करते हुए कहा कि हाल की घटनाएं मतदाताओं से किए गए वादों का ही ‘नतीजा’ लगती हैं.
