नॉर्थईस्ट डायरी: मणिपुर हिंसा के तीन साल बाद पहली बार चूड़ाचांदपुर पहुंचे मुख्यमंत्री

इस हफ्ते नॉर्थ ईस्ट डायरी में मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश, असम और नगालैंड के प्रमुख समाचार.

मई 2023 से मणिपुर में जारी हिंसा के तीन साल बाद सीएम युमनाम खेमचंद शनिवार को इस हिंसा में मारे गए भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए चूड़ाचांदपुर पहुंचे थे. (फोटो साभार: फेसबुक/@YKhemchandSingh)

नई दिल्ली: मणिपुर हिंसा के तीन साल बाद कुकी-बहुल चूड़ाचांदपुर पहुंचे मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह राज्य में जारी जातीय हिंसा के बाद ऐसा करने वाले पहले मुख्यमंत्री बन गए.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, युमनाम शनिवार को इस हिंसा में मारे गए भाजपा विधायक वुंगज़ागिन वाल्टे के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए हेलीकॉप्टर से वहां पहुंचे थे. इससे पहले कुकी-ज़ो संगठनों ने उनके बहिष्कार का आह्वान किया था.

तीन बार भाजपा के विधायक रहे वाल्टे पर 4 मई, 2023 को इंफाल में एक भीड़ ने हमला किया था, जिसके कारण उन्हें लकवा मार गया था. 21 फरवरी, 2026 को हरियाणा के गुड़गांव स्थित एक अस्पताल में उनका निधन हो गया. उनका शव मणिपुर के चूड़ाचांदपुर ज़िला अस्पताल के मुर्दाघर में सुरक्षित रखा गया था.

हिंसा शुरू होने के बाद से यह पहला मौका था जब कोई मुख्यमंत्री इस इलाके में पहुंचा.

वाल्टे की मौत के बाद उनका परिवार न्याय की मांग कर रहा था. उनके परिजनों का कहना था कि जब तक उन लोगों को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा जो इस हमले के लिए जिम्मेदार हैं, तब तक उनका अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा.

उनके परिवार का कहना था कि जब तक कि केंद्र सरकार ज़ोमी जनजाति (जिससे विधायक आते थे) के लिए एक अलग ज़िला बनाने और उनकी मौत की जांच नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी  से कराने पर सहमत नहीं होती तब तक उन्हें दफनाया नहीं जाएगा.

वाल्टे ने गुजरने से पहले 13 सितंबर, 2025 को उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा था कि उन पर मेईतेई मिलिशिया द्वारा किए गए क्रूर हमले को लेकर कोई विशेष जांच शुरू नहीं की गई.

अब हिंदुस्तान टाइम्स ने परिवार के एक अनाम सदस्य के हवाले से बताया, हालांकि, अब परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गया, क्योंकि उनकी पत्नी बीमार हैं और वे चाहती थीं कि उनके पति को अंतिम विदा दे दी जाए.

वाल्टे को श्रद्धांजलि देते हुए सीएम युमनाम ने कहा कि वाल्टे पर हुए हमले की बात उन्हें आज भी परेशान करती है; वाल्टे उनके ‘सबसे अच्छे दोस्तों’ में से एक थे. ‘हम सब मिलकर इस बात पर चर्चा कर रहे थे कि हिंसा को कैसे काबू में किया जाए. मुझे सबसे ज़्यादा अफ़सोस इस बात का है कि अगर उस दोपहर मैं उनके साथ होता, तो वह घटना नहीं होती.’

उन्होंने यह भी याद किया कि कैसे उन्होंने 3 मई 2023 को भीड़ की हिंसा के डर से तत्कालीन मंत्री और अब उपमुख्यमंत्री नेमचा किपजेन को कांगपोकपी लौटने से रोका था और बाद में सुरक्षा घेरे में उन्हें सुरक्षित पहुंचाया था.

ज्ञात हो कि कुकी संगठनों ने सीएम के दौरे का विरोध करते हुए कहा कि जब तक विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक सीएम सहित किसी भी मेईतेई को चूड़ाचांदपुर में आने की इजाज़त नहीं दी जाएगी. ख़बरों के अनुसार, शुक्रवार रात से ही वॉलंटियर्स ने शटडाउन लागू करने के लिए इंफाल-चूड़ाचांदपुर रोड पर जमा होना शुरू कर दिया था, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ा दी गई थी.

परिवार, समर्थकों और समुदाय के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि दिए जाने के बाद वाल्टे को डोरकास वेंग में दफ़नाया गया. उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटी और दो बेटे हैं.

मणिपुर में मई 2023 से मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है. इस हिंसा में अब तक कम-से-कम 260 लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं.

