नई दिल्ली: भारत ने रविवार (28 जून) को संकेत दिए कि अगर सेशल्स सरकार चाहे तो वह वहां लंबे समय से रुके हुए ‘एजंप्शन द्वीप परियोजना’ को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है. यह बात ऐसे समय में कही गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशल्स देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइज़न’ से सम्मानित किया गया.
रिपोर्ट के मुताबिक, यह अवॉर्ड उनकी राजकीय यात्रा से कुछ दिन पहले ही शुरू किया गया था और वे इसे पाने वाले पहले व्यक्ति बने.
इस संबंध में जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री से पूछा गया कि क्या दोनों पक्षों के बीच एजंप्शन द्वीप को लेकर कोई बातचीत हुई, तो इस पर उन्होंने कहा कि इस यात्रा के दौरान यह मुद्दा नहीं उठाया गया. हालांकि, उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अगर सेशल्स की सरकार इसे फिर से शुरू करना चाहेगी, तो नई दिल्ली इसके लिए तैयार रहेगी.
विक्टोरिया में द्विपक्षीय बातचीत के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मिस्री ने कहा, ‘मौजूदा दौरे के दौरान हमने इस बारे में खास तौर पर कोई बात नहीं की है, लेकिन अगर सेशल्स सरकार यह मुद्दा उठाती है, तो हम इस पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं.’
उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि विदेश में भारत जो भी परियोजना शुरू करता है, वह उस देश की सरकार की प्राथमिकताओं और हितों के आधार पर तय होता है.
मिस्री ने कहा, ‘ सेशल्स या किसी भी दूसरे विदेशी देश में हम जो भी परियोजना शुरू करते हैं, वह असल में वहां की सरकार की प्राथमिकताओं और हितों के आधार पर ही तय होता है.’ भारत के शीर्ष राजनयिक ने कहा कि विकास, सुरक्षा और रक्षा सहयोग को ‘सेशल्स सरकार और सेशल्स के लोगों के हितों और प्राथमिकताओं’ के अनुरूप होना चाहिए.
एक विवादास्पद परियोजना
उल्लेखनीय है कि 2015 में पीएम मोदी की इस द्वीप देश की पहली यात्रा के दौरान भारत और सेशल्स ने ‘एजंप्शन द्वीप’ पर मिलकर मिलिट्री इंफ्रास्ट्रक्चर (सैन्य ढांचा) विकसित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए.
यह द्वीप माहे से लगभग 1,100 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है और पश्चिमी हिंद महासागर में महत्वपूर्ण शिपिंग मार्गों के पास रणनीतिक रूप से स्थित है, साथ ही यहां आबादी भी बहुत कम है.
इस परियोजना को लेकर सेशल्स में चिंताएं सामने आने के बाद 2018 में इस समझौते में बदलाव किया गया. दोनों सरकारों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह सुविधा सेशल्स के स्वामित्व और नियंत्रण में रहेगी और इससे मुख्य रूप से द्वीप देश की कोस्ट गार्ड (तट रक्षक) क्षमताओं को मजबूती मिलेगी.
हालांकि, यह परियोजना सेशल्स में सबसे विवादास्पद राजनीतिक मुद्दों में से एक बन गई. विपक्षी दलों, नागरिक समाज समूहों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का तर्क था कि इससे असल में भारत का एक सैन्य अड्डा बन जाएगा, देश की संप्रभुता कमजोर होगी और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इस द्वीप को नुकसान पहुंचेगा.
समझौते को सेशल्स की संसद में पेश किए जाने से एक दिन पहले, इसका मसौदा ऑनलाइन लीक हो गया.
राजनीतिक विरोध के चलते तत्कालीन राष्ट्रपति डैनी फॉरे को यह स्वीकार करना पड़ा कि संशोधित समझौते को संसद से मंजूरी नहीं मिलेगी, जिससे परियोजना प्रभावी रूप से स्थगित हो गई. तब से भारत ने सेशल्स के साथ कम संवेदनशील पहलों के माध्यम से समुद्री सहयोग का विस्तार जारी रखा है. इनमें गश्ती पोतों और विमानों को तोहफ़े में देना, तटरक्षक बलों के संसाधनों का नवीनीकरण करना, हाइड्रोग्राफिक सर्वे करना और सेशेल्सरक्षा बलों के लिए क्षमता निर्माण और ट्रेनिंग देना शामिल है.
इसके बाद फरवरी में जब सेशल्स के राष्ट्रपति डॉक्टर पैट्रिक हर्मिनी भारत आए, तो दोनों पक्षों ने एक बड़ी समुद्री साझेदारी के तहत सेशल्स कोस्ट गार्ड बेस पर सहयोग की घोषणा की. विक्टोरिया लौटने के बाद हर्मिनी ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मिलिट्री बेस के लिए भारत को एज़म्पशन आइलैंड लीज़ पर देने के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई थी; यह मुद्दा उनके पूर्ववर्ती के समय में राजनीतिक रूप से काफी विवादित हो गया था.
