नई दिल्ली: अयोध्या में गुरुवार को दर्ज एफआईआर में नामज़द सभी आठ आरोपियों को शुक्रवार (26 जून) को गिरफ़्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. यह एफआईआर शहर के राम मंदिर से पैसे और कीमती सामान की चोरी, हेराफेरी और गबन की शिकायत पर दर्ज की गई थी.
शुक्रवार को ही, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा, जो कथित रूप से लापता दानराशि को लेकर विवादों के केंद्र में रहे हैं, ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया. कथित तौर पर चंपत राय ने ‘नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया.
हालांकि, पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद (विहिप), जिसके राय अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं, ने शुक्रवार को कहा कि उसे इस्तीफ़े के बारे में ‘कोई जानकारी नहीं’ है. रिपोर्ट में संगठन के प्रवक्ता विनोद बंसल का हवाला दिया गया. इससे पहले विहिप प्रमुख आलोक कुमार ने मंदिर में कथित चोरी की खबरों को ‘बेहद दुखद’ बताया था.
राम मंदिर ट्रस्ट के एक ट्रस्टी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर में अविनाश मिश्रा, लवकुश मिश्रा, उनके भाई अनुकल्प मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू, रमाशंकर मिश्रा (कैश काउंटर प्रभारी) और सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है. मंदिर प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों में केवल सुभाष श्रीवास्तव का नाम एफआईआर में शामिल है, जो दान-गणना केंद्र के प्रभारी थे.
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शुक्रवार दोपहर अयोध्या के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय के अभियोजन अधिकारी केसी वर्मा ने पत्रकारों को बताया कि आरोपियों को सोमवार (29 जून) को विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि आठ में से सात आरोपियों के पास से 79,85,493 रुपये बरामद किए गए हैं. उनके अनुसार, सुभाष श्रीवास्तव कथित गबन की साजिश में शामिल थे, लेकिन उनके पास से कोई बरामदगी नहीं हुई.
शुक्रवार को गिरफ्तार किए गए लोगों में चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव भी शामिल हैं. बताया जाता है कि टिन्नू यादव चंपत राय के करीबी सहयोगी हैं.
हालांकि चंपत राय का नाम एफआईआर में नहीं है, लेकिन राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंदिर परिसर में उनसे और ट्रस्ट से जुड़े कुछ अन्य लोगों से कई घंटों तक पूछताछ की थी.
कहा जाता है कि चंपत राय मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज की निगरानी से जुड़े रहे हैं. 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बने इस मंदिर के निर्माण और संचालन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्णकालिक प्रचारक रहे हैं, कई दशकों से वीएचपी से जुड़े हैं और बाबरी मस्जिद विध्वंस आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे हैं.
अयोध्या के एक अहम धार्मिक केंद्र, मणिराम छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास को ट्रस्ट का अध्यक्ष बनाया गया था.
दूसरी ओर, प्रधानमंत्री कार्यालय के पूर्व प्रधान सचिव और श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने पहले चंपत राय का बचाव किया था और मंदिर के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने के लिए एक पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त करने का सुझाव दिया था.
यह एफआईआर उन आरोपों के लगभग तीन सप्ताह बाद दर्ज हुई है, जिनमें कहा गया था कि श्रद्धालुओं द्वारा राम मंदिर में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये और सोना-चांदी की वस्तुएं गायब हो गई हैं.
7 जून को सार्वजनिक हुए इन आरोपों के बाद व्यापक विवाद खड़ा हो गया था. इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने सीधे पुलिस जांच शुरू करने के बजाय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया. इस बीच, मंदिर में कीमती वस्तुएं दान करने का दावा करने वाले कई लोग सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों में सामने आए और ट्रस्ट से जवाबदेही की मांग करने लगे.
कारसेवकपुरम के पुजारी और कुछ अन्य लोगों ने चोरी की खबरों पर संदेह जताते हुए लोगों की आशंकाएं दूर करने की कोशिश की, लेकिन जनाक्रोश लगातार बढ़ता गया.
आखिरकार कोतवाली रामजन्मभूमि थाना पुलिस ने 26 जून को मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की.