अरुणाचल: आदिवासी समुदाय ने अपर सुबनसिरी ज़िले में चीनी अतिक्रमण का लगाया आरोप

अरुणाचल प्रदेश के ‘नाह’ आदिवासी समुदाय ने अपर सुबनसिरी ज़िले में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चीन की कथित घुसपैठ पर चिंता जताई है. उनका दावा है कि पिछले छह सालों में पीएलए (चीनी सेना) ने उनके पशु चराने, शिकार करने और खेती करने वाली ज़मीन के एक बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में अपर सुबनसिरी के डिप्टी कमिश्नर को सौंपे गए एक ज्ञापन में नाह वेलफेयर सोसाइटी (एनडब्ल्यूएस) के अध्यक्ष केरू चाडर ने कहा, ‘हमारी पुश्तैनी ज़मीनें – जो हमारे शिकार के इलाके थे, जहां हम कुछ साल पहले तक आज़ादी से घूमते थे और जंगल से वनोपज इकट्ठा करते थे, और हमारे मवेशियों के चरागाह – अब चीनी पीएलए के कब्ज़े में हैं.’

एनडब्ल्यूएस ने पांच जगहों पर चीनी गतिविधियों का आरोप लगाया, जो उनके अनुसार अपर सुबनसिरी में टक्सिंग राजस्व क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं. उन्होंने कहा कि चीनी सरकार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जगहों पर कब्ज़ा करके अंतरराष्ट्रीय सीमा के साथ वाले इलाकों पर तेज़ी से अपना नियंत्रण बढ़ा रही है.

नाचो के विधायक नकाप नालो ने कहा कि इस मामले की आधिकारिक पुष्टि की ज़रूरत है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है. नालो ने कहा, ‘प्रशासन को इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि करनी होगी.’ उन्होंने आगे कहा, ‘इन आरोपों को लेकर ज़ाहिर तौर पर चिंताएं हैं क्योंकि यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है.’

घुसपैठ की जानकारी देते हुए एनडब्ल्यूएस ने आरोप लगाया कि चीनियों ने पिछले 10 से 15 सालों में टक्सिंग सीमा क्षेत्र में अपनी गतिविधियां काफ़ी बढ़ा दी हैं, जिसका मकसद ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन पर कब्ज़ा करना है.

आदिवासी संगठन के अनुसार, कई ऐसी जगहें जिन पर 2020 तक उनका पारंपरिक नियंत्रण था, उन पर कथित तौर पर पीएलए ने कब्ज़ा कर लिया है.

संगठन ने कहा कि असाफिला इलाके में ओयिंग, पनियार (चुजार्टा इलाका), मारपान (मारनाफे), पोट्रांग (झील) और टिडिंगटैंग जैसी जगहें धीरे-धीरे चीनी घुसपैठ के दायरे में आ गई हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ये जगहें टक्सिंग मुख्यालय के पास हैं और इनमें से कुछ को तीर्थ स्थल भी माना जाता है.

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि चीनी सेना ने भारतीय क्षेत्र में मिलिट्री कैंप और सड़कें बनाई हैं.

चाडर ने ज्ञापन में कहा, ‘हमें अपनी सेना पर कोई शक नहीं है और हम हमेशा उन पर भरोसा करते हैं. वे कई सालों से हमारी ज़मीन की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें काफ़ी नहीं हैं. टक्सिंग इलाके में चीनी पीएलए की मौजूदा गतिविधियों का मकसद और रफ़्तार बहुत चिंताजनक है और यह हमारे लिए गंभीर चिंता का विषय है. हम दिन-ब-दिन अपनी ज़मीन का एक-एक इंच उनके हाथों गंवा रहे हैं.’

इस बीच, केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन आरोपों को खारिज किया है कि चीन की पीएलए अरुणाचल प्रदेश में भारतीय इलाके में घुस आई है. उन्होंने कहा कि ‘कोई घुसपैठ नहीं हुई है’ और सीमा पर होने वाली घटनाओं की वजह सीमा को लेकर अलग-अलग समझ है.

उनके ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब भारतीय सेना ने भी उन खबरों को खारिज कर दिया है जिनमें दावा किया गया था कि चीनी सेना ने हाल ही में राज्य के अंदर कैंप बनाए हैं.

असम पुलिस भर्ती घोटाला: ईडी ने पूर्व आईपीएस अधिकारी की 53.28 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की

असम ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के गुवाहाटी क्षेत्रीय कार्यालय ने असम पुलिस भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के सेवानिवृत्त अधिकारी प्रशांत कुमार दत्ता तथा उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की लगभग 53.28 करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया है.

ईडी की जांच असम पुलिस की सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज एक एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी. वर्ष 2021 में सामने आए चर्चित असम पुलिस भर्ती घोटाले में प्रशांत कुमार दत्ता को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था.

एफआईआर के अनुसार, दत्ता ने 1992 से 2019 तक अपनी सेवा अवधि के दौरान अपनी ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की. वह पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे.

