नई दिल्ली: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा राशि के कथित गबन को लेकर जारी विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने पहली बार इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने दो पन्नों का एक विस्तृत बयान जारी करते हुए कहा कि मंदिर में चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया से उनका कोई संबंध नहीं रहा है और पूरे मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच होनी चाहिए.
मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी को ‘अविश्वसनीय’ घटना बताते हुए गिरि ने कहा कि इससे भगवान राम के भक्तों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंची है. उन्होंने यह भी कहा कि खबरों से पता चलता है कि चढ़ावे की कथित चोरी काफी समय से चल रही थी, जिसे उन्होंने भक्तों के लिए बेहद दुखद बताया.
राम भक्तों को संबोधित अपने बयान में गिरि ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में ट्रस्टी या कोषाध्यक्ष बनने का प्रयास या पैरवी नहीं की. उन्होंने कहा, ‘भगवान राम की किसी भी रूप में सेवा करना उनके लिए सौभाग्य और आत्मिक संतोष का विषय है और वे सभी के कल्याण की कामना करते हैं.’
उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के कार्यों के सिलसिले में वे लगभग हर एक से डेढ़ महीने में अयोध्या आते हैं और उन्होंने कभी भी हवाई यात्रा या अन्य यात्रा खर्च का प्रतिपूर्ति दावा ट्रस्ट से नहीं किया. उन्होंने अपनी सेवाओं को भगवान राम के प्रति निःस्वार्थ सेवा बताया.
गिरि ने कहा कि कोषाध्यक्ष के तौर पर, शुरुआत से ही सभी आय और व्यय का ऑडिटेड रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया है और यह किसी भी समय अधिकृत व्यक्तियों द्वारा जांच के लिए उपलब्ध है.
उन्होंने बताया कि हिसाब-किताब रखना उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा है, लेकिन चूंकि वे अक्सर यात्रा करते रहते हैं, इसलिए ट्रस्ट के पुणे कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट सहयोगी हर महीने के आखिरी चार-पांच दिनों में अयोध्या आते हैं. वे खातों की जांच करते हैं, ट्रस्ट के कार्यालय कर्मचारियों की मदद करते हैं और जरूरी मार्गदर्शन देते हैं.
गोविंद देव गिरि ने यह भी कहा कि ट्रस्टी बनने के बाद उन्होंने व्यक्तिगत रूप से कभी किसी से मंदिर के लिए नकद दान या उपहार स्वीकार नहीं किया. उन्होंने केवल दो अपवादों का उल्लेख किया- उनकी दिवंगत बड़ी बहन द्वारा दिया गया 11,000 रुपये का दान और पुणे में नीलम गो-हेजी द्वारा भेंट की गई एक किलोग्राम चांदी की ईंट.
उन्होंने कहा कि दोनों मामलों में तुरंत रसीद जारी की गई थी. इन दो मामलों के अलावा उन्होंने केवल चेक के माध्यम से दिए गए दान ही स्वीकार किए.
अपनी वित्तीय भूमिका स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सभी खर्च सीधे बैंक के माध्यम से किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि वे बैंक खातों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हैं, उनके पास कोई चेकबुक नहीं है और ट्रस्ट से कोई नकद भुगतान नहीं किया जाता. सभी भुगतान केवल बैंक ट्रांसफर के जरिए किए जाते हैं.
दान राशि की गिनती को लेकर उठे विवाद पर गिरि ने कहा कि मंदिर की हुंडी में जमा होने वाले चढ़ावे की गिनती वाले क्षेत्र से उनका कभी कोई संबंध नहीं रहा. उन्होंने कहा कि वे पुणे में रहते हैं और धार्मिक प्रवचनों के कारण लगातार यात्रा करते रहते हैं, जबकि चढ़ावे की गिनती प्रतिदिन होने वाली स्थानीय प्रशासनिक प्रक्रिया है, जिसे शुरू से ही अयोध्या के स्थानीय ट्रस्टी संभालते रहे हैं.
उन्होंने बताया कि दान गिनने की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) स्थानीय ट्रस्टियों और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने मिलकर तैयार की थी और उन्हें यह एसओपी पहली बार केवल पिछले महीने ही दिखाई गई.
कथित गबन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कितनी राशि चोरी हुई, यह कब हुआ और कैसे हुआ- ये सभी जांच के विषय हैं. उन्होंने कहा कि पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और लोगों को जांच एजेंसियों पर भरोसा रखना चाहिए. उन्होंने विशेष जांच दल (एसआईटी), पुलिस और न्यायिक प्रक्रिया पर विश्वास जताते हुए कहा कि दोषी किसी भी स्थिति में सजा से नहीं बच पाएंगे.
पारदर्शिता के प्रति ट्रस्ट की प्रतिबद्धता दोहराते हुए उन्होंने कहा कि भगवान राम के भक्त सत्य के साथ खड़े रहते हैं और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्शों का पालन करते हैं. उन्होंने पुलिस और जांच एजेंसियों से अपील की कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए और अदालतें आरोपी के नाम या पद की परवाह किए बिना कड़ी से कड़ी सजा दें.
कोषाध्यक्ष ने ट्रस्ट के सदस्यों से भी आग्रह किया कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विशेषज्ञों की सलाह से एक पूरी तरह सुरक्षित और त्रुटिरहित प्रबंधन प्रणाली विकसित की जाए. उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था में दान की गिनती की कठोर निगरानी, पूर्ण पारदर्शिता और श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए प्रत्येक योगदान का समुचित लेखा-जोखा सुनिश्चित किया जाना चाहिए.
अपने बयान के अंत में गोविंद देव गिरि ने विश्वास जताया कि भगवान राम की कृपा से सभी संदेह दूर होंगे और इस कथित अपराध से पैदा हुआ अंधकार छंट जाएगा.
