यूपी: एक जैसे नाम के चलते पुलिस ने गैर-ज़मानती केस में ग़लत शख़्स को पकड़ा; पीड़ित का मारपीट का आरोप

यूपी की हमीरपुर पुलिस ने एक जैसे नाम के चलते ग़लत व्यक्ति को ग़ैर-ज़मानती मामले में पकड़ लिया, जिसके बाद उनसे थाने में पूछताछ की गई. हालांकि, उन व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि थाने में पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट की, जिसके कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा.

(प्रतीकात्मक फोटो साभार: Tum Hufner/Unsplash)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर निवासी शिवराज सिंह का एकमात्र अपराध शायद उनका पहला नाम शिवराज ही था, जिसके चलते यूपी पुलिस की टीम 4 जुलाई को उन्हें ग़ैर-ज़मानती वॉरंट के बहाने उनके घर से खींचकर ले गई और स्थानीय थाने में कथित तौर पर उनसे सख्ती से पूछताछ की गई. बाद में पता चला कि पुलिस ने गलत व्यक्ति को पकड़ लिया था.

शिवराज सिंह ने आरोप लगाया कि थाने में उनके साथ इतनी बुरी तरह मारपीट की गई, जिस वजह से उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा. हालांकि, इस मामले में आलोचनाओं का सामना कर रही पुलिस का दावा है कि शिवराज सिंह को लगी चोटें उन्होंने खुद पहुंचाई थीं. फिलहाल पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है.

दरअसल, पुलिस के पास एक अलग व्यक्ति के ख़िलाफ़ ग़ैर-ज़मानती वॉरंट था, जिसका नाम भी शिवराज ही था. यह वॉरंट भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 325 के तहत दर्ज एक आपराधिक मामले में जारी किया गया था, जो जान-बूझकर गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है.

इस मामले में गलती से पुलिस हिरासत में लिए गए शिवराज सिंह साफ़ तौर पर सदमे में नज़र आए. अस्पताल के बेड से उन्होंने मीडियाकर्मियों से बात की और पुलिस पर थाने के अंदर उनके साथ मारपीट करने का आरोप लगाया.

उन्होंने कहा कि हमीरपुर के कोतवाली थाने के एसएचओ, एक सब-इंस्पेक्टर और एक कॉन्स्टेबल ने उनके साथ मारपीट की.

सिंह ने मीडियाकर्मियों से कहा, ‘उन्होंने मुझ पर झूठा आरोप लगाया कि मेरे खिलाफ गिरफ्तारी वॉरंट है. उन्होंने अपने फोन पर एक नकली गिरफ्तारी वॉरंट दिखाया और मुझे गिरफ्तार कर लिया, फिर थाने के अंदर मेरी पिटाई की.’

जिस अस्पताल में सिंह का इलाज हुआ, वहां के डॉक्टर धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि उनके सिर, चेहरे और छाती पर चोटें आई थीं. डॉक्टर सिंह ने कहा, ‘उन्होंने हमें बताया कि तीन पुलिसवालों ने उनके साथ मारपीट की. एक सब-इंस्पेक्टर ने उन्हें कई बार लात मारी. उनके सीने पर लात मारी गई.’

डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने सिंह के सिर का एनसीसीटी (नॉन-कॉन्ट्रास्ट कंप्यूटेड टोमोग्राफी) स्कैन किया, लेकिन बेहतर इलाज के लिए उन्हें कानपुर रेफर कर दिया गया है.

उन्होंने मीडिया से कहा, ‘यह शारीरिक हमले का मामला है.’

पुलिस का बयान

उधर, हमीरपुर पुलिस का कहना है कि सिंह को लगी चोटें उन्होंने खुद ही पहुंचाई थीं. हमीरपुर सदर के सर्कल अधिकारी यशपाल सिंह ने ‘द वायर’ को बताया कि यह ‘गलतफहमी’ इसलिए हुई क्योंकि दोनों व्यक्ति – शिवराज सिंह और संदिग्ध शिवराज – एक ही इलाके में रहते थे.

उन्होंने कहा, ‘उन्होंने गलती से गलत व्यक्ति को पकड़ लिया था.’

पुलिस ने बताया कि यह घटना तब हुई जब उनके कर्मी वॉन्टेड आरोपियों या जिनके खिलाफ वॉरंट जारी है, उनकी गिरफ्तारी या वेरिफिकेशन के लिए एक रूटीन अभियान चला रहे थे.

इस संबंध में एडिशनल सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि शिवकरण के बेटे शिवराज को एक गैर-ज़मानती वॉरंट के तहत वेरिफिकेशन के लिए कोतवाली पुलिस के पास लाया गया था.

वर्मा ने कहा, ‘वेरिफिकेशन के दौरान पता चला कि उसके पिता का नाम वॉरंट में दी गई जानकारी से अलग था.’ अधिकारी ने बताया कि इसके बाद शिवराज सिंह अचानक गुस्से में आ गए और उन्होंने थाने की खिड़की के शीशे पर हाथ मारा, जिससे उनके हाथ में चोट लग गई.

वर्मा ने इस बात को संज्ञान में लिया कि शिवराज ने कोतवाली पुलिस स्टेशन के अधिकारियों पर मारपीट का आरोप लगाया है और कहा कि थाने के अंदर लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच करके इस घटना की ‘उच्च-स्तरीय, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच’ की जाएगी.

अरविंद कुमार  ने कहा कि जांच के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अधिकारी ने बताया कि डॉक्टरों के मुताबिक, शिवराज सिंह की हालत अभी स्थिर है.

वहीं, सर्कल अधिकारी (सीओ) यशपाल सिंह ने उन आरोपों का खंडन किया कि पुलिस ने थाने के अंदर शिवराज सिंह के साथ मारपीट की थी.

अधिकारी ने कहा, ‘आईपीसी की धारा 325 के तहत वॉरंट के मामले में पुलिस उन्हें क्यों पीटेगी? उन्होंने अपना सिर ज़ोर-ज़ोर से दीवार पर मारना शुरू कर दिया  था और खिड़की के शीशे पर हाथ मारकर खुद को घायल कर लिया था. अच्छी बात यह रही कि उसके सिर पर कोई गंभीर चोट नहीं आई.’

उन्होंने आगे कहा कि मामले की जांच अभी चल रही है.

विपक्ष का निशाना

इस घटना को समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘बेहद दुखद, निंदनीय और शर्मनाक’ बताया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में कार्रवाई करने की अपील करते हुए यादव ने उन पर तंज भी कसा.

अखिलेश यादव ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘यूपी के लोग पुलिस स्टेशन के सभी दोषी कर्मियों को नौकरी से बर्खास्त करने की मांग कर रहे हैं. अभी कल ही मुख्यमंत्री ने कहा था कि प्रशासन को संवेदनशील होना चाहिए; ऐसा लगता है कि या तो पुलिस मुख्यालय ने यह बात सुनी नहीं या फिर वे मुख्यमंत्री की बात पर ध्यान ही नहीं देते.’

(उमर राशिद एक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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