जांच में पाया गया कि दत्ता और उनकी पत्नी की घोषित आय लगभग 7.23 करोड़ रुपये थी, जबकि उनका व्यय 9.04 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. इसके अलावा, 77.21 करोड़ रुपये मूल्य की अघोषित संपत्तियों का पता चला और उनकी आय से अधिक संपत्ति का मूल्य लगभग 79.01 करोड़ रुपये आंका गया.

ईडी की जांच में सामने आया कि कथित अपराध से अर्जित धन को वैध संपत्ति के रूप में दिखाने के लिए तीन निजी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया. ये कंपनियां थीं – एम/एस महामाया एस्टेट्स प्राइवेट लिमिटेड, एम/एस ईशान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड और एम/एस मुरारी कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड.

जांच एजेंसी के अनुसार, इन कंपनियों के पंजीकृत कार्यालय वास्तविक रूप से मौजूद नहीं थे.

ईडी ने यह भी पाया कि परिवार के सदस्यों और इन कंपनियों के खातों में 14.74 करोड़ रुपये की अज्ञात नकदी जमा कराई गई. इसके बाद फर्जी शेयरधारकों, कोलकाता स्थित शेल कंपनियों और सर्कुलर बैंक ट्रांसफ़र के ज़रिए फंड की हेराफेरी की गई थी और इसे होटलों, मुंबई स्थित फ्लैटों में निवेश कर वैध दिखाया गया.

जांच में यह भी सामने आया कि इन कंपनियों के शेयरधारक ज़्यादातर फ़र्ज़ी या बिना स्वतंत्र आय वाले लोग पाए गए, जो अपने नाम पर दिखाए गए फंड के स्रोत के बारे में कुछ नहीं बता सके.

ईडी के अनुसार, सेवानिवृत्ति के बाद और एफआईआर दर्ज होने के बावजूद वित्तीय वर्ष 2022-23 में प्रशांत कुमार दत्ता ने एम/एस ईशान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड के 3.70 लाख शेयर अपने नाम हस्तांतरित करा लिए और कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारक बन गए. यह कंपनी उन चार होटलों में से तीन की असली मालिक है जिन्हें अब ज़ब्त किया गया है.

ईडी ने कहा है कि यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत की गई है और मामले की जांच जारी है.

नगालैंड: महिला संगठन ने आईएएस अधिकारी रेनी विल्फ्रेड के ख़िलाफ़ यौन उत्पीड़न मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग की

नगालैंड के यिमखिउंग महिला संगठन (वाईडब्ल्यूओ), शामाटोर मुख्यालय ने आईएएस अधिकारी रेनी विल्फ्रेड के खिलाफ दर्ज यौन उत्पीड़न मामले में शीघ्र सुनवाई और जल्द न्याय सुनिश्चित करने की मांग करते हुए नगालैंड के आयुक्त को एक ज्ञापन सौंपा है.

शमाटोर के डिप्टी कमिश्नर के माध्यम से कमिश्नर को भेजे गए इस ज्ञापन में आरोपों की गंभीरता के बावजूद सुनवाई में हो रही धीमी प्रगति पर चिंता जताई गई है.

वाईडब्ल्यूओ के अनुसार, यह मामला उसके एक सदस्य और अन्य महिलाओं के साथ कथित लगातार यौन उत्पीड़न और छेड़छाड़ से जुड़े आरोपों का है.

संगठन ने बताया कि इस संबंध में पहले नोकलाक पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किए गए थे, जिन्हें बाद में स्टेट क्राइम पुलिस स्टेशन कोहिमा में फिर से दर्ज किया गया. इन मामलों में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं.

अपने ज्ञापन में संगठन ने आरोप लगाया कि अपराधों की गंभीरता के बावजूद मुकदमे की सुनवाई बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रही है, जिसके कारण आरोपी अभी भी स्वतंत्र है, जबकि पीड़िताओं को न्याय का इंतजार करना पड़ रहा है.

वाईडब्ल्यूओ का कहना है कि इस लंबी देरी ने आपराधिक न्याय प्रणाली में पीड़ितों के भरोसे को बुरी तरह प्रभावित किया है और उन्हें लगातार मानसिक आघात और सामाजिक बदनामी का सामना करना पड़ रहा है.

संगठन ने यह आशंका भी जताई कि कार्यवाही में देरी से गवाहों को डराने-धमकाने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बढ़ सकती है, क्योंकि आरोपी एक प्रभावशाली पद पर है.

महिलाओं के खिलाफ यौन अपराधों को जघन्य अपराध बताते हुए संगठन ने कहा कि न्याय में देरी से न्याय व्यवस्था पर जनता का भरोसा कमजोर होता है और अपराधियों का मनोबल बढ़ता है.

तत्काल हस्तक्षेप की अपील करते हुए वाईडब्ल्यूओ ने आयुक्त से मामले का संज्ञान लेने और न्यायिक प्रक्रिया में तेजी सुनिश्चित करने का अनुरोध किया.