कृषि सब्सिडी का लाभ लेने पर केंद्रीय मंत्री बोले- किसान सब्सिडी का फ़ायदा लेते हैं, मैंने भी लिया

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत राजस्थान में 1.99 करोड़ रुपये की खीरा खेती परियोजना के लिए लगभग 99.6 लाख रुपये की सब्सिडी मिली है. चौधरी ख़ुद केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री होने के नाते राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं, जिससे हितों के टकराव का सवाल उठता है.

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी. (फोटो साभार: फेसबुक/@bhagirathchoudharybjp)

नई दिल्ली: केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने खीरे की व्यावसायिक खेती परियोजना के लिए लगभग 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी लेने का बचाव किया है.

यह सफाई इंडियन एक्सप्रेस की उस पड़ताल के बाद आई है, जिसमें सवाल उठाया गया था कि उन्हें यह सब्सिडी ऐसे संस्थान की योजना के तहत मिली, जिसकी देखरेख से उनका मौजूदा मंत्री पद जुड़ा हुआ है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भागीरथ चौधरी को एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत बड़े पैमाने पर व्यावसायिक खेती को बढ़ावा देने वाली योजना में यह सब्सिडी मिली. यह योजना राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के माध्यम से संचालित होती है, जो कृषि मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त संस्था है.

रिपोर्ट के मुताबिक, 16,592 वर्गमीटर क्षेत्र में खीरे (ककड़ी) की खेती की उनकी परियोजना वर्ष 2025 में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा स्वीकृत 467 परियोजनाओं में शामिल थी. इस योजना के तहत किसी एक परिवार को परियोजना लागत का अधिकतम 50%, यानी एक करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जा सकती है.

चौधरी को राजस्थान में 1.99 करोड़ रुपये के खीरा की खेती प्रोजेक्ट के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से लगभग 99.6 लाख रुपये की सब्सिडी मिली. ]

रिपोर्ट में बताया गया था कि चौधरी अभी केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री होने के नाते राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के पदेन उपाध्यक्ष हैं, जिससे हितों के टकराव का सवाल उठता है. अखबार ने बताया कि चौधरी ने मंत्री बनने से पहले 2018 में ही सब्सिडी के लिए आवेदन किया था.

इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए चौधरी ने कहा कि उन्होंने सभी तय नियमों और प्रक्रियाओं का पालन किया और कोई जानकारी नहीं छिपाई.

समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए मंत्री ने कहा, ‘मैं एक किसान हूं और बचपन से ही खेती-बाड़ी से जुड़ा रहा हूं… मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है. हज़ारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सब्सिडी का फ़ायदा उठाते हैं. इसलिए, मैंने भी ऐसा ही किया. मैंने 2018 में इसके लिए अप्लाई किया था. मैंने वहां एक बोर्ड लगाया है और लिए गए सभी लोन और सब्सिडी की जानकारी दी है.’

उन्होंने कहा, ‘मैं वहां किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती की ट्रेनिंग भी देता हूं… सभी स्थानीय अधिकारियों ने उस जगह का दौरा किया है. तो, मैंने क्या छिपाया?’

उल्लेखनीय है कि अख़बार की जांच रिपोर्ट में यह आरोप नहीं लगाया गया कि चौधरी ने योजना की पात्रता संबंधी शर्तों का उल्लंघन किया है.

रिपोर्ट का प्रमुख सवाल यह था कि क्या किसी वर्तमान केंद्रीय मंत्री के लिए उस संस्थान द्वारा संचालित योजना का लाभार्थी होना उचित है, जिसकी निगरानी में वह अब पदेन भूमिका निभा रहे हैं? इसी आधार पर रिपोर्ट में संभावित हितों के टकराव को लेकर सवाल उठाए गए.

कांग्रेस ने कहा- खुलेआम लूट

कांग्रेस ने शनिवार (27 जून) को चौधरी को उनके ही मंत्रालय के तहत संचालित योजना से सब्सिडी मिलने की खबर पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे ‘खुली लूट’ और हितों के टकराव का मामला बताया.

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके लिए ‘सब्सिडी की शुरुआत घर से होती है.’ उन्होंने इस मामले को ‘खुली लूट’ करार देते हुए कहा कि इसे केवल हितों का टकराव कहना भी कम होगा.

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेफार्म एक्स पर लिखा, ‘भ्रष्टाचार के प्रति ज़ीरो टॉलरेंस के ‘चंदा-चोर’ आरएसएस-भाजपा के दावों को एक और झटका लगा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत खीरे की व्यवसायिक खेती के अपने प्रोजेक्ट के लिए 99.03 लाख रुपये की सब्सिडी मंज़ूर की.’

उन्होंने कहा, ‘वह खुद आवेदक हैं, मंजूरी देने वाली व्यवस्था का हिस्सा हैं और लाभार्थी भी – तीनों भूमिकाएं एक ही व्यक्ति में समाहित हैं.’

खेड़ा ने तंज कसते हुए कहा कि जहां गरीबों से 5 किलो मुफ्त राशन और बच्चों के लिए मिड-डे मील पाकर संतुष्ट रहने की उम्मीद की जाती है, वहीं मंत्री और उनके करीबी सरकारी खजाने को अपनी निजी संपत्ति की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं और सार्वजनिक धन से लाभ उठा रहे हैं.

इसी तरह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) को मानो ‘डायरेक्ट फैमिली ट्रांसफर’ में बदल दिया है.