मंदिर के कामकाज के प्रबंधन पर सवाल उठाने वाले अन्य धार्मिक हस्तियों ने भी राय पर उंगली उठाई है. उन्होंने मंदिर की स्थापना के हिंदू परंपराओं से अलग होने से लेकर ट्रस्ट और मंदिर के कामकाज में राजनीतिक दखल तक कई मुद्दों पर आपत्ति जताई है.
इंडियन एक्सप्रेस की शुक्रवार की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंदिर ने अपने दान और मंदिर के फंड के प्रबंधन का काम एक बैंक को सौंपा है, जिसने बदले में यह काम करने के लिए ‘एक निजी एजेंसी’ को काम पर रखा है. यह साफ़ नहीं है कि गिरफ़्तार किए गए आरोपियों में से कोई इस आउटसोर्स की गई टीम का हिस्सा था या मंदिर ट्रस्ट का कर्मचारी.
उधर, एसआईटी की जांच अभी पूरा नहीं हुआ है. लखनऊ मंडल के आयुक्त विजय विश्वास पंत, लखनऊ रेंज की पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन की अगुवाई वाली इस टीम ने अभी तक केवल अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव संजय प्रसाद को सौंपी है. इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.
शुक्रवार को आई खबरों के अनुसार, एसआईटी के सदस्य आने वाले दिनों में अयोध्या स्थित मंदिर का फिर से दौरा करेंगे और दान प्रबंधन को अधिक सख्त एवं पारदर्शी बनाने के लिए ‘सिफारिशें और सुझाव’ देंगे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय को अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए एसआईटी को 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया गया है.
मुख्यमंत्री ने इससे पहले चोरी के आरोपों पर चिंता वालों की आलोचना की थी. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद एसआईटी ने ट्रस्टियों, चंपत राय और एफआईआर में नामजद अन्य लोगों से पूछताछ शुरू की.
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसआईटी की पूछताछ के आधार पर 2 करोड़ रुपये और सोना बरामद किया गया. हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि बाद में एक न्यायिक अधिकारी द्वारा बताई गई लगभग 79.85 लाख रुपये की बरामदगी की राशि शुरुआती रिपोर्ट में बताए गए आंकड़े से काफी कम है.
द वायर ने पहले रिपोर्ट किया था कि 19 जून को पूर्व कारसेवक संतोष दुबे ने उनसे पहले दो अन्य लोगों के साथ अयोध्या की स्थानीय पुलिस में कथित चोरी को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी. तीनों शिकायतों में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का उल्लेख किया गया था. इनमें से एक शिकायत में आरोप लगाया गया था कि लापता दानराशि के लिए वे सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं. हालांकि, इन शिकायतों पर कोई एफआईआर दर्ज नहीं की गई थी.
इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराने की मांग को लेकर एक अलग याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई है. हालांकि, अदालत ने इस मामले का उल्लेख 29 जून को करने को कहा है.
19 जून की दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, एसआईटी ने दानदाताओं के बयान भी दर्ज किए. इनमें मुंबई के व्यवसायी अनिल विश्वकर्मा शामिल हैं, जिन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार ने अयोध्या मंदिर में विराजमान रामलला को 3 किलोग्राम की चांदी की माला और 1 किलोग्राम की चांदी की चरण पादुका दान की थी, लेकिन उन्हें इसकी कोई रसीद नहीं दी गई.
इंडियन एक्सप्रेस ने 24 जून की रिपोर्ट में यह भी बताया कि एक निजी ऑडिटिंग फर्म ने लगभग छह वर्ष पहले ही मंदिर के धन प्रबंधन में गंभीर खामियों को लेकर चेतावनी दी थी, लेकिन इन चेतावनियों को कथित तौर पर नजरअंदाज कर दिया गया.
यह एफआईआर भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धाराओं 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) के तहत दर्ज की गई है. ये धाराएं चोरी करने की साजिश, चोरी, आपराधिक न्यासभंग (क्रिमिनल ब्रीच ऑफ ट्रस्ट), चोरी की संपत्ति को छिपाने या उससे संबंधित लेन-देन करने तथा आपराधिक षड्यंत्र जैसे आरोपों से संबंधित हैं.
यह विवाद सबसे पहले तब सामने आया था, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर से 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की धनराशि गायब हुई है. बाद में पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इन आरोपों को सार्वजनिक रूप से उठाया. इसके लगभग एक सप्ताह बाद राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया.
