मिज़ोरम के मुख्यमंत्री ने एनडीए में शामिल होने की अटकलों को ख़ारिज किया

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) एनडीए में शामिल होने पर विचार नहीं कर रही है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखे जाएंगे, लेकिन पार्टी अपनी स्वतंत्र क्षेत्रीय पहचान और राजनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगी.

मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा. (फोटो साभार: फेसबुक)

नई दिल्ली: मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने बुधवार (24 जून) को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ किसी औपचारिक गठबंधन की अटकलों को खारिज करते हुए अपनी पार्टी ज़ोरम पीपल्स मूवमेंट (जेडपीएम) की स्वतंत्र क्षेत्रीय पहचान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई. उनका यह बयान उन चर्चाओं के बीच आया है जिनमें दावा किया जा रहा था कि राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी एनडीए के साथ गठबंधन में शामिल हो गई है.

इंडिया टुडे नॉर्थईस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, आइजोल में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए लालदुहोमा ने कहा कि एनडीए में शामिल होना न तो उनकी पार्टी के एजेंडे का हिस्सा है और न ही इस पर कोई विचार किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि जेडपीएम केंद्र सरकार के साथ सहयोगपूर्ण संबंध बनाए रखना चाहती है, लेकिन ‘किसी औपचारिक समझौते पर विचार नहीं हो रहा है.’

मुख्यमंत्री ने बताया कि दिसंबर 2023 के मिजोरम विधानसभा चुनावों के बाद उनकी सरकार बनने के समय से ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह कई बार जेडपीएम को गठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण दे चुके हैं. हालांकि, पार्टी ने एनडीए में औपचारिक रूप से शामिल हुए बिना केंद्र के साथ रचनात्मक कामकाजी संबंध बनाए रखने को प्राथमिकता दी.

नगालैंड पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार लालदुहोमा ने कहा, ‘आज भी, सरकार गठन के बाद हमारी पहली मुलाकात से लेकर अब तक प्रधानमंत्री और गृह मंत्री लगातार हमें अपने साथ जुड़ने का निमंत्रण देते रहे हैं. लेकिन हम आमतौर पर यह कहकर सौहार्दपूर्ण ढंग से बात खत्म करते हैं कि आइए अच्छे कामकाजी संबंध बनाए रखें; व्यवहारिक रूप से हम आपके साथ ही हैं. ऐसे में क्या अभी हमारे लिए औपचारिक रूप से जुड़ना वास्तव में ज़रूरी है?’

उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ब्रिगेडियर टी. सैलो की उस राजनीतिक सोच को भी दोहराया जिसमें ‘राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ क्षेत्रीय स्वतंत्रता’ पर बल दिया गया था. उन्होंने कहा कि एनडीए में शामिल होने का मुद्दा कभी भी जेडपीएम की पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी (पीएसी) के समक्ष नहीं रखा गया है.

मुख्यमंत्री ने यह भी तर्क दिया कि राज्य को ऐतिहासिक रूप से उस राजनीतिक संस्कृति से लाभ मिला है जिसमें क्षेत्रीय दल केंद्र सरकार के साथ सहयोग करते हुए भी अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखते हैं.

मिज़ो यूनियन पार्टी के प्रयासों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय नेता अक्सर राज्य के हितों को सुरक्षित करने के लिए असमिया और केंद्र सरकारों के साथ जुड़ते हैं.

नगालैंड पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने आगे आरोप लगाया कि राष्ट्रीय पार्टियों की बढ़ती मौजूदगी ने राज्य की राजनीतिक स्थिति को बिगाड़ दिया है, जिससे क्षेत्रीय पार्टियों को पहले जो लचीलापन मिलता था, वह असल में कम हो गया है.

चकमा स्वायत्त ज़िला परिषद (सीएडीसी) में भाजपा और जेडपीएम के बीच हालिया राजनीतिक समझौते के बारे में बात करते हुए लालदुहोमा ने कहा कि यह कदम विचारधारा की समानता के बजाय ज़रूरत की वजह से उठाया गया था. उन्होंने बताया कि किसी भी एक पार्टी के पास अकेले कार्यकारी परिषद बनाने के लिए ज़रूरी संख्या नहीं थी, इसलिए सहयोग करना ज़रूरी हो गया. इस फ़ैसले को जेडपीएम मुख्यालय ने मंज़ूरी दी थी.

23 जून को भाजपा और जेडपीएम ने औपचारिक रूप से गठबंधन कर चकमा डेमोक्रेटिक अलायंस लेजिस्लेटिव पार्टी का गठन किया और सीएडीसी की कार्यकारी परिषद का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया. भाजपा नेता निरुपम चकमा को इस गठबंधन का प्रमुख घोषित किया गया है. वर्तमान में इस गठबंधन में भाजपा के 10 और जेडपीएम के 9 सदस्य शामिल हैं.

लालदुहोमा ने भरोसा दिलाया कि यह समझौता जेडपीएम-एनडीए गठबंधन का संकेत नहीं है, बल्कि यह केवल एक स्थानीय समझौता है.