नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में पहली बार श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. ट्रस्ट ने शनिवार (27 जून, 2026) को जारी बयान में पुष्टि की कि उसके महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने-अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है. साथ ही ट्रस्ट ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे.
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने कहा कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर ट्रस्ट की अगली बैठक में विचार किया जाएगा.
यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने चढ़ावे में कथित गबन के मामले में दर्ज एफआईआर के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया है. इस मामले में आरोप पहली बार दो सप्ताह से अधिक समय पहले सार्वजनिक रूप से सामने आए थे.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष पूज्य स्वामी गोविन्द देव गिरी जी महाराज का वक्तव्य
Statement by the Treasurer of the Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra, Pujya Swami Govind Dev Giri Maharaj pic.twitter.com/I8goCrrEt9
— Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra (@ShriRamTeerth) June 27, 2026
गोविंद देव गिरि ने कहा कि बीते कुछ सप्ताह की घटनाओं से ट्रस्ट ‘स्तब्ध, आहत और अत्यंत दुखी’ है. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिर में दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनका विधिवत रिकॉर्ड मौजूद है.
उन्होंने कहा कि हम सभी श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हैं कि भविष्य में ऐसी दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति दोबारा उत्पन्न न हो, इसके लिए हरसंभव कदम उठाए जाएंगे. जो भी दोषी हैं, उन्हें कानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सजा दिलाने पर ट्रस्ट जोर देगा.
गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा कि ट्रस्ट ‘असमाजिक, अधार्मिक और स्वार्थी तत्वों’ को सनातन धर्म की छवि धूमिल करने की कोशिश में सफल नहीं होने देगा.
चंपत राय और अनिल मिश्रा लंबे समय से विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े रहे हैं. शुक्रवार को दोनों के इस्तीफे की खबरें सामने आई थीं, हालांकि उस समय वीएचपी के एक प्रवक्ता ने इन खबरों को ‘झूठ’ बताया था.
गौरतलब है कि इस मामले में दर्ज एफआईआर में न तो चंपत राय और न ही अनिल मिश्रा का नाम आरोपी के रूप में शामिल है. हालांकि, चंपत राय मंदिर के दैनिक प्रशासनिक कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे हैं और सार्वजनिक दबाव के बाद 13 जून को गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने उनसे पूछताछ भी की थी.
शुक्रवार को अयोध्या के एक न्यायिक मजिस्ट्रेट ने बताया था कि पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में से सात के पास से 79 लाख 85 हजार 493 रुपये बरामद किए हैं. ये सभी आरोपी कथित तौर पर मंदिर में आने वाले नकद दान और कीमती सामान की गिनती की प्रक्रिया से जुड़े हुए थे.
इस बीच, पीटीआई ने मामले से परिचित एक सूत्र के हवाले से बताया कि एसआईटी की अंतरिम जांच रिपोर्ट में कई गंभीर प्रक्रियागत खामियां सामने आई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, दान की गिनती करने वाले कर्मचारियों के लिए जेब रहित कपड़े पहनना, नियमित तलाशी (फ्रिस्किंग) और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती जैसे जिन मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को लागू किया जाना था, उनका पालन नहीं किया गया. बताया गया है कि इन एसओपी को अनिल मिश्रा ने मंजूरी दी थी.
इसी अंतरिम रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की.
गौरतलब है कि जब इस महीने की शुरुआत में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के आरोप सामने आए थे, तब चंपत राय ने ट्रस्ट की ओर से कहा था कि नियमित ऑडिट के दौरान ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है, जिससे किसी तरह की गंभीर अनियमितता का संकेत मिलता हो.