इसके बावजूद यह द्वीप घरेलू बहस का केंद्र बना रहा. बाद में हर्मिनी की सरकार ने कतर के सहयोग से प्रस्तावित लक्ज़री टूरिज़्म परियोजना के लिए एज़म्पशन आइलैंड को लीज़ पर देने के मामले की जांच के लिए एक जांच आयोग का गठन किया, और इस पैनल ने शनिवार को अपनी रिपोर्ट सौंपी.
नया-नवेला सम्मान
उल्लेखनीय है कि मौजूदा घटनाक्रम में सेशल्स सरकार की कैबिनेट ने समारोह से ठीक चार दिन पहले 24 जून को पीएम मोदी को राष्ट्रपति सम्मान देने की मंज़ूरी दी.
हालांकि, इस स्ममान समारोह के दौरान दिए गए साइटेशन (प्रशस्ति-पत्र) की ऑनलाइन आलोचना भी हुई, क्योंकि यूज़र्स ने सर्टिफिकेट और उसके साथ लगी सील, दोनों पर साफ़ तौर पर स्पेलिंग और टाइपिंग की गलतियां पकड़ीं.
फैक्ट-चेकर मोहम्मद ज़ुबैर ने बताया कि सील पर लिखे लैटिन मोटो में ‘OPVS’ की जगह ‘OPUS’ लिखा था, जबकि डॉक्यूमेंट में एक दूसरी सील पर ‘Republic’ और ‘Seychelles’ की स्पेलिंग गलत लिखी थी – ‘Repubblic’ और ‘Seycheeles’.
It’s OPVS and not OPUS.
It’s Republic and not Repubblic.
It’s Seychelles and not Seycheeles. pic.twitter.com/qX13eYhpBn— Mohammed Zubair (@zoo_bear) June 28, 2026
इसके अलावा, OpenAI के इमेज वेरिफ़िकेशन टूल ने साइटेशन की सार्वजनिक रूप से प्रसारित इमेज में OpenAI SynthID वॉटरमार्क का पता लगाया, जिससे पता चलता है कि यह इमेज OpenAI के इमेज-जेनरेशन टूल का इस्तेमाल करके बनाई गई थी.
भारतीय अधिकारियों ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को उनकी ‘ग्रीन लीडरशिप’, ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा देने, क्लाइमेट एक्शन और छोटे द्वीपीय विकासशील देशों के समर्थन के लिए सम्मानित किया गया.
मालूम हो कि इस साल की शुरुआत में उन्हें इज़रायल के नेसेट मेडल से सम्मानित किया गया था और इससे पहले वे ग्लोबल लीडरशिप के लिए कोटलर अवार्ड पाने वाले पहले व्यक्ति थे.
पीएम मोदी का यह दौरा सेशल्स की आज़ादी के 50 साल पूरे होने के जश्न (गोल्डन जुबली) के समय हुआ. उन्होंने नेशनल डे परेड में मुख्य अतिथि के तौर पर हिस्सा लिया. उनके साथ मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम और अफ्रीकन यूनियन कमीशन के चेयरमैन महमूद अली यूसुफ जैसे दूसरे विदेशी नेता भी मौजूद थे.
दोनों देशों के बीच बातचीत में इस साल फरवरी में राष्ट्रपति हर्मिनी की भारत यात्रा के दौरान घोषित 175 मिलियन डॉलर के स्पेशल इकोनॉमिक पैकेज के अमल की समीक्षा की गई. इस पैकेज में सोशल हाउसिंग, ट्रांसपोर्ट, शिक्षा, हेल्थकेयर, फूड सिक्योरिटी और समुद्री सुरक्षा जैसे सेक्टरों में परियोजना्स के लिए 125 मिलियन डॉलर की रियायती फंडिंग और 50 मिलियन डॉलर की ग्रांट सहायता शामिल है.
इस दौरे के दौरान भारत ने कई तरह की मदद का ऐलान किया और उन्हें सौंपा भी. इसमें सेशल्स डिफेंस फोर्सेज के लिए एक तेज़ गश्ती पोत (fast patrol vessel), 10 यूटिलिटी वाहन, पांच लेज़र रेडियल बोट, छह एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट शामिल थे.
दोनों पक्षों ने डिजिटल पेमेंट, हेल्थकेयर, खेती, प्रत्यर्पण, शिपिंग, अंतरिक्ष सहयोग, क्षमता निर्माण और 1,250 करोड़ रुपये की अम्ब्रेला लाइन ऑफ क्रेडिट से जुड़े नौ समझौतों पर हस्ताक्षर किए.
इस दौरान पीएम मोदी ने सेशल्स की नेशनल असेंबली को भी संबोधित किया, जहां उन्होंने हिंद महासागर को दोनों देशों को जोड़ने वाला एक साझा घर बताया और इसे ‘अवसरों का महासागर’ बनाने का आह्वान किया.
मिस्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रपति हर्मिनी ने एक एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराने और सेशल्स में साइबर सुरक्षा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर स्थापित करने के लिए नई दिल्ली से मदद मांगी थी; इन प्रस्तावों पर भारत ने ‘बहुत सकारात्मक सोच के साथ’ प्रतिक्रिया दी.
