नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने और इसके बाद पासपोर्ट के नवीनीकरण में आई बाधा को लेकर विवाद के कुछ दिनों बाद वरिष्ठ पत्रकार और द टेलीग्राफ के पूर्व संपादक आर. राजगोपाल को उनका नवीनीकृत पासपोर्ट मिल गया है. द वायर को इसकी जानकारी मिली है.
राजगोपाल ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि एसआईआर के दौरान उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया था. उनका यह भी कहना था कि इसी वजह से अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट के नवीनीकरण की प्रक्रिया रोक दी. इस खुलासे के बाद मामले ने तूल पकड़ा और सरकारी प्रक्रियाओं पर सवाल उठे.
द वायर में प्रकाशित अपने लेख में राजगोपाल ने लिखा था,
‘उन्होंने (एक अधिकारी ने) कहा कि मेरे पासपोर्ट के नवीनीकरण की मंजूरी तभी दी जा सकती है, जब मेरा नाम फिर से मतदाता सूची में शामिल हो जाए. जब मैंने कहा कि मेरी अपील पर फैसला कब होगा, इसकी कोई निश्चित समयसीमा नहीं है, तब उन्होंने कहा कि मुझे इंतजार करना होगा और कोई दूसरा विकल्प नहीं है.’
उन्होंने आगे लिखा, ‘मैं हैरान था क्योंकि मुझे ऐसा कोई सार्वजनिक दस्तावेज नहीं मिला, जिसमें पासपोर्ट के नवीनीकरण के लिए मतदाता पहचान पत्र को अनिवार्य दस्तावेज बताया गया हो.’
राजगोपाल ने अपने हालत का वर्णन करते हुए लिखा, ‘फुटबॉल के इस मौसम में अनगिनत भारतीयों की तरह मैं भी एक फुटबॉल बन गया हूं, जिसे एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर और एक पोर्टल से दूसरे पोर्टल तक ठोकरें मारकर भेजा जा रहा है.’
इसके बाद एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया ने मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने और उसके बाद पासपोर्ट का नवीनीकरण नहीं किए जाने की आलोचना की थी.
इस मामले पर कई विपक्षी नेताओं ने भी आवाज उठाई थी. केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने पश्चिम बंगाल विधानसभा के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी को पत्र लिखकर आग्रह किया था कि सरकार इस बात पर विचार करे कि राजगोपाल ‘पिछले तीन दशकों से कोलकाता में रह रहे एक प्रतिष्ठित पत्रकार’ हैं.
उन्होंने यह भी उल्लेख किया था कि राजगोपाल, प्रोफेसर वी. रामदास के पुत्र हैं, जो केरल में गांधी स्मारक निधि के राज्य सचिव रह चुके हैं.
I have written to the Chief Minister of West Bengal, requesting his urgent intervention in the reported denial of passport renewal to renowned journalist #RRajagopal. According to reports, his passport renewal has been held up following an adverse police verification report from… pic.twitter.com/lfy4ecLI4Q
— V D Satheesan (@vdsatheesan) June 29, 2026
29 जून को राज्यसभा में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास ने भी केंद्रीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लिखे पत्र में इस मामले को लेकर चिंता जताई थी. उन्होंने कहा था कि अधिकारियों का रवैया संवैधानिक प्रक्रिया, वैधानिक व्यवस्था और कानून के शासन से जुड़े बुनियादी सवाल खड़े करता है.
Wrote to @DrSJaishankar seeking urgent intervention in the case of senior journalist and former ‘The Telegraph’ Editor Shri Rajagopal Ramadas and urging a clear institutional clarification. This is not just about one passport. It is about the integrity of the Constitution, the… pic.twitter.com/nJekHTDFqH
— John Brittas (@JohnBrittas) June 29, 2026
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने अपने एक्स अकाउंट पर वीडी. सतीशन का पत्र साझा करते हुए पूरे घटनाक्रम को ‘न्याय का गंभीर उल्लंघन’ बताया था.
वहीं, तृणमूल कांग्रेस की सांसद और पूर्व पत्रकार सागरिका घोष ने इस घटना को ‘चौंकाने वाला’ और ‘दिल दहला देने वाला’ कहा था और साथ ही इस मुद्दे पर मुख्यधारा की मीडिया की चुप्पी पर सवाल उठाया.
