मणिपुर: कांगपोकपी में कथित हथियारबंद समूहों की गोलीबारी में 8 साल की बच्ची समेत दो लोग घायल

मणिपुर के कांगपोकपी ज़िले में रविवारशाम को एक कुकी गांव में हुए कथित गोलीबारी में आठ साल की बच्ची और एक महिला घायल हो गए हैं. स्थानीय लोगों के अनुसार, हथियारबंद लोगों ने अत्याधुनिक हथियारों से गोलीबारी की और गांव पर विस्फोटक फेंके. ग्रामीणों का यह भी दावा है कि हमलावरों ने भागने से पहले कई घरों में आग लगा दी.

मणिपुर के इंफाल में तैनात सुरक्षा बल. (फोटो: पीटीआई)

नई दिल्ली: मणिपुर पुलिस ने सोमवार (6 जुलाई) को बताया कि कांगपोकपी ज़िले में हथियारबंद समूहों की गोलीबारी में आठ साल की बच्ची और एक महिला घायल हो गए हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, यह गोलीबारी रविवार शाम थिंगखोंगजांग गांव में हुई. पुलिस ने बताया कि घायलों की पहचान नेन्गनेइचोंग किपगेन (56) और लामनेइंगा किपगेन (8) के तौर पर हुई है और उन्हें इलाज के लिए रविवार देर रात इंफाल लाया गया.

नॉर्थईस्ट टुडे के अनुसार, सदर हिल्स के कांगचुप गेलजांग सब-डिविजन में जिरीबाम-इंफाल रेलवे रूट पर स्थित इस गांव पर कथित तौर पर शाम करीब 5 बजे हमला हुआ, जब गांव के लोग रविवार की प्रार्थना के लिए स्थानीय चर्च में जमा हुए थे.

स्थानीय लोगों के अनुसार, हथियारबंद लोगों ने अत्याधुनिक हथियारों से गोलीबारी की और गांव पर विस्फोटक फेंके, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई. ग्रामीणों का यह भी दावा है कि हमलावरों ने भागने से पहले कई घरों में आग लगा दी.

अखबार के अनुसार, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हमलावर नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ़ नगालिम (एनएससीएन-आईएम) और ज़ेलियांगरोंग यूनाइटेड फ्रंट (जेडयूएफ-के) से जुड़े थे.

घायलों को पहले असम राइफल्स कैंप में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर आगे के इलाज के लिए इंफाल के रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) में शिफ्ट किया गया. इस घटना के बाद रिम्स कैंपस के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी गई है.

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह घटना जून में हुए विरोध-प्रदर्शनों के कुछ हफ़्ते बाद हुई है, जब कांगपोकपी ज़िले में गोलीबारी में घायल तीन कुकी युवकों को इलाज के लिए रिम्स में भर्ती कराया गया था.

प्रदर्शनकारियों ने यह आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में घुसने की कोशिश की थी कि घायल लोग हथियारबंद उग्रवादी थे.

नॉर्थईस्ट टुडे के अनुसार, लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जब आस-पास के इलाकों के कुकी-ज़ो ग्रामीणों ने पीड़ितों की मदद करने की कोशिश की, तो सीआरपीएफ के जवानों ने उन्हें गांव में घुसने से रोक दिया, जिससे थोड़ी देर के लिए टकराव की स्थिति बन गई.

कुकी-ज़ो समुदाय के नेताओं ने इस घटना की कड़ी आलोचना की और सवाल उठाया कि पास में सीआरपीएफ कैंप होने के बावजूद हथियारबंद हमलावर हमला करने में कैसे कामयाब रहे. उन्होंने तुरंत और निष्पक्ष जांच, संवेदनशील गांवों के लिए बेहतर सुरक्षा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

वहीं, रविवार की गोलीबारी के बाद राज्य में कुकी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली शीर्ष संस्था ‘कुकी इनपी मणिपुर’ (केआईएम) ने हमले की निंदा की और आरोप लगाया कि गोलीबारी के पीछे एनएससीएन (आईएम) और जेडयूएफ (कामसन) का हाथ है.

केआईएम ने कहा, ‘निहत्थे नागरिकों की बस्ती को जानबूझकर निशाना बनाना निर्दोष लोगों के खिलाफ आतंक का कृत्य है और यह मानवीय गरिमा, कानून के शासन पर गंभीर हमला है.’

संगठन ने आगे कहा, ‘केंद्र और मणिपुर सरकारों को यह समझना चाहिए कि निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार विफल रहने से राज्य की संस्थाओं पर जनता का विश्वास गंभीर रूप से कमजोर हो रहा है.’

ज्ञात हो कि मणिपुर में मेईतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय तनाव मई 2023 में हिंसा में बदल गया था. इसके बाद से हुई हिंसा में नागरिकों तथा राज्य और केंद्रीय सुरक्षा बलों के कर्मियों सहित 290 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं.

दोनों समुदाय अभी भी एक-दूसरे से भौतिक रूप से अलग हैं और उनके बीच ‘बफर ज़ोन’ बने हुए हैं, जहां सुरक्षा बल गश्त करते हैं.

फरवरी में राज्य में एक और जगह कुकी और नगा समुदायों के बीच संघर्ष शुरू हुआ, जिसमें दोनों समुदायों के सदस्य मारे गए, बंधक बनाए गए और उनके घर जला दिए गए.