अडानी समूह का भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश, 2035 तक 10 गीगावाट क्षमता स्थापित करने का लक्ष्य

अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कंपनी की वार्षिक में अडानी एटॉमिक एनर्जी के माध्यम से भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की बात कही. भारत सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की रणनीति के तहत पिछले वर्ष परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था. 

अडानी ग्रुप के अक्ष्यक्ष गौतम अडानी कंपनी की वार्षिक आम बैठक 2026 को संबोधित करते हुए. (फोटो: @AdaniOnline/YT PTI के ज़रिए)

नई दिल्ली: अडानी समूह ने एक बार फिर भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में आने की अपनी महत्वाकांक्षा स्पष्ट करते हुए कहा है कि वह वर्ष 2035 तक 10 गीगावाट (जीडब्ल्यू) परमाणु ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखता है. अगर यह योजना सफल होती है, तो समूह देश का सबसे बड़ा निजी क्षेत्र का परमाणु ऊर्जा संचालक बन सकता है.

समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी ने कंपनी की वार्षिक आम बैठक में कहा, ‘अडानी एटॉमिक एनर्जी के माध्यम से परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में हमारा प्रवेश भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक और आत्मविश्वासपूर्ण कदम है.’

इससे पहले गौतम अडानी के नेतृत्व वाले इस समूह ने फरवरी में एक नियामकीय फाइलिंग के जरिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश की घोषणा कर दी थी. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, समूह ने संभावित परियोजनाओं के लिए भूमि की पहचान भी कर ली है, हालांकि जगहों की सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है.

फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्ष अडानी समूह उत्तर प्रदेश सरकार के साथ एक वाणिज्यिक परमाणु ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने को लेकर बातचीत कर रहा था. अगर यह परियोजना आगे बढ़ती है, तो अडानी भारत में परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित करने वाली पहली बड़ी निजी कंपनी बन सकती है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, अडानी ने बताया कि समूह का डेटा सेंटर कारोबार वर्ष 2030 तक 3 गीगावाट क्षमता विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. साथ ही, बढ़ती ऊर्जा मांग को देखते हुए समूह अपनी पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) परियोजनाओं का भी विस्तार कर रहा है.

भारत सरकार ने ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की रणनीति के तहत पिछले वर्ष परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोल दिया था. सरकार का लक्ष्य वर्तमान लगभग 8 गीगावाट परमाणु क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट तक पहुंचाना है.

इसी दिशा में दिसंबर 2025 में संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ एक्ट (शांति अधिनियम) ने पुराने ‘एटॉमिक एनर्जी एक्ट’ की जगह ली है. यह नया कानून भारत में निजी कंपनियों को परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित करने की अनुमति देता है. विदेशी कंपनियों के साथ तकनीकी सहयोग हेतु संयुक्त उद्यम (Joint Venture) बनाने का मार्ग प्रशस्त करता है. परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देता है.

फिलहाल, सिर्फ़ सरकारी कंपनी ‘न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया’ को ही न्यूक्लियर प्लांट चलाने की इजाज़त है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां एनपीसीआई अपनी क्षमता को 50 गीगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रख रही है, वहीं देश की सबसे बड़ी कोयला बिजली संयंत्र ऑपरेटर एनटीपीसी (जो सरकारी कंपनी है) भी 30 गीगावाट की परमाणु क्षमता शुरू करने की योजना बना रही है.

निजी क्षेत्र में अडानी के अलावा टाटा पावर और रिलायंस इंडस्ट्रीज भी परमाणु क्षेत्र में निवेश करने पर विचार कर रही हैं.